कांग्रेस नेताओं पर कसता शिकंजा
स्रोत:    दिनांक 23-अक्तूबर-2018
 
                                                                                                                                                      - मनोज वर्मा
भ्रष्टाचार के मामलो में पी. चिदंबरम, अहमद पटेल सरीखे कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के खिलाफ ईडी और सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले ये नेता कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। अपने चहेते नेताओं और उनके परिजनों को कानूनी फंदे में जकड़ता देखकर पार्टी भी असहज है। इसलिए ध्यान भटकाने के लिए नए-नए राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे।
सवालों का जवाब देते पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम 
कहते हैं, इनसान को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। यह बात कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदबंरम के मामले में सच साबित हो रही है। वहीं, कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के लंबे समय तक राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल को भी घपलों-घोटालों के मामलों के चलते कई सवालों के उत्तर देना भारी पड़ रहा है। वैसे भी कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार, घोटालों को देश भूला नहीं है।
सत्ता से हटने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य जांच एजेंसियों की पड़ताल में जिस तरह कांग्रेस के दिग्गज नेताओं व उनके परिजनों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, वह पार्टी नेतृत्व के लिए मुसीबत का कारण बन रहा है। लिहाजा कांग्रेस और उसके नेता खुद पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर न केवल मौन हैं, बल्कि ध्यान भटकाने के लिए नए-नए राजनीतिक हथकंडे अपना रहे हैं। ईडी ने आईएनएक्स मीडिया धन शोधन से जुड़े एक मामले में कार्ति चिदंबरम की भारत, ब्रिटेन और स्पेन स्थित 54 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। उसने तमिलनाडु के कोडैकनाल, ऊटी तथा दिल्ली के जोरबाग स्थित फ्लैट, ब्रिटेन के समरसेट में एक कॉटेज व एक मकान, स्पेन के बार्सिलोना में एक टेनिस क्लब और एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर चेन्नई के एक बैंक में 90 लाख रुपये की सावधि जमा राशि को भी कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह जब्त संपत्ति कार्ति व कथित रूप से उनसे जुड़ी कंपनी एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है। गौरतलब है कि सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि 2006 में वित्त मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने कैसे एक विदेशी कंपनी को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी दिला दी, जबकि केवल कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति को ऐसा करने का अधिकार था। करीब 3,500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस करार और आईएनएक्स मीडिया द्वारा विदेशों से 305 करोड़ रुपये हासिल करने के मामले में चिदंबरम की भूमिका जांच के दायरे में है। वे इसे भाजपा सरकार की बदले की राजनीति करार देते हुए कहते हैं, ‘‘अगर सरकार मुझे निशाना बनाना चाहती है तो उसे सीधे मेरे ऊपर वार करना चाहिए, न कि मेरे बेटे और उसके दोस्तों को परेशान करना चाहिए। वे लोग अपना कारोबार करते हैं, उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं है। केंद्र की भाजपा सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है, इसलिए कांग्रेस व विरोधी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।’’
इस पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है, ‘‘कांग्रेस नेताओं की आदत है, उलटा चोर कोतवाल को डांटे। भ्रष्टचार के मामलों में यदि कांग्रेस के नेता फंसे हैं तो जांच उन्हीं की होगी। किसी और की तो नहीं। चिंदबरम देश के वित्त मंत्री थे, गृह मंत्री थे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। ऐसे में यदि उनके बेटे के कारनामों की जांच हो रही है तो इसके लिए मोदी सरकार को दोष नहीं देना चाहिए। उन पर और उनके बेटे पर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगे हैं, उसका साफ उत्तर देना चाहिए। राजनीति नहीं करनी चाहिए।’’ दरअसल, कार्ति चिदंबरम को कथित रूप से आईएनएक्स मीडिया को 2007 (उस समय पी. चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे) में एफआईपीबी से मंजूरी दिलाने के लिए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें अदालत ने जमानत दे दी थी। इस मामले में ईडी ने कार्ति के चाटर्ड अकाउंटेंड एस. भास्कर रमन को भी गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें भी जमानत मिल गई।
सीबीआई ने आरोपपत्र में बताया था कि एफआईपीबी की क्लीयरेंस के संबंध में दो तरह की मनी ट्रेल पाई गई। आरोपपत्र में दावा किया गया था कि एयरसेल-मैक्सिस करार के दौरान कार्ति चिदंबरम की दो कथित कंपनियों—चेस मैनेजमेंट और एडवांटेज स्ट्रैटेजिक को 26 लाख और 87 लाख रु. के दो अवैध भुगतान किए गए थे। बकौल सीबीआई यह भुगतान कार्ति की कंपनियों को उस समय किया गया, जब उनके पिता ने वित्त मंत्री के बतौर एफआईपीबी के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। आरोपपत्र में यह भी कहा गया था कि वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम के पास 600 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों के लिए एफआईपीबी को मंजूरी देने की शक्ति नहीं थी।
हालांकि यह पहला मामला नहीं है जब केंद्रीय जांच एजेंसियों ने चिदंबरम या उनके परिवार के खिलाफ कार्रवाई की है। पिछले साल अप्रैल में ही प्रवर्तन निदेशालय ने कार्ति चिदंबरम और एक कंपनी को नोटिस जारी किया था। उन पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के खिलाफ जाकर 45 करोड़ रु. की धांधली करने का आरोप था। करीब तीन वर्ष से इस मामले की जांच चल रही थी, जिसमें चेन्नई की कंपनी वासन हेल्थकेयर प्रा. लि. पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत 2,262 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है। दरअसल एयरसेल-मैक्सिस सौदा चिदंबरम और उनके बेटे के लिए बड़ी चुनौती है। इस बीच, दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई और ईडी की ओर से दाखिल एयरसेल-मैक्सिस मामले में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को गिरफ्तारी से बचने के लिए दिया गया अंतरिम संरक्षण 1 नवंबर 2018 तक बढ़ा दिया है। अदालत ने 1 नवंबर की तारीख इस मामले में सीबीआई और ईडी की तरफ से पेश वकीलों के स्थगन की मांग पर तय की है। सीबीआई के वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और ईडी के वकील नितेश राणा ने अदालत को बताया कि चिदंबरम के वकीलों, पीके दुबे और अर्शदीप सिंह के जरिए दाखिल अर्जियों पर विस्तृत जवाब दाखिल करने और उन पर बहस के लिए एजेंसियों को समय की जरूरत है। बीती 19 जुलाई को सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र में चिदंबरम और उनके बेटे को नामजद किया गया था।
गौरतलब है कि इन पिता-पुत्र के अलावा कांग्रेस के एक और दिग्गज नेता एवं पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के लंबे समय तक राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल भी कई मामलों में जांच के घेरे में हैं। बीतों दिनों ईडी ने पटियाला हाउस न्यायालय को बताया कि उसके पास अहमद पटेल के सरकारी आवास 23, मदर टेरेसा क्रीसेंट रोड पर 25 लाख रुपये नकद रिश्वत पहुंचाए जाने के सबूत हैं। जांच एजेंसी ने कोर्ट में दावा किया है कि पटेल के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए उसके पास गवाह और सबूत भी हैं। इन सबूतों में वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज और फोन पर हुई बातचीत के अंश भी शामिल हैं। असल में ईडी ने गुजरात की कंपनी- स्टर्लिंग बायोटेक के खिलाफ कालेधन से जुड़े मामले की जांच में रंजीत मलिक नामक शख्स को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी पटियाला हाउस कोर्ट से मलिक से पूछताछ के लिए 15 दिन का रिमांड लेने की कोशिश कर रही थी, उसी दौरान अदालत में ईडी ने अहमद पटेल से जुड़ा खुलासा किया। उसने अदालत को बताया कि उसने राकेश चंद्रा नामक एक शख्स का बयान दर्ज किया है। जिसने स्वीकार किया है कि उसने रंजीत मलिक के कहने पर अहमद पटेल के सरकारी निवास पर रिश्वत पहुंचाई थी।
यहां बता दें कि स्टर्लिंग बायोटेक पर आंध्र बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से फर्जी तरीके से 5,383 करोड़ रुपये कर्ज लेने का आरोप है। बाद में कंपनी ने कर्ज नहीं चुकाया और पूरा पैसा बट्टे खाते में चला गया। यानी वह कर्ज, जिसे अब वसूल नहीं किया जा सकता। इस मामले के सामने आने के बाद सीबीआई ने बीते साल 28 फरवरी को केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। बाद में ईडी ने भी अपने स्तर पर मामला दर्ज किया और कालेधन से जुड़े मामले की जांच शुरू कर दी। इस मामले में ईडी ने अब तक स्टर्लिंग बायोटेक की करीब 4,701 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। उधर अदालत ने ईडी को अहमद पटेल के घर पर कथित रूप से 25 लाख रुपये भिजवाने वाले आरोपी के खिलाफ एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देेश दे दिया। अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी चेतन जयंतीलाल संदेसरा और नितिन जयंतीलाल संदेसरा की गिरफ्तारी के लिए खुला गैर जमानती वारंट जारी किया था। नितिन संदेसरा को बीते 16 अगस्त को दुबई में पकड़ लिया गया।
उधर, ईडी ने कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार और अन्य के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज किया है। ईडी ने शिवकुमार के अलावा नई दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन के कर्मचारी अनुमन्थैया के खिलाफ भी धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। शिवकुमार के खिलाफ यह मामला आयकर विभाग द्वारा दायर आरोपपत्र के आधार पर दर्ज किया गया है। ईडी का कहना है कि सबूतों की जांच और तथ्यों को देखने के बाद साफ है कि आरोपी शिवकुमार ने दिल्ली से बेंगलुरू तक एक नेटवर्क बनाया था ताकि वह काले धन को यहां से वहां पहुंचा सके। इस मामले में दूसरे आरोपी सचिन नारायण, अंजनैया हनुमंथैया और एन. राजेंद्र हैं। आयकर विभाग के अनुसार, सचिन नारायण एक कारोबारी है, जिनकी कंपनी लग्जरी कारों और बसों का संचालन करती है। शिवकुमार इसमें साझीदार हैं। शिवकुमार और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान 8 करोड़ रुपये बरामद किए गए थे जिनका कोई लेखा-जोखा नहीं था। यह पैसा सीधे तौर पर शिवकुमार से जुड़ा था। हालांकि उसका का आरोप है कि आयकर विभाग उन्हें जान-बूझकर निशाना बना रहा है। शिवकुमार को कर्नाटक में कांग्रेस के दिग्गज नेता के रूप में गिना जाता है। जिस वक्त राज्यसभा का चुनाव हो रहा था, तब वही पार्टी के लिए खेवनहार बने थे और उन्होंने गुजरात में कांग्रेस विधायकों को भाजपा के खेमे में जाने से रोका था। इसी तरह, कांग्रेस के एक अन्य नेता बाबा सिद्दीकी और पिरामि़ड डेवलपर्स का मामला है। इस प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा कसते हुए करीब 462 करोड़ रुपये की कीमत के 33 फ्लैट जब्त किए हैं। ईडी के मुताबिक यह कार्रवाई मुंबई के बांद्रा क्षेत्र की झोंपड़पट्टी पुनर्वास योजना में कथित गड़बड़ियों और धन शोधन मामले की जांच के बाद की गई है। ईडी ने मुंबई पुलिस की एफआईआर को ध्यान में रखते हुए पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया। बाबा सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने 2000-04 के दौरान झोंपड़पट्टी पुनर्वास योजना के अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करते हुए बांद्रा के पॉश इलाके की परियोजना को एक परिचित बिल्डर पिरामिड डेवलपर को दे दिया था। जांच में सामने आया कि पिरामिड डेवलपर को यह परियोजना अवैध तरीके से दी गई थी। यानी यह घोटाला करीब 2,000 करोड़ रुपये का है।
2014 में मुंबई पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच भी की थी। जांच एजेंसी को आशंका है कि बाबा सिद्दीकी और पिरामिड डेवलपर ने गलत तरीके से 2,000 करोड़ रुपये विदेश भेजे हैं। स्वाभाविक है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के ये नेता इसे सत्ताधारी दल की बदला लेने की सोची-समझी साजिश के रूप में प्रस्तुत कर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेंगे। पर लुंज-पुंज हो चुकी देश के इस सबसे पुरानी पार्टी के पास भाजपा से लड़ने के लिए किसी सुविचारित मुद्दे का अभाव है। ऐसे में घोटालों में फंसे ये नेता अपनी गर्दन बचाने के लिए कोई भी चाल चलेंगे। वैसे भी इनका असली फैसला जनता ही करेगी।
 
अगर सरकार मुझे निशाना बनाना चाहती है तो उसे सीधे मेरे ऊपर वार करना चाहिए, न कि मेरे बेटे और उसके दोस्तों को परेशान करना चाहिए। वे लोग अपना कारोबार करते हैं, उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं। केंद्र की भाजपा सरकार सभी मोर्च पर विफल रही है, इसलिए कांग्रेस और विरोधी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।— पी.चिदंबरम,पूर्व वित्त मंत्री

 
भ्रष्टचार के मामलों में यदि कांग्रेस के नेता फंसे हैं तो जांच उन्हीं की होगी। किसी और की तो नहीं। चिंदबरम देश के वित्त मंत्री थे। गृह मंत्री थे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। ऐसे में यदि उनके बेटे के कारनामों की जांच हो रही है तो इसके लिए मोदी सरकार को दोष नहीं देना चाहिए।—संबित पात्रा , भाजपा प्रवक्ता