ऐसे ही नहीं कहा जाता था मदनलाल खुराना को 'दिल्ली का शेर'
स्रोत:    दिनांक 28-अक्तूबर-2018
शनिवार रात 82 वर्ष की आयु में दिल्ली का शेर कहे जाने वाले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना का निधन हो गया। उन्हें दिल्ली का शेर कहा जाता था, लेकिन यूं ही उन्हें दिल्ली का शेर नहीं कहा जाता था
1984 में जब भारतीय जनता पार्टी की बुरी तरह से हार हुई तब दिल्ली में फिर से पार्टी को खड़ा करने की जिम्मेदारी मदनलाल खुराना ने ही उठाई थी। उनके नेतृत्व में दिल्ली में भाजपा ने वापसी की। वह 1993 से लेकर 1996 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री भी रहे। दिल्ली भाजपा में उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी। केंद्र में जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी तो मदन लाल खुराना केंद्रीय मंत्री बने।
बंटवारे के बाद दिल्ली पहुंचे थे खुराना
भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद फैसलाबाद से मदनलालखुराना अपने परिवार के साथ दिल्ली पहुुंचे थे। बचपन से उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव था। जनसंघ के दौर में पार्टी से जुड़े थे। दिल्ली में ही स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्याल के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक किया। छात्र राजनीति से उन्होंने राजनीति में कदम रखा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में उन्होंने कई दायित्वों का निर्वाह किया। 1984 में जब भाजपा बुरी तरह चुनाव हारी थी तो दिल्ली में संगठन को खड़ा करने की जिम्मेदारी उन्हें मिली। वह पार्टी नेतृत्व की उम्मीदों पर खरे भी उतरे और दिल्ली में भाजपा को खड़ा किया। मदनलाल खुराना 1993 में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और 1996 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 14 जनवरी से 28 अक्टूबर 2004 तक राजस्थान के राज्यपाल रहे।