एक मरीज के साथ प्रसन्न मुद्रा में डॉ. बी.रमन राव
स्रोत:    दिनांक 05-नवंबर-2018
 
आशा की ज्योति जलाते डॉ. राव: गांवों में जाकर लगाते हैं चिकित्सा शिविर 
चिकित्सकों को धरती पर भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। कारण साफ है कि इंसानों के रूप में काम करने वाले ये भगवान न जाने कितने लोगों की जिंदगी बचाते हैं। लेकिन चिकित्सा क्षेत्र में जब से चिकित्सकों ने सेवाभाव को भुलाकर गरीबों की जेब पर डाका डालना शुरू किया तब से आम लोगों के मन में डॉक्टरों की छवि बड़ा बदलाव आया है। लेकिन इस अंधकार में भी आशा की ज्योति जलाने वाले डॉ़ बी. रमन राव जैसे डॉक्टर हैं जो पिछले 43 साल से न केवल गरीबों का मुफ्त में इलाज करते आ रहे हैं बल्कि चिकित्सा को आज भी सेवा मानते हैं। वे अब तक करीब 20 लाख लोगों का नि:शुल्क इलाज कर चुके हैं। कार्डियोलाजिस्ट डॉ. रमन ने 1973 में बेंगलुरू में गांव क्लीनिक की शुरुआत की। हैदराबाद में जन्मे डॉ़ राव हर रविवार को बेंगलुरु से लगभग 35 किमी. की दूरी पर बेंगलुरू-पुणे राजमार्ग पर स्थित गांव टी़ बेगुर में चिकित्सा शिविर लगाते हैं। पर इसके लिए उनके साथ चिकित्सकों की टीम होती है जो जरूरतमंदों का इलाज करती है। इस दौरान किसी भी ग्रामीण से कोई पैसा नहीं लिया जाता। अगर किसी ग्रामीण की जांच की जरूरत होती है तो वह भी किया जाता है। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर उनकी टीम गांव वालों को अच्छा खाना भी मुहैया करवाती है। यह डॉ. राव और उनकी टीम की मेहनत का परिणाम है कि 100 किमी. दूर के 350 गांवों के मरीज इलाज की आस में हर रविवार बेगुर आ जाते हैं। डॉ. राव बताते हैं,‘‘अभी भी गांव में मेडिकल व्यवस्था की हालत काफी बदहाल है। ऐसे में इस इलाके के लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसलिए हमारी टीम इस छोटे से प्रयास में लगी है।’’ वे कहते हैं,‘‘गांव क्लिनिक में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है, क्योंकि ये लोग महंगे अस्पतालों की फीस वहन नहीं कर सकते, लेकिन कुछ लोग इस नेक काम में हमारा सहयोग करते हैं जिसके कारण यह सिलसिला चलता आ रहा है।’’ इसके डॉक्टर राव का काम सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है।
वे गांव के बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करते हैं। उन्होंने बच्चों के लिए किताबें, कपड़े और कई सारी जरूरतें पूरी करने की जिम्मेदार ली है। उन्होंने गांव के आसपास 50 स्कूलों को गोद लिया है तो वहीं 700 शौचालय बनवाने में भी मदद की है। डॉ. राव को चिकित्सा क्षेत्र में अहम योगदान के लिए 2010 में जहां पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है वहीं 2008 में पूर्व राष्ट्रपति ड़ॉ अब्दुल कलाम भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।