बिहार और यूपी के लोगों के साथ हुई हिंसा को कांग्रेस ने भड़काया
स्रोत:    दिनांक 24-अक्तूबर-2018
                                                                                                                                                        - जयवंत पंड्या
गुजरात में कांग्रेस नेताओं ने जिस तरह से समाज में जहर घोला, उससे उसका विद्रूप चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हो गया है। कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने भाजपा को बदनाम करने के लिए साजिश रची। पुलिस ने अब तक 700 से अधिक उपद्रवियों को पकड़ा है, जिनमें 50 से अधिक कांग्रेसी हैं
हिंसक माहौल के बाद  गुजरात से पलायन करते उप्र व बिहार के लोग 
गत 28 सितम्बर को गुजरात के साबरकांठा जिले में हिम्मतनगर के पास ढुंढर गांव में एक 14 वर्षीया किशोरी से बलात्कार का शिकार हो गई। घटना का आरोपी एक उत्तर भारतीय मजदूर था जो सिरामिक फैक्टरी में काम करता था। घटना के तत्काल बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय का आश्वासन दिया इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को तूल दिया और स्थानीय लोगों को भड़काया। नतीजतन राज्य में हिंसा भड़क उठी और बिहार एवं उत्तर प्रदेश से रोजी-रोजगार के लिए आए लोगों पर उनका गुस्सा फूटा। कई जगह घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट भी हुई। इतना ही नहीं, इन दोनों राज्यों की महिलाओं व लड़कियों को धमकाया गया और उनके साथ छेड़छाड़ भी की गई।
वैसे गुजरात के लोग स्वभाव से शांतिप्रिय हैं और सब के साथ घुल-मिल कर रहते हैं। यहां दूसरे राज्यों से आए लोगों को ‘सवाया गुजराती’ (गुजराती से बढ़कर) कहा जाता है। लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि लोग हिंसा पर उतारू हो गए? दरअसल, उत्तर गुजरात का ठाकोर समुदाय प्रभावी वोटबैंक है। बाहर से आए श्रमिकों के प्रति इस समुदाय के मन में थोड़ा असंतोष था। ठाकोरों को लग रहा था कि उनका रोजगार बाहरी लोगों को दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर ने इसी बात को आधार बनाकर मामले को तूल देते हुए टीवी चैनल पर साक्षात्कार या चर्चाओं में स्पष्ट रूप से ये बातें कहीं। 29 सितम्बर को फेसबुक लाइव में बलात्कार की घटना पर अल्पेश ने ठाकोरों को भड़काते हुए कहा, ‘‘हम कब तक ऐसे लोगों को बर्दाश्त करेंगे? गुजरात में कहीं पर भी ऐसे लोग हों, उन्हें मत छोड़ो। कोई भी पर प्रवासी (बाहरी) युवा छूटने वाला नहीं। यदि उस नराधम को ठाकोर सेना के हाथों में सौंपा होता तो उसका ‘हिसाब’ हो गया होता।’’ मनोज बारोट नामक एक युवा ने जब इसका विरोध किया तो अल्पेश ने उसे धमकाया कि  ‘मैं तो सिंहों की सेना का कप्तान हूं।’ साथ ही, अपनी ठाकोर सेना को इस युवा को ढूंढने का आदेश भी दिया। अल्पेश के इस भड़काऊ भाषण के बाद राज्य में बाहरी लोगों के विरुद्ध हिंसा शुरू हो गई। बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को चुन-चुन कर निशाना बनाया गया। अफरा-तफरी के माहौल में लोग भागने लगे। हालांकि पुलिस-प्रशासन ने मुस्तैदी से मोर्चा संभाला और तत्काल कार्रवाई की। बिहार-उत्तर प्रदेश के कुछ श्रमिकों ने बताया कि पुलिस को जैसे ही फोन किया, वह घटनास्थल पर तत्काल पहुंची। पुलिस ने लोगों को सुरक्षा का आश्वासन भी दिया, पर डर का ऐसा माहौल बनाया गया कि उन्होंने रुकना मुनासिब नहीं समझा।
बहरहाल, पुलिस-प्रशासन की तत्परता और सख्त कार्रवाई के कारण इस हिंसक भरे माहौल पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया गया। गुजरात अब पहले की तरह शांत है। हिंसा के कारण जो फैक्टरियां बंद हो गई थीं, वे फिर से चालू हो गई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो लोग राज्य से चले गए हैं, वे दीपावली और छठ पर्व के बाद लौट आएंगे। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी लोगों से गुजरात लौट आने की अपील की है। इधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रूपाणी से बात की और भयभीत लोगों को भरोसा दिलाया कि गुजरात में सरकार उनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
किस-किस ने उगला जहर?
इस हिंसा के पीछे साफ तौर से कांग्रेस का हाथ नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि गुजरात में बाहरी राज्यों के श्रमिक और एक अन्य वर्ग, भाजपा का वोटबैंक है। 2012 के विधानसभा चुनाव और 2014 लोकसभा चुनाव में इस वर्ग ने अपने राज्यों में नरेंद्र मोदी के पक्ष में प्रचार भी किया था। अभी कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए भाजपा के वोटबैंक पर चोट करने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया। कांग्रेस इससे पहले भी राज्य में समाज को तोड़ने के प्रयासों को बढ़ावा दे चुकी है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। 2015 में हार्दिक पटेल ने पाटीदार आरक्षण, जबकि जिग्नेश मेवाणी ने दलित आंदोलन और अल्पेश ठाकोर ने ओबीसी आंदोलन का झंडा उठाया था। इन आंदोलनों को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। हालांकि इन आंदोलनों का 2017 के विधानसभा चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस अल्पेश को राधनपुर से अपने टिकट पर तथा जिग्नेश को वडगाम में समर्थन देकर विधायक बनवाने में सफल रही। अमदाबाद के एक होटल में राहुल गांधी के साथ हार्दिक पटेल की गुप्त मुलाकात किसी से छिपी नहीं है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने कुछ माह पहले ही अल्पेश ठाकोर को बिहार का सहप्रभारी बनाया है, जबकि प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी गुजरात से ही हैं। अल्पेश के अलावा, कांग्रेस नेता गेनीबेन ठाकोर ने भी भड़काऊ बयान दिए। जब कुछ महिलाएं गेनीबेन से मिलने आर्इं तो उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘‘ऐसे अपराधियों को जिंदा जला देना चाहिए। उन्हें पुलिस को सौंपने का प्रश्न ही नहीं उठता।’’ इससे पहले उन्होंने कहा था, ‘‘बनियों ने ठाकोरों को वैसे ही पिछड़ा बना दिया है।’’ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा की मौजूदगी में किसानों की एक सभा में उन्होंने हिंसक धमकी देते हुए कहा था कि अगर शस्त्र उठाने की जरूरत पड़ी तो कांग्रेस का हर कार्यकर्ता इसके लिए तैयार है।
कांग्रेस की सुनियोजित साजिश
उधर, लखनऊ में योगी आदित्यनाथ के साथ एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में विजय रूपाणी ने गुजरात में हिंदीभाषियों के विरुद्ध हिंसा के लिए कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अल्पेश का नाम लिए बिना कहा, ‘‘चार राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के एक विधायक ने सुनियोजित तरीके से यह साजिश रची थी। उन्होंने ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ के लोकार्पण को देखते हुए जन एकता को खंडित करने का प्रयास किया, जिसे सरकार ने विफल कर दिया।’’ आज स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। सरकार ने तत्काल सख्त कदम उठाए। पुलिस ने अब तक 700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 50 से अधिक लोग कांग्रेस के हैं। राज्य में रहने वाले सभी गैरगुजराती लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।