पीएफआई के केंद्र कन्वर्जन के अड्डे
स्रोत:    दिनांक 10-दिसंबर-2018
 - बिनय कुमार सिंह                      
'सत्यसारणी ' इस्लामी गुट पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पी.एफ.आई) का एक अनुषांगिक संगठन है। इस पर जबरन कन्वर्जन से लेकर हवाला के जरिए विदेश से पैसा मंगाने जैसे अनेक आरोप हैं।
शफीन जहां और अखिला अशोकन (हदिया)। अखिला हिंदू थी। अखिला को मुसलमान बनाकर उसका निकाह शफीन के साथ कराया गया है। इसके पीछे पी.एफ. आई. के गुर्गे हैं। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। इस मामले को जीतने के लिए पी.एफ.आई. ने लगभग एक करोड़ रु. खर्च किए।
‘सत्य सारणी’ पर आगे बढ़ने से पहले पी.एफ.आई. के बारे में एक तथ्य। पी.एफ.आई. ने तमिलनाडु के थेनी और आवाडी में कई केंद्र स्थापित किए हैं। उसका कहना है कि इन केंद्रों के जरिए मजहब का प्रचार किया जाता है, जबकि पुलिस का आरोप है कि ये केंद्र मूल रूप से कन्वर्जन के अड्डे हैं। पी.एफ.आई. का दावा है कि ये केंद्र उन लोगों को इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों को पढ़ाने के लिए हैं, जो स्वैच्छिक रूप से इसे अपने मत के रूप में स्वीकार करते हैं। पी.एफ.आई. के अनुसार यहां चार महीने का पाठ्यक्रम है, जिसमें कुरान पढ़ना, नमाज अदा करना, बुनियादी दुआएं, हदीस सीखना और लोगों तक इस्लाम का संदेश पहुंचाना शामिल है। आवास, भोजन और अन्य मूलभूत आवश्यकताएं उन लोगों को मुफ्त दी जाती हैं, जो इस पाठ्यक्रम में भाग लेते हैं। तमिलनाडु पुलिस की खुफिया शाखा ने सरकार को कई औपचारिक संदेश भेजकर बताया है कि पी.एफ.आई. अपने केंद्रों के माध्यम से कन्वर्जन अभियान चला रही है। पी.एफ.आई. के आनुषांगिक संगठन ‘सत्य सारणी’ के मुख्यालय ‘मरकज-उल-हिदाया’ पर जबरन कन्वर्जन कराने के आरोप लगे हैं।
सत्य सारणी की वेबसाइट http://www.sathyasarani.org के अनुसार, दावा दस्ते का काम व्यवस्थित रूप से गैर-मुसलमानों को इस्लाम से परिचित कराना है। इसके लिए प्रत्येक महीने अधिकांश जिलों में कार्यक्रम होते हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए करीब 500 लोग प्रशिक्षित हैं। इस्लाम का परिचय देने वाले पैम्फलेट विभिन्न कस्बों, गांवों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि में वितरित किए जाते हैं। दावा कार्यकर्ता उन लोगों के लिए उपयोगी होते हैं, जो इस्लाम सीखते हैं और इसे अपनाते हैं। इससे इस्लामिक संदेश को हजारों लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
सत्य सारणी अपने को तो सामाजिक संगठन बताता है, पर इंडिया टुडे टीवी चैनल द्वारा किए गए एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ ने इसकी सारी पोल खोलकर रख दी है। स्टिंग में इस संगठन के शीर्ष पदाधिकारी चौंकाने वाली बातें स्वीकार करते दिख रहे हैं। उन्होंने समूह में कन्वर्जन कराने, अवैध वित्त पोषण और अंतिम लक्ष्य के रूप में भारत को ‘इस्लामिक स्टेट’ में बदलने जैसे खुलासे किए हैं।
हिंदू लड़कियों का मुस्लिम लड़कों से निकाह करवाने और उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए तैयार करने में सत्य सारणी की बड़ी भूमिका रहती है। लव जिहाद की जांच के दौरान सत्य सारणी का नाम विशेषरूप से सामने आया है। समूह की महिला शाखा की प्रमुख जैनब ए़ एस़ पर अनेक आरोप हैं। कहा जाता है कि हिंदू लड़की अखिला अशोकन (हदिया) का निकाह शफीन जहां से कराने में जैनब की प्रमुख भूमिका रही है। हालांकि सार्वजनिक रूप से जैनब ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि उसने कभी भी गैर-मुस्लिम महिलाओं को कन्वर्जन के लिए प्रेरित नहीं किया है। उसने कहा, ‘‘मैं पहली बार हदिया से उसकी शादी के बाद तब मिली जब वह सत्य सारणी में प्रवेश के लिए आई। उसने दो साल पहले यानी 2013 में ही इस्लाम स्वीकार कर लिया था। हदिया और शफीन का निकाह कोई लव जिहाद नहीं है (बल्कि) एक व्यवस्थित विवाह है।’’
लेकिन जैनब और कुछ अन्य लोग पहले ही इंडिया टुडे चैनल के गुप्त संवाददाताओं के साथ पी.एफ.आई. के गहरे रहस्यों को साझा कर चुके थे। अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य जैनब इन रहस्यों को उजागर करते पकड़ी गई थी और उसने खुलासा किया था कि किस तरह पी.एफ.आई. और उसके आनुषांगिक संगठन सत्य सारणी ने केरल के मंजरी में सामूहिक कन्वर्जन कराया। यहां इंडिया टुडे चैनल की रपट के प्रमुख अंशों का उल्लेख जरूरी है।
जैनब ने खुलासा करते हुए कहा था, ‘‘उसके संस्थान में पिछले 10 वर्ष के दौरान करीब 5,000 लोगों ने इस्लाम को अपनाया है। इसमें हिंदू और ईसाई, दोनों शामिल थे।’’ मलप्पुरम में अपने घर में जैनब और उसके पति अली ने कई गैर-मुस्लिम महिलाओं के इस्लाम में कन्वर्जन को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था। हालांकि, उसने विशेष रूप से हदिया मामले में कुछ नहीं बताया। अली ने कहा, ‘‘हमारे साथ एक स्कूल शिक्षक हैं। वे गणित में एम.एससी. और बी.एड. हैं। अब उन्होंने इस्लाम अपना लिया है। उसने कन्वर्जन की संपूर्ण प्रक्रिया समझाई।’’
जैनब ने स्वीकार किया, ‘‘हमें आधिकारिक रूप से इसे एक कन्वर्जन केंद्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है। यह एक शैक्षिक संस्थान है, इसके लिए बहुत सारी तैयारियां करनी पड़ती हैं। हमें संसाधनों की जरूरत है। हमें पहले एक ट्रस्ट बनाना होता है। ऐसे गुप्त केंद्रों को ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण की अर्हता के लिए कम से कम 15 सदस्य जरूरी होते हैं। फिर, परिसर के लिए कोई जगह चुननी होती है। यह परिसर सभी सुविधाओं से युक्त होना चाहिए। जैसे नमाज के लिए मस्जिद, आवास, इस जैसा (सत्य सारिणी) एक सुसज्जित इंस्टीट्यूट। इसके बाद हमें ‘सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट’ के तहत इसका पंजीकरण करना होता है।’’
जैनब ने यह भी कहा कि कन्वर्जन के बाद पी.एफ.आई. किस तरह सह निवासियों के नाम परिवर्तन का प्रमाणपत्र ‘आउटसोर्स’ करता है। इसके दो तरीके हैं। किसी संस्था से यह प्रमाणपत्र लेना कि फलां व्यक्ति ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है। दूसरा तरीका है किसी नोटरी से उसका शपथपत्र लेना। शरीफ से जब पूछा गया कि क्या पी.एफ.आई. और सत्य सारणी का गुप्त लक्ष्य भारत में इस्लामी राज स्थापित करना है, जैसा कि संदेह किया जाता है? इस पर शरीफ ने कहा, ‘‘केवल भारत ही क्यों, भारत को इस्लामी राज्य बनाने के बाद अन्य देशों की तरफ जाएंगे।’’ उसने यह भी खुलासा किया कि पांच साल पहले मध्य-पूर्व में पी.एफ.आई. के लिए लाखों रुपए चंदे की उगाही की और उसे हवाला के माध्यम से भारत भेजा। स्टिंग आॅपरेशन में शरीफ ने यह भी स्वीकार किया कि 4 जुलाई, 2010 को केरल के प्रोफेसर टी. जे. जोसेफ के हाथ काटने वाले पी.एफ.आई. के कार्यकर्ता थे और यह सब कुछ इसलिए किया गया, क्योंकि पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के लिए ‘राज्य सरकार और उसका कानून प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल’ रहा।
अखिला अशोकन उर्फ हदिया और शफीन जहां के मामले में भी सत्य सारणी का नाम सामने आया था। हालांकि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों के निकाह के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन सामाजिक चंदे पर चलने का दावा करने वाले इस संगठन ने इस मुकदमे को लड़ने के लिए लगभग एक करोड़ रुपए खर्च किए थे। स्वयं पी.एफ.आई. के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के चार वकीलों (कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे, इंदिरा जयसिंह और मरजूक बफाकी) को कुल 93,85,000 रुपए शुल्क के रूप में दिए गए थे। इस मामले को सर्चोच्च न्यायालय में जीतने के बाद पी.एफ.आई. ने इसे विजय के प्रतीक के रूप में हर जगह प्रचारित किया और अभी भी किया जा रहा है। इसका मतलब है कि सत्य सारणी बहुत ही व्यवस्थित रूप से एक अत्यंत खतरनाक मंसूबे को अंजाम दे रहा है जिस पर लगाम लगाना जरूरी है। ऐसा नहीं है कि केरल सरकार पी.एफ.आई. के मंसूबों को नहीं जानती। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी़ एस़ अच्युतानंदन ने एक बार कहा था, ‘‘पी.एफ.आई. केरल को ‘इस्लामिक राष्ट्र ’ बनाना चाहती है।’’ केरल सरकार ने केरल उच्च न्यायालय में भी पी.एफ.आई. के खतरनाक मंसूबों को विस्तृत रूप से रखा है, लेकिन अपनी राजनीतिक मजबूरियों के कारण वह उसके विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई नहीं कर रही है।
(लेखक पी.एफ.आई. पर शोध कर रहे हैं)