अखिलेश राज में अपराध होते रहे वह आंखें मूंदे रहे
स्रोत:    दिनांक 08-अक्तूबर-2018
                                                                                                                                                         - सुनील राय 
उत्तर प्रदेश में पिछली सरकारों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में पुलिस विभाग को लचर और जाति-मजहब के खांचे में बंद कर दिया गया था। अपराध होते थे लेकिन अखिलेश आंखें मूंदे रहते थे। सपा के पांच साल के कार्यकाल में डेढ़ दर्जन से ज्यादा अधिवक्ताओं की हत्याएं की गयी थी
मृतक विवेक तिवारी के परिजनों को सांत्वना देते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य  
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब उनके समय में कानून एवं व्यवस्था जिस कदर तार-तार थी, उसे लोग आज भी भुला नहीं पाए हैं। बुलंदशहर जनपद में एक मां और बेटी को बलात्कार का निशाना बनाया गया था। प्रतापगढ़ जनपद में पुलिस उपाधीक्षक जियाउल हक की हत्या कर दी गयी थी। एक अन्य घटना में प्रतापगढ़ जनपद में पुलिस इन्स्पेक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। इलाहाबाद में बदमाशों का पीछा कर रहे थानेदार की गोली मार कर हत्या हुई थी। पुलिस का रुतबा इस कदर गिरा दिया गया था कि आये दिन पुलिस पर हमले हो रहे थे। सपा के पांच साल के कार्यकाल में डेढ़ दर्जन से ज्यादा अधिवक्ताओं की हत्याएं की गयी थीं।
खराब कानून एवं व्यवस्था के कारण जनता में अलोकप्रिय हो चुके ऐसे नेता अब लखनऊ में विवेक तिवारी की हत्या को मुद्दा बनाकर प्रदेश सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि सरकार ने महज 24 घंटे के अन्दर इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया था। सरकार ने आरोपी पुलिस वालों को बचाने की रंच मात्र भी कोशिश नहीं की। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां तक भरोसा दिलाया है कि 'सीबीआई जांच की जरूरत होगी तो सरकार उसके लिए भी तैयार है।' दोनों आरोपी सिपाही बर्खास्त करने के बाद जेल भेजे जा चुके हैं। सरकार ने मृतक की पत्नी को नगर निगम में नौकरी, 25 लाख रुपए मुआवजे का लिखित आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद मृतक की पत्नी कल्पना तिवारी का वक्तव्य, सरकार के विरोधियों की बोलती बंद कर देने के लिए पर्याप्त है। कल्पना ने कहा, 'योगी जी से मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।'
अब जरा समाजवादी पार्टी के कार्यकाल पर गौर करें। मानवता को शर्मसार करने वाली बलात्कार की घटना जनपद बुलंदशहर में हुई थी। पीडि़त परिवार नोएडा में रह कर जीविकोपार्जन करता था। ये लोग उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद स्थित अपने पैतृक आवास पर किसी तेरहवीं संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। एक कार में सवार हो कर दो भाई, उनकी पत्नियां और एक 14 वर्षीया बेटी नोएडा से चले। जब वे बुलंदशहर मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 91 अलीगढ़-गाजियाबाद) पर पहुंचे तब रात के करीब साढ़े बारह बज रहे थे। रास्ते में फ्लाईओवर से गुजरते हुए कार के पहिये के नीचे कुछ खट-खट की आवाज सुनायी दी मगर चालक ने कार नहीं रोकी। कुछ ही आगे जाने पर वैसी ही आवाज फिर सुनाई दी। दुबारा आवाज होने पर चालक को लगा कि कार खराब हो गयी है। सड़क के किनारे कार रोकी गई। जैसे ही कार रुकी, घात लगाये आधा दर्जन बदमाशों ने कार को घेर लिया। बदमाशों ने जान से मारने की धमकी दी और कार को फ्लाई ओवर से नीचे उतरवाया।
बुलंदशहर के थाना देहात कोतवाली के अंतर्गत दोस्तपुर गांव से सटे फ्लाई ओवर के नीचे आधा दर्जन बदमाशों ने मां से बलाकार के बाद उसकी 14 वर्षीय बेटी के साथ बलात्कार की कोशिश की। यह सब करीब तीन घंटे तक चला। उसके बाद भोर में करीब साढ़े तीन बजे सभी अपराधी, नकद रुपए और जेवर लेकर फरार हो गए। घटना के बाद 100 नंबर पर डायल किया गया मगर फोन लगा ही नहीं। अंत में थक-हार कर उन्होंने अपने एक मित्र को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की। 30 जुलाई, 2016 की सुबह तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार की साख पर पूरी तरह बट्टा लग चुका था। इस घटना ने लोगों को पूरी तरह झकझोर दिया था।
उससे पूर्व, 3 मार्च 2013 को उत्तर प्रदेश में पुलिस उपाधीक्षक जियाउल हक की हत्या हुई। इस हत्या के बाद कहा जाने लगा कि पुलिस अधिकारी ही उत्तर प्रदेश में सुरक्षित नहीं हैं। प्रतापगढ़ जनपद के कुंडा थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में ग्राम प्रधान की आपसी रंजिश थी। घटना की जांच के लिए गए जियाउल हक पर वहां अपराधियों ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गयी। इस मामले में हक की पत्नी ने सपा सरकार के मंत्री रघुराज प्रताप सिंह पर आरोप लगाया। रघुराज प्रताप सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। प्रतापगढ़ में तैनात रहे एक उपाधीक्षक कहते हैं, 'सपा सरकार में एक खास जाति और खास मजहब के लोगों ने यह माना हुआ था कि सपा की सरकार उनके लिए घर की सरकार है। कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। '
2007 में भी प्रदेश में सपा सरकार थी। निठारी काण्ड ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी थी जब एक के बाद एक नर कंकाल बरामद हुए थे। लोगों की बच्चियां गायब हो रही थीं, लोग थाने में शिकायत दर्ज करने जाते थे मगर पुलिस ने कभी उस ओर ध्यान ही नहीं दिया। तब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहते हुए कभी नोएडा इसलिए नहीं गए कि उस समय यह वहम था कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाएगा, उसकी कुर्सी चली जायेगी। इसका फायदा उठाकर वहां के अधिकारी मनमानी करते रहे। दिलचस्प बात भी है कि इस तरह की जितनी भी घटनाएं हुईं उनमें अखिलेश यादव बीस लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा करते थे। लेकिन अब पुलिस की गोली से मारे गए विवेक तिवारी की मृत्यु पर अखिलेश यादव ने 5 करोड़ रुपए दिए जाने की मांग उछाली थी। जनता समाजवादी पार्टी के दोहरे चरित्र को समझ चुकी है।