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आईएमए की आड़ में इसाइयत का प्रचार, जयालाल का उतरा मुखौटा

WebdeskJun 08, 2021, 01:26 PM IST

आईएमए की आड़ में इसाइयत का प्रचार, जयालाल का उतरा मुखौटा

इंडियन मेडिकल एसोशिएशन (IMA) के चेहरे पर लगा मुखौटा दिल्ली की एक अदालत ने ऐसा उतार कर फेंका कि अब उन्हें मुंह छिपाने के लिए जगह ढूढ़नी पड़ रही है। साथ ही IMA अध्यक्ष डॉ. जॉनरोज ऑस्टिन जयालाल Dr Johnrose Austin Jayalal को कड़ी फटकार लगाते हुए अपने पद का इस्तेमाल ‘किसी धर्म (इसाई) का प्रचार न करने’ को भी स्पष्ट तौर पर कहा। दिल्ली के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अजय गोयल डॉ. जयालाल के खिलाफ दायर एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। डॉक्टर जयालाल पर कोविड-19 रोगियों के उपचार में आयुर्वेद पर ऐलोपैथिक दवाओं की श्रेष्ठता साबित करने की आड़ में ईसाई धर्म का प्रचार करने और हिंदू धर्म के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक अभियान शुरू करने का आरोप लगाया गया था। वाद दायर करते हुए रोहित झा ने कहा कि जयालाल हिंदुओं को ईसाई धर्म अपनाने के लिए जोर देने के मकसद से इंडियन मेडिकल असोसिएशन की आड़ लेकर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और देश के नागरिकों को गुमराह कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि किसी को भी दबाव या लालच के जरिए किसी भी परिस्थिति का फायदा उठाते हुए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। विद्वान न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान यह भी याद दिलाया कि “सुश्रुत प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा के देवता हैं और यही शल्य चिकित्सा ऐलोपैथी का अभिन्न अंग है।“ अदालत ने जयालाल को संगठन में अपने पद का प्रयोग किसी भी तरह धर्म के प्रचार के लिए नहीं करने की चेतावनी देते हुए आगाह किया कि “जिम्मेदार संगठन का नेतृत्व करने वाले किसी भी व्यक्ति से ऐसी हल्की टिप्पणी की आशा नहीं की जा सकती।“ आईएमए अध्यक्ष के रूप में जयालाल के लेखों और साक्षात्कारों का हवाला देते हुए रोहित झा ने अदालत से जयालाल के हिंदू धर्म या आयुर्वेद के लिए अपमानजनक सामग्री लिखने, मीडिया में बोलने औऱ उनके लेख प्रकाशित करने से रोकने का लिखित आदेश देने की गुजारिश भी की। अदालत ने कहा कि यह मुकदमा ऐलोपैथी बनाम आयुर्वेद के संबंध में एक मौखिक द्वंद्व का परिणाम प्रतीत होता है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने 3 जून 2021 को पारित अपने आदेश में आईएमए अध्यक्ष को निर्देश दिया, “उन्हें किसी भी धर्म के प्रचार के लिए आईएमए के मंच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए” याचिका में डॉ जे.ए. जयालाल के साक्षात्कारों और लेखों का हवाला देते हुए माँग की गई थी कि आईएमए अध्यक्ष को कुछ भी लिखने या मीडिया में बोलने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए जो हिंदू धर्म या आयुर्वेद का अपमान करता है। कोर्ट ने कहा कि “धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के मूलभूत पहलुओं में से एक है और इसे जीवित रखना किसी एक संप्रदाय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी भारतीयों को इसके लिए ठोस प्रयास करने होंगे।“ न्यायाधीश ने इकबाल के पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा, “मज़हब नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिंदुस्ताँ हमारा।” कौन हैं यह डॉ. जयालाल कहा जाता है कि वे अपने मरीज की व्याधियों के इलाज के साथ ही उनको इसाई धर्म में शामिल करने के लिए प्रेरक का भी काम करते हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेडिकल नीति के कट्टर विरोधी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना है कि समग्र चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद,यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को एलोपैथी के साथ जोड़कर एक समग्र चिकित्सा व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए ताकि हर व्यक्ति के सबका श्रेष्ठ मिल सके। बस यही वह बिन्दु है जहां डॉ. जयालाल और उनका IMA जबरन तलवार लेकर निकल पड़ता है। उनकी निकृष्ट सोच है कि दो टके वाली यह सारी चिकित्सा पद्धतियां कहां उनकी महान एलोपैथी के सामने खड़ी हो सकती हैं। वे तो एलोपैथी को सिर्फ Christianity के साथ ही जोड़कर देखना चाहते हैं। IMA से जुड़े अंदर के ही लोग बताते हैं कि डॉ. जयालाल की चिढ़ का मुख्य कारण इन चिकित्सा पद्धतियों का सनातन धर्म से जुड़ा होना है क्योंकि इन सभी चिकित्सा पद्धतियों के सिद्धांत संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध हैं। वे मानते हैं कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के विकास के साथ संस्कृत का विकास होगा जो प्रकारांतर से हिन्दुत्व के विकास में सहायक होगा। उन्होंने तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रार्थना करते हुए कहा कि यदि मोदी भारत में 2030 तक रह गया तो एलोपैथी का कोई नामलेवा भी नहीं बचा पाएगा। IMA प्रेसीडेंट के तौर पर अपने पहले संबोधन में कहा था कि ‘आज में जो कुछ भी हूं वह जीसस की कृपा है और आगे जो कुछ भी होगा वह उसका उपहार होगा।‘ वे IMA के माध्यम से संदेश देते थे कि जीसस ही सबका तारणहार व पालनहार है, वही सब रोगों से बचाएगा। मेडिकल सेवा के नाम पर गोरखधंधा मेडिकल सेवा की आड़ में इस तरह का पाखंड लंबे समय से चल रहा है। इसी पखवाड़े के शुरू में मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आदिवासी विकासखंड बाजना में किल कोरोना अभियान के दौरान एक महिला नर्स संध्या को धर्म विशेष का प्रचार करने के मामले में लोगों ने पकड़ा था। वह लोगों से कह रही थी कि ईशा मसीह की शरण में आने से कोरोना कभी नहीं होगा तथा इसके लिए कौन कौन से धार्मिक चैनल देखने चाहिए, यह भी बता रही थी। तहसीलदार के अनुसार महिला नर्स द्वारा धर्म विशेष का प्रचार किए जाने की शिकायत मिलने की पुष्टि हो गई है और महिला नर्स के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। उसके पास से प्रचार के पर्चे भी मिले हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे बड़ी साजिश करार दिया है। आयुर्वेद एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण आचार्य का कहना है कि आयुर्वेद एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। भारत में प्राचीनकाल से आयुर्वेद के माध्यम से इलाज होता आ रहा है। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के बाद एलोपैथी का प्रवेश जबरन थोपा गया। अंग्रेजों से पहले भारत में आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से ही राजा-महाराजा और बादशाहों का इलाज किया जाता था। हमारे ऋषियों ने गहन शोध के आधार पर आयुर्वेद को विकसित किया। इस पद्धति के साथ योग और प्राणायाम को जोड़ने का काम योगगुरू स्वामी रामदेव के नेतृत्व में पतंजलि योगपीठ में किया जा रहा है। आचार्य का कहना है कि देश के अनेक डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने पतंजलि अनुसंधान केंद्र आकर हमारा काम देखा। आईएमए यदि सबकुछ नकारना चाहेगी तो यह देश उसे स्वीकार नहीं करेगा। -सुदेश गौड़

Comments
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Pankaj
on Jun 09 2021 14:25:15

ऐसे लोग चिकित्सक नहीं है बल्कि ईसाई धर्म के प्रचारक हैं और अपना एजेंडा चला रहे हैं इन लोगों को देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

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