हरियाणा में पाकिस्तानी आतंकी सईद के पैसे से बन रही मस्जिद !
स्रोत:    दिनांक 15-अक्तूबर-2018
 
मेवात के उटावड़ गांव में बन रही मस्जिद कहा जा रहा है कि इसमें आतंकी हाफिज सईद से जुड़े एक संगठन का पैसा लगा है 
पाकिस्तान में खुलेआम घूमने वाला आतंकवादी सरगना हाफिज सईद अब भारतीय मुसलमानों का 'दिल जीतने' के लिए भारत में मस्जिद और मदरसे बनवा रहा है। उसके पैसे से बनने वाली एक मस्जिद की जांच इन दिनों राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन.आई.ए.) कर रही है। मरकजी मस्जिद के नाम से बनने वाली यह मस्जिद हरियाणा के पलवल जिले के गांव उटावड़ में बन रही है। हालांकि जांच के कारण इन दिनों मस्जिद का निर्माण कार्य बंद है। कहा जा रहा है कि यह इस इलाके की सबसे बड़ी मस्जिद है। मस्जिद के नाम पर मुस्लिमों के दबदबे वाली ग्राम पंचायत ने 20 बीघा जमीन दी है। बता दें कि यह गांव मेवात का हिस्सा है, जो हरियाणा में एकमात्र मुस्लिम-बहुल क्षेत्र है।
सूत्रों के अनुसार जुलाई महीने में एन.आई.ए. को पता चला कि दिल्ली के कुछ लोग दुबई स्थित फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफ.आई.एफ.) के लिए काम करते हैं। यह हाफिज सईद द्वारा गठित जमात-उद-दावा का सहयोगी संगठन है। जानकारों का कहना है कि कहने के लिए तो यह 'इंसानियत' के लिए काम करता है, पर इसका असली काम है आतंकवादियों को पैसे उपलब्ध कराना। यह कश्मीरी आतंकवादियों को भी हवाला के जरिए पैसा देता है। इसमें भारत के कुछ कट्टरवादी तत्व भी सहयोग करते हैं। इसकी भनक लगते ही एन.आई.ए. ने ऐसे तत्वों की निगरानी शुरू की। पुख्ता जानकारी के बाद 25 सितंबर को दिल्ली के निजामुद्दीन से मोहम्मद सलमान और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया। उसके दो साथी हैं मोहम्मद सलीम उर्फ मामा और सज्जाद अहमद वानी। इनके पास से 1.56 करोड़ रु. और 43,000 की नेपाली मुद्रा भी मिली थी।
सूत्रों के अनुसार मोहम्मद सलीम हवाला कारोबारी है और दिल्ली का रहने वाला है। वह दिल्ली और दुबई के बीच प्रमुख कड़ी था और हवाला के जरिए पैसा मंगाता था। उस पैसे को ठिकाने लगाने का काम सलमान करता था। सलमान मूलत: उटावड़ का रहने वाला है, लेकिन बरसों से दिल्ली में रहता है। दिल्ली में रहते हुए वह अपने गांव में मस्जिद बनवा रहा था। निर्माण कार्य देखने के लिए वह हर जुम्मे को उटावड़ जाता था। पता चला है कि इस मस्जिद का नक्शा सलमान ने दुबई में बनवाया था। सूत्रों के अनुसार वह अब तक हवाला के जरिए मिले 70,00000 रु. को ठिकाने लगा चुका है। कहा जा रहा है कि इसमें से कुछ पैसे आतंकवादियों को दिए गए और बाकी मस्जिद के निर्माण में खर्च हुए। वहीं सलमान के भाई यूसुफ का कहना है कि मस्जिद के निर्माण के लिए देश-विदेश से पैसा लाया तो गया है, लेकिन इसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है।
सज्जाद अहमद वानी कश्मीर का रहने वाला है और वह कई साल से आतंकवादियों को पैसे पहुंचाने का काम कर रहा था। सूत्रों का कहना है कि इन तीनों ने हवाला के जरिए आतंकवादियों तक पैसा पहुंचाने की बात कबूली है।
सूत्रों के अनुसार एफ.आई.एफ. का उपाध्यक्ष कामरान नाम का एक पाकिस्तानी है। वह दुबई में रहता है और वहीं से अनेक देशों में आतंकवादियों के लिए पैसे का इंतजाम करता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि कामरान के साथ सलमान और उसके गुर्गों के गहरे रिश्ते हैं। सलमान कई बार दुबई जा चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि सलमान अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए मेवात और अन्य मुस्लिम-बहुल इलाकों में मस्जिद और मदरसों का निर्माण करवाता है और गरीब मुसलमानों के लिए सार्वजनिक निकाह का आयोजन करता है, और अनेक तरह से मदद भी करता है। इस कारण आम मुसलमानों के बीच उसकी 'समाजसेवक' वाली छवि है।
सलमान तब्लीगी जमात से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि उसके अब्बा के भी तब्लीगी जमात से संबंध हैं। तब्लीगी जमात मुसलमान युवाओं को कट्टरवादी बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
उटावड़ की इस मस्जिद में आतंकवादियों के पैसे लगने की खबर के बाद मेवात के अनेक लोग वहां बन रहीं दूसरी मस्जिदों और मदरसों की भी जांच की मांग कर रहे हैं। मीडिया रपटों के अनुसार मेवात के लोगों की इस मांग का ही असर है कि पिछले चार वर्ष में मेवात में जितनी भी मस्जिदें या मदरसे बने हैं, या अभी जो बन रहे हैं, उन सबकी जांच करने का निर्णय लिया गया है। उन लोगों की भी जांच करने का फैसला लिया गया है, जो किसी न किसी मस्जिद या मदरसे से जुड़े हैं और जो हर महीने या दो महीने पर विदेश जाते हैं। उटावड़ और उसके आसपास के इलाकों में पिछले दो वर्ष में कितने पासपोर्ट बने हैं, इसकी भी जांच शुरू कर दी गई है। एक जानकारी के अुनसार बहीन थाने के अंतर्गत 2017 में 774 और 2018 में अब तक 510 पासपोर्ट बनाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि इनमें से कितने लोग विदेश गए और कब गए, कहां गए, क्यों गए?
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान यदि पता चलेगा कि सलमान और उसके गुर्गों ने हवाला के पैसे से और कहीं कुछ बनाया है तो एन.आई.ए. उन सबकी जांच करेगी।
मोहम्मद सलमान - मोहम्मद सलीम - सज्जाद अहमद वानी इन आतंकियों को पुलिस ने पकड़ा है
उल्लेखनीय है कि पूरे मेवात में मस्जिदों और मदरसों की बाढ़ आई हुई है। हर गांव में एक से ज्यादा मस्जिदें और मदरसे हैं। 'भारत बचाओ संगठन' के संयोजक विक्रम सिंह यादव कहते हैं, ''एक ओर तो कहा जाता है कि मेवात के मुसलमान बहुत ही गरीब हैं, वहीं दूसरी ओर वे वहां मस्जिद और मदरसे आएदिन बन रहे हैं। जो लोग मदरसे या मस्जिद बनवा रहे हैं, वे गरीबों की मदद क्यों नहीं कर रहे हैं?'' इसका जवाब भी वही देते हैं। कहते हैं,''मेवात बहावी विचारधारा का केंद्र बन चुका है और यह विचारधारा किसी गैर-मुसलमान को बर्दाश्त नहीं करती। इसलिए वहां जो कुछ हो रहा है, उसके पीछे का मकसद है मेवात से हिंदुओं को भगाना।'' मेवात में ऐसे विचार रखने वालों की कोई कमी नहीं है। पिन्गवां निवासी जसवंत गोयल कहते हैं, ''उटावड़ में बन रही मस्जिद भारत की राजधानी दिल्ली की नाक के नीचे आतंकवादी अड्डा साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पहले मेवात क्षेत्र में जितने भी आतंकवादी पकड़े गए हैं, वे किसी मस्जिद या मदरसे से ही पकड़े गए हैं।'' उन्होंने यह भी कहा, ''मेवात में आतंकवादियों को बचाने वाली मानसिकता भी दिखती है। यदि यहां पल रहे आतंकवादी कुछ करते हैं तो इससे मेवात के लोगों, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान, को भी नुकसान होगा, उनकी छवि खराब होगी। इसलिए मैं तो मेवात के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे किसी भी दहशतगर्द को बचाने के लिए सामने न आएं।''
एक अन्य समाजसेवी कहते हैं, ''मेवात में मानसिक आतंकवाद पहले से है। अब आतंकवादी भी यहां जड़ें जमा रहे हैं। मस्जिदों और मदरसों में इन्हंे शरण दी जाती है। इसलिए यहां बन रहे या बन चुके मदरसों और मस्जिदों की जांच होनी चाहिए कि इनके लिए पैसा किसने दिया?''
इस संबंध में समाजसेवी बिजेंदर शास्त्री की टिप्पणी गौर करने लायक है। वे कहते हैं, ''गलत पैसे से बनने वाली मस्जिद इबादत के लिए तो सही जगह नहीं है। जरूर इसका मकसद कुछ और ही होगा जिसे मजहब का आवरण देकर दुनिया की नजरों से बचाने की कोशिश की जा रही है।''
खैर, देर से ही सही मेवात में जांच एजेंसियों ने अपना काम शुरू कर दिया है। उम्मीद है, मेवात में सक्रिय देश-विरोधी तत्व बेनकाब होंगे और वहां सभी समुदाय के लोग सौहार्द के साथ रह पाएंगे।
निशाने पर गुरुग्राम भी
पूरी दुनिया में आधुनिकता, संपन्नता और गगनचुंबी इमारतों के लिए प्रसिद्ध गुरुग्राम पर भी कट्टरवादियों की नजर पड़ गई है। कभी सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़कर माहौल खराब किया जाता है, तो कभी किसी हिंदू कॉलोनी में किसी घर पर लाउडस्पीकर लगाकर नमाज पढ़ी जाती है। पिछले दिनों ऐसे ही एक मामले पर गुरुग्राम में काफी हंगामा हुआ। उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम में प्रसिद्ध शीतला माता का मंदिर है। उसके ठीक सामने शीतला कॉलोनी है। यह हिंदुओं की बहुत बड़ी कॉलोनी है। हजारों घरों के बीच मुसलमानों के दो-चार घर ही हैं। यहां कोई मस्जिद नहीं है। पिछले दिनों एकाएक कॉलोनी से अजान की आवाज आने लगी तो लोग दंग रह गए। कॉलोनी के लोग वहां पहुंचे तो देखा कि एक घर पर ही लाउडस्पीकर लगाकर कुछ लोग नमाज पढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और अब प्रशासन ने उस घर को सील कर दिया है।
 
गुरुग्राम में सार्वजनिक स्थल पर नमाज पढ़ते मुसलमान 
कॉलोनी के लोग सवाल उठा रहे हैं कि हिन्दू कॉलोनी में इस तरह गुपचुप शातिराना तरीके से यह मस्जिद कब बन गई? भारत बचाओ संगठन के संयोजक विक्रम सिंह यादव कहते हैं, ''यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। लव जिहाद के साथ-साथ जमीन जिहाद शुरू हो गया है। कुछ तत्वों ने गुरुग्राम को अपने निशाने पर रखा हुआ है। हिंदू कॉलोनियों में जमीन-जायदाद लेकर चुपके से मस्जिद बनवाने के पीछे सोची-समझी चाल है। ऐसा देखा जाता है कि जहां मस्जिद बन जाती है, वहां के हिंदू मकान-दुकान बेचकर दूसरी जगह चले जाते हैं और यही मुसलमान चाहते भी हैं। इसलिए वे लोग हिंदू कॉलोनियों में मुंहमांगी कीमत पर जमीन खरीदते हैं और वहां मस्जिद बनाने की कोशिश करते हैं और आम हिंदू उनकी इस चाल को समझ नहीं पाते हैं।''
कन्हैई गांव (सेक्टर 53 के पास है) के निवासी सुरेश फौजी कहते हैं, ''गुरुग्राम की किसी भी कॉलोनी में पांच प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान नहीं होंगे, लेकिन जुम्मे के दिन लाखों की संख्या में मुसलमान आते हैं। ये कहां से आ रहे हैं और क्यों आ रहे हैं, यह जांच का विषय है।'' उन्होंने यह भी कहा, ''नमाज में हिस्सा लेने वालों में ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमान हैं। इनके आका कौन हैं? यह सरकार को पता करना चाहिए।''
भारत बचाओ संगठन के संयोजक विक्रम सिंह यादव का कहना है कि एक ओर तो कहा जाता है कि मेवात के मुसलमान बहुत ही गरीब हैं, वहीं दूसरी ओर वहां मस्जिद और मदरसे आए दिन बन रहे हैं। जो लोग मदरसे या मस्जिद बनवा रहे हैं, वे गरीबों की मदद क्यों नहीं कर रहे हैं?
उटावड़ में बन रही मस्जिद भारत की राजधानी दिल्ली की नाक के नीचे आतंकवादी अड्डा साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पहले मेवात क्षेत्र में जितने भी आतंकवादी पकड़े गए हैं, वे किसी मस्जिद या मदरसे से ही पकड़े गए हैं।
समाजसेवी जसवंत गोयल कहते हैं कि उटावड़ में बन रही मस्जिद भारत की राजधानी दिल्ली की नाक के नीचे आतंकवादी अड्डा साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पहले मेवात क्षेत्र में जितने भी आतंकवादी पकड़े गए हैं, वे किसी मस्जिद या मदरसे से ही पकड़े गए हैं। समाजसेवी बिजेंदर शास्त्री गलत पैसे से बनने वाली मस्जिद इबादत के लिए तो सही जगह नहीं है। जरूर इसका मकसद कुछ और ही होगा जिसे मजहब का आवरण देकर दुनिया की नजरों से बचाने की कोशिश की जा रही है।