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कोरोना वैक्सीन लगाने विश्व में तीसरे नंबर पहुंचा भारत

WebdeskMar 04, 2021, 08:29 PM IST

कोरोना वैक्सीन लगाने विश्व में तीसरे नंबर पहुंचा भारत

जुलाई तक सरकार ने तीस करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्च काम करने वाले लोगों और बुजुर्गों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है। इस लिहाज से सरकार को 140 दिनों में 29 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाना है। कोरोना टीकाकरण में भारत विश्व में तीसरे नंबर पर है सोमवार एक मार्च से भारत में कोरोना टीकाकरण की व्यापक शुरूआत की गई। इससे पहले 16 जनवरी से शुरू औपाचारिक टीकाकरण अभियान में स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्कर को कोरोना का वैक्सीन दिया गया। प्राथमिक चरण के इस समूह का टीकाकरण करने के लक्षय को भारत से बेहतरीय तरीके से हासिल किया और 40 दिन में एक करोड़ 34 लाख लोगों को कोरोना का वैक्सीन दे दिया गया। इसी क्रम में एक मार्च से कोविन 2.0 के माध्यम से सिनियर सिटिजन और 45 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोगों के टीकाकरण की शुरूआत कर दी गई जिन्हें एक साथ कई बिमारियां जैसे आर्थराइटिस, सांस संबंधी तकलीफ, कैंसर या मधुमेह है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एम्स में कोरोना का वैक्सीन लगवाकर इस अभियान को गति दी, और लोगों से अपील की कि जो भी पात्र लोग हैं वह कोरोना टीकाकरण के लिए आगे आएं। कोरोना टीकाकरण के लिए देशभर में अब तक दो लाख से अधिक 2.11 वैक्सीन सेशन आयोजित किए गए हैं। बुजुर्गो के टीकाकरण के लिए निजी अस्पतालों की भी सहायता ली जाएगी। निजी अस्पताल में कोरोना वैक्सीन के लिए 250 रुपए खर्च करने होगें जबकि सरकारी अस्पताल में यह निशुल्क लगाई जाएगी। जुलाई तक सरकार ने तीस करोड़ स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंट लाइन वर्कर और बुजुर्गों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है। इस लिहाज से सरकार को 140 दिनों में 29 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगानी है, जिसे एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञ कोरोना टीकाकरण की गति को लेकर निश्चिंत हैं, भारत के पास गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के टीकाकरण का बेहतर अनुभव है। जिसके तहत एक हफ्ते में 17 करोड़ महिलाओं और बच्चों को जीवन रक्षक वैक्सीन दिए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर रोजाना एक लाख वैक्सीन सेशन आयोजित कर लक्षय को प्राप्त किया जाएगा। कोरोना टीकाकरण के लिए क्या करें ? कोरोना वैक्सीन के लिए लाभार्थी को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर खुद को पंजीकरण कराना होगा। मंत्रालय से स्पष्ट कहा है कि पंजीकरण के लिए किसी भी तरह के कोविन एप की जरूरत नहीं है, इसका प्रयोग केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए होगा। वेबसाइट पर पंजीकरण के लिए सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र अपलोड करनी होगी, इसके बाद आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी मिलेगा, जिसके बाद आगे की औपचारिकता पूरी की जा सकती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोरोना टीकाकरण की तारीख समय और केन्द्र की जानकारी मोबाइल पर भेज दी जाएगी। एक मोबाइल नंबर से अधिकतम चार लोगों का पंजीकरण किया जा सकता है। लाभार्थी अपनी पसंद के केन्द्र और तारीख का चयन कर सकते हैं। कोरोना टीकाकरण में भारत तीसरे नंबर पर कोरोना टीकाकरण के मामले में भारत का स्थान विश्व भर में तीसरे नंबर पर है। यूएस और यूके में भारत से एक महीने पर टीकाकरण शुरू किया गया, 55.3 मिलियन टीकाकरण के साथ यूएएस का स्थान पहले नंबर पर तथा यूके में साठ दिनों में 16.12 मिलियन डोज लगाई गई, जिसे दूसरे नंबर पर माना जा रहा है। 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण के बाद मात्र 40 दिनों में भारत में एक करोड़ 34 लाख लोगों को कोरोना का वैक्सीन दिया जा चुका है। अब सरकार एक मार्च से शुरू होने वाले बुजुर्गो के टीकाकरण की तैयारी कर रही है। जिसके लिए निजी अस्पतालों की भागीदारी भी तय कर दी गई है, मात्र सौ रुपए सेवा शुल्क और वैक्सीन की सरकार द्वारा निर्धारित कीमत के साथ बुजुर्ग निजी केन्द्र और अस्पताल पर कोरोना का वैक्सीन लगवा सकेगें। देशभर में दस हजार सरकारी और 20 हजार निजी केन्द्र पर कोरोना का टीका लगाया जा सकेगा। बुजुर्ग और 45 साल से अधिक ऐसे लोग जिन्हें एक साथ कई बिमारियां जैसे डायबिटिज, आर्थराइटिस और बीपी है, उनके लिए दिल्ली सरकार ने 136 निजी अस्पताल और क्लीनिक तैयार किए हैं, जहां कोरोना वैक्सीन लगवाने की सुविधा होगी। कोरोना की तीसरी लहर के बीच वैक्सीनेशन की चुनौती महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, रायपुर, चंडीगढ़ में पिछले पन्द्रह दिनों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसको देखते हुए केन्द्र सरकार ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर कोरोना टीकाकरण सुनिश्चित कराने के लिए कहा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. मनोहर अगनानी द्वारा लिखे पत्र में राज्यों के स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिया गया कि जिन क्षेत्रों में कोरोना के मामले बढ़े हैं उन्हें अति शीघ्र कंटेंटमेंट जोन घोषित किया गया। सरकार ने इससे पहले कोरोना के एक्टिव मामलों का पता लगाने के लिए एंटीबॉडी जांच निगेटिव आने पर भी आरटीपीसीआर जांच को अनिवार्य रूप से करने के आदेश दिए हैं। जिससे कोरोना के मामलों की सही जानकारी पता लगाई जा सके। 56 लाख लोगों ने नहीं ली दूसरी डोज सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश भर में 62,60,242 हेल्थकेयर वर्कर या स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी गई है। यह सभी स्वास्थ्यकर्मी 13 फरवरी से कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के पात्र है। दूसरी डोज लेने की दर फि लहाल धीमी है। बीस फरवरी तक 6,10,899 स्वास्थ्य कर्मियों को ही दूसरी डोज दी जा सकी। इस लिहाज से कुल 56,649,343 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लगनी बाकी है। 20 देशों को भारत ने दी कोरोना की वैक्सीन एक वर्ष से भी अधिक समय बीत चुका है लेकिन दुनिया के कई देश कोरोना महामारी से आज भी जूझ रहे हैं। इस बीच दुनिया के लिए भारत एक फरिश्ते की तरह सामने आया है। जी हां, भारत ने इस महामारी पर न सिर्फ देश के भीतर काबू पाने में सफलता हासिल की बल्कि दुनिया को इससे उभरने में भी मदद की। भारत ने कई देशो की मदद करने के लिए अपना हाथ स्वयं बढ़ाया। गावी (ग्लोबल एसोसिएशन फॉर वैक्सीन एलायंस) और यूनिसेफ की सहायता से देश में बनाई गई वैक्सीन दूसरे देशों को भी भेजी जा रही है। अभी तक भारत करीब 20 देशों को वैक्सीन भेज चुका है। इसी कड़ी में भारत ने मेक्सिको को आठ लाख से अधिक वैक्सीन उपलब्ध कराई हैं। मेक्सिको को भारत से एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन की 870,000 डोज उपलब्ध कराई गई है। मेक्सिको 42% वैक्सीन भारत से आयात करेगा गावी की मदद से मेक्सको भारत से अपने देश की कुल वैक्सीन खपन का 42 प्रतिशत हिस्सा भारत से लेगा। इस बावत हुए एक करार के अनुसार शिपमेंट से एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की दो मिलियन डोज लगभग 42% वैक्सीन मेक्सिको भारत से आयात करेगा। वैक्सीन की पैकेजिंग का काम स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मेक्सिको उन देशों में से एक है जहां कोरोना के कारण सबसे अधिक लोगों की मौत हुई है। यहां दिसम्बर महीने में स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन देने की शुरुआत की गई थी लेकिन फाइजर कंपनी की वैक्सीन की खेप के देरी से पहुंचने के कारण इस प्रक्रिया में देरी हो गई। क्या कहते हैं विशेषज्ञ नेशनल कोविड टास्क फोर्स टीम के सदस्य डॉ. एनके अरोड़ा कहते हैं "देश में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए जिन दो कोवैक्सिन और कोविशील्ड दो वैक्सीन को प्रयोग की अनुमति दी गई है, दोनों ही नये स्ट्रेन के लिए भी कारगर पाई गई है। इसलिए नये स्ट्रेन या तीसरी लहर से घबराने की जरूरत नहीं है, और जहां तक जुलाई तक 30 करोड़ आबादी को टीकाकरण करने की बात है तो हमारे पास अब तक का सबसे बड़ नियमित टीकाकरण चलाने का अनुभव है, हम एक दिन में एक लाख से अधिक सेशन आयोजित कर गति बढ़ा सकते हैं। जुलाई तक देश में लक्षित समूह का टीकाकरण कर दिया जाएगा।"

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