नेताजी और गांधी जी
स्रोत:    दिनांक 22-अक्तूबर-2018
 
मौटे तौर पर सुभाष चंद्र बोस और गांधीजी देश को आजाद करने के एक जैसा रास्ता चुना। प्रथम विश्व युद्ध के समय गांधीजी का ये मानना था कि भारतीयों को अंग्रेजों की मदद करनी चाहिए। इसके बाद जब वो युद्ध जीत जाएंगे तो पुरस्कार या वादे के अनुसार हमें आजाद कर देंगे। जिसके बाद गांधीजी के आह्वान के चलते जो ब्रिटिश भारतीय सेना युद्ध की शुरूआत में 1 लाख थी युद्ध खत्म होते समय 11 लाख हो गई थी। इस युद्ध में 48 हजार भारतीय शहीद हुए 65 हजार घायल हुए।
वहीं दूसरे विश्व युद्ध के समय सुभाष बाबू ने भी सेना का ही इस्तेमाल किया लेकिन अंग्रेजों के लिए नहीं अंग्रेजों के खिलाफ। करीब 30 हजार सैनिक शहीद हुए। खैर आजादी भी कोई चीज है जो कभी भीख में किसी को मिली हो तो देखिए प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों के जीतने के बाद भी देश आजाद नहीं हुआ और द्वितीय विश्व युद्द में आजाद हिन्द फौज के हारने के बावजूद देश आजाद हो गया।
तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़
मरने से तू कभी न डर
उड़ा के दुश्मनों का सर
जोश-ए-वतन बढ़ाये जा
चलो दिल्ली पुकार के
क़ौमी-निशाँ संभाल के
लाल क़िले पे गाड़ के
लहराये जा लहराये जा
जब कांग्रेस से इतर देश का स्वतंत्रता आंदोलन लिखा जाएगा तो रासबिहारी बोस को अलग से लिखा जाएगा।
 
अविनाश त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से साभार