आवरण कथा

ऐसे करें लोक सेवा की तैयारी

संघ लोकसेवा आयोग हर वर्ष 27 प्रकार की सेवाओं के लिए प्रदेश परीक्षाएं आयोजित करता है। इन परीक्षाओं में सफलता के लिए कड़ी मेहनत और धैर्य की आवश्यकता है। आप पांचवीं से लेकर बारहवीं तक की एनसीईआरटी की पुस्तकों का गहन अध्ययन करें। इससे बहुत हद तक आपकी राह आसान हो सकती है..

बच्चों को संस्कारित करती है मातृभाषा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बच्चों की प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने को अनिवार्य बनाया गया है। इस संबंध में कुछ लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है परंतु यह जानना आवश्यक है कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में ही क्यों दी जानी चाहिए। कन्फ्यूशियस, गांधी जी, सुदर्शन जी, सबने मातृभाषा को ही प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर हितकारी माना है..

नई शिक्षा नीति नए भारत की नींव : प्रधानमंत्री

नई शिक्षा नीति की पहली वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह सिर्फ कोई प्रपत्र नहीं बल्कि एक महायज्ञ है, जो नए देश की नींव रखेगा और एक सदी तैयार करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब इसे जमीन पर उतारने के लिए जो भी करना होगा, वह जल्द किया जाएगा..

मैकाले- मुक्त शिक्षा व्यवस्था की नींव

सन् 1823 में 100 प्रतिशत साक्षरता वाला देश 1947 में केवल 12 प्रतिशत साक्षरता तक सिमट गया था। भारत के सामने पहली चुनौती यह थी कि हमारे जन-जन को शिक्षित कर सके। शिक्षा को पुन: सर्वव्यापी करने की दृष्टि से प्रयत्न हुए और उसमें गुणवत्ता और नीति में परिवर्तन दुर्लक्षित रहा। 73 वर्ष बाद पहली बार एक ऐसी दृष्टि वाली शिक्षा नीति हमारे सामने आई है जो मैकाले के षड्यंत्र को पूरी तरह से विफल कर सकती है..

सा विद्या या विमुक्तये

विद्या वही है, जो बंधन से मुक्त करे। आज के संदर्भ में कह सकते हैं कि समाज को गरीबी, विषमता, भेदभाव से मुक्त करना ही विद्या का असली उद्देश्य है। इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक साल पहले नई राष्टÑीय शिक्षा नीति बनाई गई। हर व्यक्ति को उस नीति की जानकारी होनी चाहिए..

समान नागरिक संहिता-राष्ट्र की सामाजिक साख

देश में समान नागरिक संहिता बनाने की बात प्रारंभ हुए नौ दशक से ऊपर हो गए। देश के स्वतंत्र होने पर संविधान सभा में भी यह विषय रखा गया। संविधान सभा के मुस्लिम सदस्यों को इससे निजी मजहबी कानूनों में हस्तक्षेप जैसा लगा जिसका उन्होंने विरोध किया। परंतु के.एम. मुंशी जैसे दिग्गजों ने सभी भ्रमों का निवारण किया..

आवरण कथा : एक देश, एक विधान अब हो समाधान

विवाह की न्यूनतम उम्र, विवाह विच्छेद (तलाक) का आधार, गुजारा भत्ता, गोद लेने का नियम, विरासत का नियम और संपत्ति का अधिकार सहित उपरोक्त सभी विषय नागरिक अधिकार और मानवाधिकार से सम्बन्धित हैं जिन्हें धार्मिक या मजहबी व्यवहार नहीं कहा जा सकता लेकिन आजादी के 74 साल बाद भी धर्म या मजहब के नाम पर महिला-पुरुष में भेदभाव जारी है। हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के माध्यम से 'समान नागरिक संहिता' की कल्पना की थी ताकि सबको समान अधिकार और समान अवसर मिले और देश की एकता-अखंडता मजबूत हो लेकिन वोटबैंक राजनीति ..

आवरण कथा : टोक्यो ओलंपिक दावे में है दम

अगर देखना है मेरी उड़ान को, थोड़ा और ऊंचा कर दो इस आसमान को... वास्तव में इसी नई सोच, इसी ताजे दमखम के साथ भारतीय दल टोक्यो ओलंपिक में चुनौती पेश करने गया है। पहली बार हुआ है जब भारतीय दल से दहाई की संख्या में पदकों की उम्मीदें हैं। पदकों के लिए निशानेबाजी, तीरंदाजी, मुक्केबाजी, कुश्ती, जेवलिन थ्रो और बैडमिंटन स्पधार्ओं पर भारतीयों की नजर रहेगी।इससे पूर्व भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2012 के लंदन ओलंपिक में छह पदकों का रहा है। इस बार भारतीय दल में कई विश्व नंबर एक खिलाड़ी भी हैं तो स्वर्ण की चाहत भी ..

बंगाल हिंसा : तृणमूल: शूल का शमन

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुई राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के पतन की कहानी कहती है। राज्य में ये हालात हो गए कि माननीय उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और कहना पड़ा कि राज्य में जनता का जीवन और आजादी खतरे में है। राज्य में सत्ता की बर्बर तानाशाही के कारण हिंसा और बलात्कार से पीड़ित लोग पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने से भी डर रहे थे और पुलिस भी कोई मदद नहीं कर रही थी..

फर्जी खबरों के निशाने पर सद्भाव

2014 के बाद फेक खबरों की बाढ़ आ गई। इनका उद्देश्य समाज में जातिगत, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाकर वर्तमान सत्ता को कठघरे में खड़ा करना था। इसके लिए घटना की रिपोर्टिंग में तथ्यों से छेड़छाड़, वैचारिक दुराग्रह, मनगढ़ंत तथ्य, तथ्यों को जबरन जातिगत या सांप्रदायिक नजरिए से देखने की दृष्टि का उपयोग किया जाता था। पाञ्चजन्य ने 2018 में फेक खबरों की पड़ताल की थी और पाठकों से फेकन्यूज के विरुद्ध मिलकर लड़ने का आह्वान किया था। उनमें से चुनिंदा खबरों और उनकी पड़ताल को हम आपके सामने रख रहे हैं, यह बताने के लिए कि किसी व्यक्ति, ..

फेक न्यूज:पहरेदार का पर्दाफाश

2014 में भारतीय राजनीति में नए युग के शुभारंभ के बाद कई शक्तियां बिलबिला गईं। उन्होंने बिलबिलाहट में भारतीय समाज में जहर घोल कर नए सत्ता प्रतिष्ठान की छवि और साख को धूमिल करने का षड्यंत्र रचा। इसके लिए आड़ ली गई तथ्यान्वेषण की। इसका अगुआ बना आॅल्ट न्यूज और उसका संस्थापक मोहम्मद जुबेर। परंतु यह लगातार दिखा कि आॅल्ट न्यूज और जुबेर की सूचनाएं हमेशा फॉल्ट (गड़बड़) लाइन पर रहीं। उनका उद्देश्य सत्य के उद्घाटन की बजाए आख्यान (नैरेटिव) सेट करना रहा..

खून से भीगे थे वे शब्द...भाग मिल्खा भाग

खून से भीगे थे ये शब्द... भाग मिल्खा भाग...। ये शब्द कहानी बने हैं, मगर इसकी पर्तें पलटेंगे तो पता चलेगा कि ये रुपहले पर्दे की कहानी के लिए गढ़े हुए शब्द नहीं हैं। इसमें बहुत दर्द है, वेदना है, मरते हुए बाप की टीस है, खून है। और इसके बाद किशोरवय मिल्खा जब भागा तो थमा नहीं और दुनिया के लिए मिसाल बन गया।..

मिल्खा से मिथक तक

नामी धावक मिल्खा सिंह अपने जीवनकाल में ही दंतकथाओं के पात्र बन गए थे। यह उनकी जिजीविषा, मेहनत करने की अदम्य इच्छा शक्ति ही थी कि वे जिस दिल्ली में 1947 में फटेहाल और अकेले आए थे, उसी दिल्ली में आगे चलकर उनके नाम पर साउथ दिल्ली के खेल गांव में एक सड़क का नाम मिल्खा सिंह मार्ग रखा गया..

विश्व योग दिवस (21जून) पर विशेष : भारतीय कुटुम्ब परम्परा की विशिष्टता

भारत की कौटुम्बिक आत्मीय-प्रतिबद्धता हमारी बड़ी निधि है। पारिवारिक स्नेह-त्याग समर्पण और स्वजनों का अंकुश-अनुशासन चिरकाल से व्यक्ति परिवार और समाज में एकता, सामंजस्य और राष्ट्र की चौमुखी प्रगति का आधार सिद्ध हुआ है..

व्याधि उत्पत्ति प्रतिबंध में उपयोगी है योग

आयुर्वेद आरोग्य के लिए प्रयत्न करता है। आरोग्य के लिए व्याधि उत्पन्न प्रतिबंध में योग का सर्वाधिक उपयोग होता है। तृष्णा को विविध व्याधि का कारण माना गया है। तृष्णा से मुक्ति मन के या चित्त के निग्रह से संभव है।..

विश्व योग दिवस (21जून) पर विशेष : आहार : मनुष्य जीवन का आधार

आहार मनुष्य जीवन का आधार है। गीता की स्थापना है कि दु:ख और शोक भी आहार से ही आते हैं। परंतु आहार क्या है? स्वाद के अलावा गंध, ध्वनियां, दृश्य, स्पर्श भी आहार हैं। आहार की शुद्धि से हमारे जीवन की सत्व शुद्धि है। मनोनुकूल स्थान पर भोजन से मानसिक विकार नहीं होते। मनोनुकूल स्थान और मनोनुकूल भोजन स्वास्थ्यवर्द्धक हैं।..

विश्व योग दिवस (21जून) पर विशेष : संपूर्ण जीवनशैली है आयुर्वेद

आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है। हालांकि इसका प्रयोग स्वस्थ एवं रोगी, दोनों के हितार्थ किया जाता है। इन अर्थों में देखा जाए तो इसे चिकित्सा के बजाय आरोग्यशास्त्र कहना अधिक उचित होगा।..

विश्व योग दिवस (21जून) पर विशेष : ‘योग: कर्मसु कौशलम’

योग का अर्थ है विचार, शब्द और कर्म का परस्पर संतुलन और समन्वय जो हर व्यक्ति को व्यक्तिगत तौर पर ही बेहतर भविष्य का आश्वासन नहीं देता, बल्कि समाज के सदस्य के तौर पर मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और विश्व शांति का दीप प्रज्जवलित करने के लिए भी सक्षम बनाता है। योग सिर्फ भौतिक शरीर को स्वस्थ रखने का ज्ञान नहीं, बल्कि उससे इतर एक ऐसा आधारस्तम्भ है जिस पर एक सुव्यवस्थित विचारवान समाज का गठन हो सकता है।..

कोरोना और कन्वर्जन

कोरोना काल को इसाई मिशनरियों ने अवसर के तौर पर लिया और बीमारों, गरीबों के लिए प्रार्थना, दवा, कपड़े और भोजन पैकेट के जरिए उन्हें अपने झांसे में लिया। लॉकडाउन में ढील के साथ ही इन हिंदुओं का इसाई मत में कन्वर्जन और नए गोस्पेल का निर्माण इस स्तर पर हुआ जितना इससे पूर्व के 25 वर्षों में नहीं हुआ था।..

पेटा-अमूल विवाद : गाय बहाना, देश निशाना

पेटा इंडिया ने भारत की सहकारी दूध कंपनी अमूल को एक पत्र लिखकर उसे पशु दूध छोड़कर वीगन दूध उत्पादित करने की सलाह दी। इस पत्र पर दोनों संस्थाओं के बीच जमकर रार मची है। यहां सवाल यह है कि पेटा इंडिया ने यह सलाह क्यों दी? क्या पेटा का यह पत्र विदेशी कंपनियों के इशारे पर है? यह पत्र क्या भारतीय संस्कृति और व्यापारिक ताने-बाने पर सीधा आघात करने के इरादे से है? ..

जल आंदोलन  : चरागाह की सेवा में ‘ट्रैक्टर’

जोधपुर के रायमलवाड़ा ने सामूहिक चेतना और साझी मेहनत से एक अलग ही कहानी लिख दी। कभी गोवंश के चरागाह रही गोचर भूमि पर झाड़-झंखाड़ ने कब्जा जमा लिया जिससे मवेशी बेआसरा हो गये। पानी भी 800 फुट तक नीचे चला गया। कुछ लोगों ने समस्या का सिरा पकड़ा और 20 बीघा से शुरू कर 2000 बीघा गोचर भूमि को आबाद कर दिया। अब गांव के हर घर में टांका है।..

जल आंदोलन : ओरण-गोचर से ‘जल-चेतन’ गांव

पश्चिमी राजस्थान की बापिणी पंचायत समिति के प्रकाश व्यास जब गांव लौटे तो गोचर सूखे थे, ओरण बंजर पड़ा था, नलकूपों ने भूजल स्तर को 700-800 फुट नीचे कर दिया था। खेळी सूखे थे। प्रकाश ने गांव को जल-चेतन करने का बीड़ा उठाया और गोचर से काम से शुरू किया। कुछ वर्ष की मेहनत में गांव का कायापलट हो गया और आज सवा सौ लोगों की जोशीली टीम आसपास के 45 गांवों की तस्वीर बदल चुकी है।..

अर्थव्यवस्था, चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त करने का षड्यंत्र

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कोरोना वायरस को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है ताकि दुश्मन देशों की अर्थव्यवस्था और चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त कर सके। वह अमेरिका के साथ ‘ट्रेड वॉर’ और ‘हांगकांग आंदोलन’ को काबू में करना चाहता था।..

कोविड-19 फैलाने के लिए चीन को दी जानी चाहिए सजा!

केवल ये कह देना कि चीन के वुहान से शुरू कोविड-19 के विश्वव्यापी संक्रमण की त्रासदी को विश्व रोक नहीं पाया, इस गंभीर विषय के प्रति लापरवाही होगी। चीन में कोरोना पर बहुल जल्द और स्थाई नियंत्रण, कोरोना काल के दौरान चीनी अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार, इस दौरान पड़ोसी देशों के साथ चीन की ओर से तनातनी की पहल किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं। इस पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए..

चीनी वायरस : क्या भारत से जैविक युद्ध लड़ रहा है चीन

दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 तक भारत में महामारी लगभग नियंत्रण में थी। फिर अचानक महाराष्ट्र और केरल में बम विस्फोट जैसा हो गया। इससे संदेह होता है कि क्या महामारी का प्रसार नियोजित था? नया प्रसार केवल भारत में ही क्यों हुआ? कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर आई जांच रपटें चीन पर उंगली उठाती हैं। जैव हथियार की संयुक्त राष्ट्र द्वारा दी गई परिभाषा के सभी मानदंड सार्स-सीओवी-2 पर लागू होते हैं। इस प्रकार, एक नया युद्ध शुरू हो चुका है - जैव युद्ध..

चीनी वायरस : खुद को खत्म करने की होड़

कोविड-19 के जैविक हथियार होने की चर्चाओं के बीच हमारा ध्यान इस ओर जाता है कि युद्धक सामग्री तैयार करने में हम किस भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। दुनिया में मानव विकास के आविष्कारों के समांतर मारक हथियारों की तकनीक विकसित करने की होड़ मची है। अगला विश्व युद्ध होता है तो परंपरागत हथियार कहीं पीछे छूट जाएंगे। कौन से नए हथियार होंगे अगली लड़ाई में, यह देखना समीचीन है..

चीनी वायरस : संयोग नहीं साजिश

पूरी दुनिया में एक बार फिर बहस छिड़ी हुई है कि कोरोना वायरस कहीं जैविक हथियार तो नहीं! कोविड-19 के संक्रमण के लिए चीन एक बार फिर निशाने पर है। चीन और उसके समर्थक लाख इनकार करें और कोविड-19 के वायरस के संयोग से प्रसारित होने का सिद्धांत स्थापित करें लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य, घटनाक्रम तो कोविड-19 के न सिर्फ जैविक हथियार होने की ओर इशारा करते हैं बल्कि इसे साजिशन फैलाये जाने का भी संकेत देते हैं।..

पश्चिमी मीडिया के दोहरे मानदंड

पश्चिमी मीडिया ने एक निहायत चिंताजनक कार्यप्रणाली अपना रखी है जिसके तहत बनाई खबरों से वे दुनिया भर में एक अलग ही रुझान की पटकथा परोस रहे हैं। ब्रह्म चेलानी के एक विश्लेषण के अनुसार पश्चिमी मीडिया ने अपने देशों के मुकाबले विकासशील और कम विकसित देशों में हो रही मानव त्रासदी की रिपोर्टिंग करने में दोहरे मापदंड अपना रखे हैं..

अराजकता पर अंकुश

मीडिया में नियमन संस्थाओं के कमजोर पड़ने से अराजकता व्याप्त है। पेड न्यूज से लेकर एकाधिकार तक तक के कई रोग मीडिया को लग गए हैं। इस वजह से मीडिया में नीति-नियमन अपरिवहार्य हो गया है। चूंकि ये रोग पूरी मीडिया में लग गये हैं, इसलिए स्वनियमन आंख का धोखा ही है। अब इस बात की प्रबल संभावना है कि सरकार जल्द ही मीडिया काउंसिल का गठन करे।..

प्रपंच को प्रतिष्ठा

भारत में पत्रकारिता पुरस्कारों का प्रयोग उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने के लिए नहीं, बल्कि एक एजेंडे के अंतर्गत हो रहा है। यह संयोग मात्र नहीं है कि जो पत्रकार जितने अधिक फेक न्यूज फैलाता है, भारतीय संस्कृति के विरुद्ध जितना ज्यादा अभियान चलाता है, उस पर एक विशेष तरह के पत्रकारिता पुरस्कारों की बरसात हो जाती है। पत्रकारिता का सबसे प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार भी इस श्रेणी में सम्मिलित हो चुका है..

खबर से खिलवाड़

भारत इन दिनों दो मोर्चोें पर युद्ध लड़ रहा है। एक ओर कोरोना महामारी है और दूसरी ओर है फर्जी-भ्रामक खबरों की बमबारी। झूठी-बेबुनियाद खबरें देश के लोकतंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पत्रकारिता के लिए भी खतरनाक है। शर्म की बात है कि संवेदनशील परिस्थितियों में देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों, विपक्षी दलों और मीडिया के एक बड़े वर्ग का व्यवहार देश विरोधी हो..

भय और आतंक का चुनाव

पश्चिम बंगाल में मतगणना के बाद हिंसा का नंगा नाच देखने को मिला। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थकों की जान, घर, तालाब, मवेशी - किसी को नहीं बख्शा। मतदान के दौरान भी पिछले चुनाव के मुकबाले तीन गुनी हिंसा हुई। भय और आतंक के कारण मतदान प्रतिशत भी पिछले चुनावों के मुकाबले कम रहा। चुनाव के दौरान ममता का यह ऐलान कि सुरक्षा बलों को रवाना होने दो और उसके बाद भाजपा वाले रहम की गुहार लगाएंगे, सही साबित हुआ।..

बंगाल हिंसा: सत्ता का रक्तस्नान

2 मई को इधर विधानसभा चुनावों के नतीजे तृणमूल कांग्रेस को बहुमत की तरफ बढ़ता दिखा रहे थे तो उधर ममता की शह पर पोसे जाते रहे मजहबी उन्मादी ‘हिन्दुओं से हिसाब चुकता’ करने के लिए हथियारों पर धार देते जा रहे थे। उस दिन दोपहर को शुरू हुआ तृणमूल का खूनी खेला निर्बाध जारी है। भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या पर न..

दिल्ली को श्मशान बनाने का षड्यंत्र

अदालत ने दिल्ली सरकार को कई मौकों पर डांटा कि आपके पास सफाई कर्मचारी को वेतन देने के लिए पैसा नहीं है पर विज्ञापन में पानी की तरह पैसा बहा रहे हो। अदालत ने तो यह भी कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री लोकसेवक रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि आम इंसान के लिए तंत्र काम कैसे करता है। सरकार सिर्फ हाहाकार मचा रही है, करना कुछ भी नहीं चाहती। इनकी नीयत सिर्फ केन्द्र सरकार को बदनाम करने की है।..

सूरत के ‘देवदूत’

सूरत शहर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा में लगे हैं। इन कार्यकर्ताओं के कार्यों से लाभान्वित लोग उन्हें ‘देवदूत’ की संज्ञा दे रहे हैं..

मदद को बढ़ते हाथ

संकट के इस समय में समाज से ही अनेक लोग आगे आकर लोगों की मदद को जुटे हैं। उनके प्रयास सराहनीय हैं और बड़ी संख्या में आबादी का भला कर रहे हैं..

बचाव ही दवा

कोरोना वायरस से बचने का हर संभव प्रयास करें, ताकि अस्पतालों के धक्के न खाने पड़ें ..

स्वयंसेवक और संतों की सेवा-गाथा

पूरे भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और विभिन्न संप्रदायों के संत कोरोना पीड़ितों की सहायता में लगे हैं। कोई जरूरतमंदों तक आक्सीजन पहुंचा रहा है, तो कोई खाना और दवाई बांट रहा है। कई स्वयंसेवक तो अपनों को खोने के बाद भी दिन-रात समाज के लिए कार्य कर रहे हैं ..

दीया और तूफान

कोविड-19 की दूसरी लहर की चुनौती बहुत बड़ी है। इस अप्रत्याशित और विशालकाय संकट से पार पाने के लिए हमें संकल्प, धैर्य, मनोबल और तैयारी की आवश्यकता है।..

चीनी वायरस कोरोना : सावधानी और संयम

इस समय देश में कोरोना की दूसरी लहर तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। यह लहर एक बड़े कहर में न परिवर्तित हो जाए, इसके लिए हमें सतर्कता बरतनी होगी। घबराने के बजाय सावधानी और संयम अपनाना होगा..

भूमि-सुपोषण एवं संरक्षण अभियान-मां की रक्षा के लिए उतरे पुत्र

शास्त्रों में कहा गया है कि धरती हमारी मां है। दुर्भाग्य से इस मां के कुछ पुत्रों ने ही इसका ऐसा दोहन किया कि अब इसकी रक्षा के लिए पूरे देश के धरती पुत्र ‘भूमि सुपोषण एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय जन अभियान’ नाम से एक आंदोलन शुरू कर रहे..

वैश्विक संपन्नता का कालजयी चिंतन

‘प्लेंटी फॉर आल’ के लेखक कृषि विज्ञानी एस.ए. दाभोलकर ने कृषि और ग्रामीण विकास के लिए व्यवहार सिद्ध सूत्र बनाये। विज्ञान की नई सामाजिकता विकसित करने के लिए उन्होंने प्रयोग परिवार की अवधारणा दी। ..

कृषि विशेष : जैविक अपनाएं, मिट्टी की ताकत बढ़ाएं

कृषि में उर्वरकों और रसायनों का प्रयोग अचानक बंद करने से खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए किसानों को रसायनों पर निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए उसकी जगह जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। इससे न केवल खेतों का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति और देश की सेहत भी सुधरेगी..

धरती में थमा पानी, खेती में लाया निखार

देश के कई इलाकों में किसानों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या है सिंचाई। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति के कारण हर साल फसलें बर्बाद होती हैं। इसलिए किसानों को सिंचाई की दूसरी विधियों और सूक्ष्म तकनीकें अपनाने की जरूरत है ताकि तेजी से गिरते भू-जल स्तर को न केवल रोका जा सके, बल्कि भूमिगत जल भंडार को बढ़ाया भी जा सके ..

कृषि विशेष : नई पौध के ‘पुजारी’

इन दिनों हरियाणा-दिल्ली की सीमा ‘सिंघु बॉर्डर’ किसान आंदोलन के लिए पूरी दुनिया में चर्चित है। यहां कुछ किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ लगभग चार महीने से आंदोलन कर रहे हैं। पर सिंघु बॉर्डर के आसपास के अनेक गांवों के किसान अपने को आंदोलन से दूर रखकर खेती-किसानी में नित नए प्रयोग कर रहे हैं। यही नहीं, इन गांवों के किसान परंपरागत कृषि से हटकर अलग किस्म की खेती करके अच्छा पैसा कमा रहे हैं। कुछ किसान फूलों की खेती करते हैं, तो कुछ मशरूम की। कुछ बेमौसमी सब्जियों ..

जैविक खेती अच्छी खेती

अधिक पैदावार के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इतना अधिक प्रयोग बढ़ गया है कि अनाज का मूल तत्व ही खराब होने लगा है। इसमें आज सकारात्मक बदलाव है कि किसान जैविक खेती की ओर जा रहे हैं..

देश की दशा और दिशा बदल रहे किसान

लीक से हटकर सोचने और मेहनत करने वाले को सफलता मिलती ही है। खेती के क्षेत्र में इस उक्ति को साकार कर रहे हैं भारत के अनेक किसान, जिन्होंने नवाचार और नई तकनीक की मदद से मोटा मुनाफा ही नहीं कमाया बल्कि बहुतों को राह दिखाई है। उनके बताए रास्ते पर चलकर आज कई नौजवान किसान खेती में नए जोश के साथ जुटे हैं ..

असम विधानसभा चुनाव : सुशासन के समर्थन में लहर

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के विकास के मुद्दे के सामने विपक्षी गठबंधन कहीं टिकता नहीं दिख रहा। कांग्रेसी और वामपंथी नेता मतदाताओं को रिझाने के लिए मंदिर-मंदिर भटक रहे हैं, लेकिन लोग इसे दिखावे के अलावा और कुछ नहीं मान रहे। बदरुद्दीन अजमल के बयानों से भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी होती दिख रही..

खत्म होगा खेला-तोला!

बंगाल में प्रथम चरण का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे भद्रलोक को जकड़े बैठा हिंसक राजनीतिक का भय कमजोर पड़ने लगा है। लोग स्पष्ट तौर पर कहने लगे हैं कि बंगाल तुष्टीकरण और हिंसा की राजनीति से तंग आ चुका है। चुनाव के प्रति लोगों की बेसब्री क्या सत्ता परिवर्तन का संकेत है !..

‘दुकान’ बंद होने की छटपटाहट

विदेशी पैसे पर गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाने वालों से सरकार ने पारदर्शिता की अपेक्षा की तो वे नाना प्रकार के बहाने बनाने लगे। आखिर में सरकार ने सख्ती दिखाई और उनकी ‘दुकान’ बंद हो गई। अब काम का ढर्रा बदलने वाले शातिरों की छटपटाहट को कथित आंदोलनों में विभिन्न रूपों में देखा जा सकता है..

कठपुतलियों की कसक, आजादी की अलख!

कृषि कानून, मुसलमानों का उत्पीड़न और नागरिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर दुनिया में भारत की छवि बिगाड़ने के प्रयास हो रहे हैं। देश में असहमति और सरकार की नीतियों के विरोध के बहाने देश विरोधी ताकतों के इशारे पर कुछ कठपुतलियां उनके मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने में जुटी हैं। हर बार विरोध करने वाले चेहरे भले ही अलग दिखते हों, लेकिन इनके तार आपस में जुडेÞ हुए नजर आते हैं। इनका एक ही उद्देश्य है- अराजकता फैलाकर देश को खांचों में बांटना..

कन्वर्जनऔरआरक्षण : समानता का मुखौटा चाहिए ‘कोटा’

आजकल ‘दलित-मुस्लिम’ एकता का नारा कुछ ज्यादा ही सुनाई देता है। ऐसा ही नारा आजादी से पहले मुस्लिम लीग ने भी दिया था। इससे प्रभावित होकर कुछ दलित नेताओं ने पाकिस्तान बनाने की मांग का समर्थन किया। बाद में उन्हें इस छलावे का पता चला और पाकिस्तान से पलायन कर भारत आ गए। आज जो दलित नेता ऐसे नारे लगा रहे हैं, वे इतिहास से सबक लें ..

#पीएफआई : टाइम बम

लखनऊ में पीएफआई कमांडर और उसके साथी की गिरफ्तारी के बाद पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया के खतरनाक खेल की परतें उघड़नी शुरू हुई हैं। भारत को विध्वंसक आघात देने का षड्यंत्र कितना गहरा है जानने के लिए पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट-..

इस साजिश को समझना जरूरी

यह कभी किसान आंदोलन था ही नहीं। यह आईएसआई के प्रायोजित कार्यक्रम के तहत खालिस्तान की मांग को फिर से जिंदा करने का एक जरिया भर है। पूरे आंदोलन के दौरान भिंडरावाला के पोस्टर लहराते रहे। पंजाबी गायक खालिस्तान के समर्थन में गीत गाते दिखे। देश तोड़ो गैंग की तस्वीरें लगाई गई..

अराजकता की राजधानी

गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली की सड़कों पर हिंसा का नंगा नाच हुआ। लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार कर दिया गया। शुरु से ही इस आंदोलन का समर्थन कर रहे राहुल गांधी या दिल्ली की गद्दी पर बैठे अरविंद केजरीवाल क्या इस तरह की घटना के लिए जवाबदेह नहीं हैं..