बोधिवृक्ष

पितर पक्ष - पूर्वजों के स्मरण के दिन

 सनातन कैलंडर के सातवें महीने आश्विन महीने का कृष्ण पक्ष पितरों को समर्पित है और पितृ पक्ष के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि पितर लोक से पितर इन दिनों में धरती पर आते हैं वह अपनी संतान से श्राद्ध की आशा लेकर आते हैं । पितर ऋण चुकाने का ये एक सुअवर माना जाता है । पितृ ऋण वैसे तो कोई नहीं चुका सकता । अपने पितरों के कारण ही हम इस पृथ्वी पर आते हैं उन्होनें ने ही हमें ये देह दी है । इन दिनों में लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध शब्द श्रद्धा ..

यह भी बीत जाएगा

ओशो अपने भक्तों को बड़ी प्रसिद्ध सूफी कहानी सुनाते थे। एक सम्राट ने अपने सारे बुद्धिमानों को बुलाया और उनसे कहा ‘मैं कुछ ऐसे सूत्र चाहता हूं, जो छोटा हो, बड़े शास्त्र नहीं चाहिए, मुझे फुर्सत भी नहीं बड़े शास्त्र पढ़ने की। ..

संसार में मनोबल से बड़ा कुछ नहीं

एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने भिक्षुओं के साथ विहार करते हुए शाल्यवन में एक वटवृक्ष के नीचे बैठ गए। धर्म चर्चा शुरू हुई और उसी क्रम में एक भिक्षु ने उनसे प्रश्न किया "प्रभु! कई लोग दुर्बल और साधनहीन होते हुए भी कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी मात देते हुए बड़े-बड़े कार्य कर जाते हैं, ..

मनोबल ऊंचा हो तो कठिन से कठिन कार्य भी हो जाता है संभव

गौतम बुद्ध अपने भिक्षुओं के साथ विहार करते हुए शाल्यवन में एक वटवृक्ष के नीचे बैठ गए। धर्म चर्चा शुरू हुई और उसी क्रम में एक भिक्षु ने उनसे प्रश्न किया "भगवन्! कई लोग दुर्बल और साधनहीन होते हुए भी कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी मात देते हुए बड़े-बड़े कार्य कर जाते हैं..

भिक्षुक का ज्ञानोपदेश - ईशावास्योपनिषद

यह प्राचीन काल के दो ऋषियों से सम्बंधित वृतांत है। उस प्राचीन युग में शौनक कापी और अभिद्रतारी दो ऋषि थे, दोनों एक ही आश्रम में रहते हुए ब्रह्मचारियों को शिक्षा-दीक्षा दिया करते थे।..