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सूरत के ‘देवदूत’

WebdeskApr 27, 2021, 02:16 PM IST

सूरत के ‘देवदूत’

सूरत शहर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा में लगे हैं। इन कार्यकर्ताओं के कार्यों से लाभान्वित लोग उन्हें ‘देवदूत’ की संज्ञा दे रहे हैं इस समय सूरत (गुजरात) के लोग भी महामारी से परेशान हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में भारी भीड़ है। शहर के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी चौबीस घंटे काम कर रहे हैं, फिर भी अस्पतालों के गलियारों में मरीजों को लेटे देखा जा सकता है। इस कारण स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के गुस्से का शिकार भी बन रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या सीमित होने से स्वास्थ्यकर्मियों को अधिक काम करना पड़ रहा है। इसका असर उनकी सेवाओं में दिखाई दे रहा है। ऐसे में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने यह जिम्मेदारी स्वयं के हाथ में लेने का निर्णय लिया। इसके बाद सिविल अस्पताल प्रशासन से चर्चा कर 50 कार्यकर्ताओं ने दोनों पाली में मरीजों की देखरेख करने, उनके खाने-पीने आदि का कार्य अपने हाथ में ले लिया है। ये कार्यकर्ता 15 दिन से यह काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बजरंग दल के कार्यकर्ता नि:शुल्क काढ़ा वितरण का कार्य भी निरंतर कर रहे हैं। प्रतिदिन लगभग 1,000 लोगों को काढ़ा वितरित किया जा रहा है। ये कार्यकर्ता उन शवों का अंतिम संस्कार भी करते हैं, जिनके रिश्तेदार अंतिम संस्कार करने में सक्षम नहीं हैं। इस कार्य के लिए पांच कार्यकर्ता और एक शव वाहिनी चौबीस घंटे सेवा में रहती है। प्रतिदिन तीन से पांच शवों का अंतिम संस्कार नि:शुल्क किया जा रहा है। बजरंग दल, सूरत महानगर के प्रमुख देवी प्रसाद दुबे कहते हैं, ‘‘हर संकट की घड़ी में हमारे कार्यकर्ता समाज के साथ खड़े रहते हैं। ये कार्यकर्ता हनुमान की भूमिका में रहकर जन सामान्य की सेवा कर रहे हैं।’’ महामारी से इतने लोग मर रहे हैं कि सूरत के विभिन्न श्मशानों घाटों पर भी अंतिम संस्कार के लिए कतार लगी रहती है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के 50 कार्यकर्ता सूरत के प्रसिद्ध रामनाथ घेला अंतिम क्षेत्र, उमरा में दिन-रात मृत देहों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। एक अन्य श्मशान घाट कैलाश मोक्षधाम, कठोर में 22 स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं। विहिप, सूरत महानगर के सह महामंत्री संजय बंसल बताते हैं, ‘‘विहिप के कार्यकर्ता नौ अप्रैल से विभिन्न श्मशान घाटों पर तैनात हैं। वहां वे हर उस काम को करते हैं, जिसकी जरूरत पड़ती है।’’ विहिप से जुड़ी मातृशक्ति की बहनें सूरत के दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों में और अन्य स्थानों पर प्रतिदिन गायत्री महायज्ञ कर रही हैं, ताकि वातावरण से नकारात्मकता और जीवाणुओं का नाश हो। यही नहीं, विहिप के कार्यकर्ता अमरोली विस्तार में अपने घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे मरीजों तक खाना भी पहुंचा रहे हैं। बहनें भोजन तैयार करती हैं और कार्यकर्ता उसे 150 लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उम्मीद है कि समाज के सहयोग से यह महामारी जल्दी ही विदा हो जाएगी। गोपाल गोस्वामी

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