आवरण कथा

दिल्ली को श्मशान बनाने का षड्यंत्र

अदालत ने दिल्ली सरकार को कई मौकों पर डांटा कि आपके पास सफाई कर्मचारी को वेतन देने के लिए पैसा नहीं है पर विज्ञापन में पानी की तरह पैसा बहा रहे हो। अदालत ने तो यह भी कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री लोकसेवक रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि आम इंसान के लिए तंत्र काम कैसे करता है। सरकार सिर्फ हाहाकार मचा रही है, करना कुछ भी नहीं चाहती। इनकी नीयत सिर्फ केन्द्र सरकार को बदनाम करने की है।..

सूरत के ‘देवदूत’

सूरत शहर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा में लगे हैं। इन कार्यकर्ताओं के कार्यों से लाभान्वित लोग उन्हें ‘देवदूत’ की संज्ञा दे रहे हैं..

मदद को बढ़ते हाथ

संकट के इस समय में समाज से ही अनेक लोग आगे आकर लोगों की मदद को जुटे हैं। उनके प्रयास सराहनीय हैं और बड़ी संख्या में आबादी का भला कर रहे हैं..

बचाव ही दवा

कोरोना वायरस से बचने का हर संभव प्रयास करें, ताकि अस्पतालों के धक्के न खाने पड़ें ..

स्वयंसेवक और संतों की सेवा-गाथा

पूरे भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और विभिन्न संप्रदायों के संत कोरोना पीड़ितों की सहायता में लगे हैं। कोई जरूरतमंदों तक आक्सीजन पहुंचा रहा है, तो कोई खाना और दवाई बांट रहा है। कई स्वयंसेवक तो अपनों को खोने के बाद भी दिन-रात समाज के लिए कार्य कर रहे हैं ..

दीया और तूफान

कोविड-19 की दूसरी लहर की चुनौती बहुत बड़ी है। इस अप्रत्याशित और विशालकाय संकट से पार पाने के लिए हमें संकल्प, धैर्य, मनोबल और तैयारी की आवश्यकता है।..

चीनी वायरस कोरोना : सावधानी और संयम

इस समय देश में कोरोना की दूसरी लहर तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। यह लहर एक बड़े कहर में न परिवर्तित हो जाए, इसके लिए हमें सतर्कता बरतनी होगी। घबराने के बजाय सावधानी और संयम अपनाना होगा..

भूमि-सुपोषण एवं संरक्षण अभियान-मां की रक्षा के लिए उतरे पुत्र

शास्त्रों में कहा गया है कि धरती हमारी मां है। दुर्भाग्य से इस मां के कुछ पुत्रों ने ही इसका ऐसा दोहन किया कि अब इसकी रक्षा के लिए पूरे देश के धरती पुत्र ‘भूमि सुपोषण एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय जन अभियान’ नाम से एक आंदोलन शुरू कर रहे..

वैश्विक संपन्नता का कालजयी चिंतन

‘प्लेंटी फॉर आल’ के लेखक कृषि विज्ञानी एस.ए. दाभोलकर ने कृषि और ग्रामीण विकास के लिए व्यवहार सिद्ध सूत्र बनाये। विज्ञान की नई सामाजिकता विकसित करने के लिए उन्होंने प्रयोग परिवार की अवधारणा दी। ..

कृषि विशेष : जैविक अपनाएं, मिट्टी की ताकत बढ़ाएं

कृषि में उर्वरकों और रसायनों का प्रयोग अचानक बंद करने से खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए किसानों को रसायनों पर निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए उसकी जगह जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। इससे न केवल खेतों का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति और देश की सेहत भी सुधरेगी..

धरती में थमा पानी, खेती में लाया निखार

देश के कई इलाकों में किसानों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या है सिंचाई। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति के कारण हर साल फसलें बर्बाद होती हैं। इसलिए किसानों को सिंचाई की दूसरी विधियों और सूक्ष्म तकनीकें अपनाने की जरूरत है ताकि तेजी से गिरते भू-जल स्तर को न केवल रोका जा सके, बल्कि भूमिगत जल भंडार को बढ़ाया भी जा सके ..

कृषि विशेष : नई पौध के ‘पुजारी’

इन दिनों हरियाणा-दिल्ली की सीमा ‘सिंघु बॉर्डर’ किसान आंदोलन के लिए पूरी दुनिया में चर्चित है। यहां कुछ किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ लगभग चार महीने से आंदोलन कर रहे हैं। पर सिंघु बॉर्डर के आसपास के अनेक गांवों के किसान अपने को आंदोलन से दूर रखकर खेती-किसानी में नित नए प्रयोग कर रहे हैं। यही नहीं, इन गांवों के किसान परंपरागत कृषि से हटकर अलग किस्म की खेती करके अच्छा पैसा कमा रहे हैं। कुछ किसान फूलों की खेती करते हैं, तो कुछ मशरूम की। कुछ बेमौसमी सब्जियों ..

जैविक खेती अच्छी खेती

अधिक पैदावार के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इतना अधिक प्रयोग बढ़ गया है कि अनाज का मूल तत्व ही खराब होने लगा है। इसमें आज सकारात्मक बदलाव है कि किसान जैविक खेती की ओर जा रहे हैं..

देश की दशा और दिशा बदल रहे किसान

लीक से हटकर सोचने और मेहनत करने वाले को सफलता मिलती ही है। खेती के क्षेत्र में इस उक्ति को साकार कर रहे हैं भारत के अनेक किसान, जिन्होंने नवाचार और नई तकनीक की मदद से मोटा मुनाफा ही नहीं कमाया बल्कि बहुतों को राह दिखाई है। उनके बताए रास्ते पर चलकर आज कई नौजवान किसान खेती में नए जोश के साथ जुटे हैं ..

असम विधानसभा चुनाव : सुशासन के समर्थन में लहर

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के विकास के मुद्दे के सामने विपक्षी गठबंधन कहीं टिकता नहीं दिख रहा। कांग्रेसी और वामपंथी नेता मतदाताओं को रिझाने के लिए मंदिर-मंदिर भटक रहे हैं, लेकिन लोग इसे दिखावे के अलावा और कुछ नहीं मान रहे। बदरुद्दीन अजमल के बयानों से भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी होती दिख रही..

खत्म होगा खेला-तोला!

बंगाल में प्रथम चरण का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे भद्रलोक को जकड़े बैठा हिंसक राजनीतिक का भय कमजोर पड़ने लगा है। लोग स्पष्ट तौर पर कहने लगे हैं कि बंगाल तुष्टीकरण और हिंसा की राजनीति से तंग आ चुका है। चुनाव के प्रति लोगों की बेसब्री क्या सत्ता परिवर्तन का संकेत है !..

‘दुकान’ बंद होने की छटपटाहट

विदेशी पैसे पर गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाने वालों से सरकार ने पारदर्शिता की अपेक्षा की तो वे नाना प्रकार के बहाने बनाने लगे। आखिर में सरकार ने सख्ती दिखाई और उनकी ‘दुकान’ बंद हो गई। अब काम का ढर्रा बदलने वाले शातिरों की छटपटाहट को कथित आंदोलनों में विभिन्न रूपों में देखा जा सकता है..

कठपुतलियों की कसक, आजादी की अलख!

कृषि कानून, मुसलमानों का उत्पीड़न और नागरिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर दुनिया में भारत की छवि बिगाड़ने के प्रयास हो रहे हैं। देश में असहमति और सरकार की नीतियों के विरोध के बहाने देश विरोधी ताकतों के इशारे पर कुछ कठपुतलियां उनके मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने में जुटी हैं। हर बार विरोध करने वाले चेहरे भले ही अलग दिखते हों, लेकिन इनके तार आपस में जुडेÞ हुए नजर आते हैं। इनका एक ही उद्देश्य है- अराजकता फैलाकर देश को खांचों में बांटना..

कन्वर्जनऔरआरक्षण : समानता का मुखौटा चाहिए ‘कोटा’

आजकल ‘दलित-मुस्लिम’ एकता का नारा कुछ ज्यादा ही सुनाई देता है। ऐसा ही नारा आजादी से पहले मुस्लिम लीग ने भी दिया था। इससे प्रभावित होकर कुछ दलित नेताओं ने पाकिस्तान बनाने की मांग का समर्थन किया। बाद में उन्हें इस छलावे का पता चला और पाकिस्तान से पलायन कर भारत आ गए। आज जो दलित नेता ऐसे नारे लगा रहे हैं, वे इतिहास से सबक लें ..

#पीएफआई : टाइम बम

लखनऊ में पीएफआई कमांडर और उसके साथी की गिरफ्तारी के बाद पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया के खतरनाक खेल की परतें उघड़नी शुरू हुई हैं। भारत को विध्वंसक आघात देने का षड्यंत्र कितना गहरा है जानने के लिए पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट-..

इस साजिश को समझना जरूरी

यह कभी किसान आंदोलन था ही नहीं। यह आईएसआई के प्रायोजित कार्यक्रम के तहत खालिस्तान की मांग को फिर से जिंदा करने का एक जरिया भर है। पूरे आंदोलन के दौरान भिंडरावाला के पोस्टर लहराते रहे। पंजाबी गायक खालिस्तान के समर्थन में गीत गाते दिखे। देश तोड़ो गैंग की तस्वीरें लगाई गई..

अराजकता की राजधानी

गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली की सड़कों पर हिंसा का नंगा नाच हुआ। लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार कर दिया गया। शुरु से ही इस आंदोलन का समर्थन कर रहे राहुल गांधी या दिल्ली की गद्दी पर बैठे अरविंद केजरीवाल क्या इस तरह की घटना के लिए जवाबदेह नहीं हैं..