ईसाई मिशनरियों की काली करतूत पहले कन्वर्जन फिर यौन उत्पीड़न
स्रोत:    दिनांक 13-दिसंबर-2018
- समन्वय नंद                       
ओडिशा में ईसाई मिशनरियों की करतूत एक बार फिर उजागर हुई। ढेंकानाल जिले में ‘गुड न्यूज इंडिया’ के आश्रय गृह में रहने वाली बच्चियों का यौन उत्पीड़न किया जा रहा था। इसका खुलासा आश्रय गृह की दो बच्चियों ने किया। गैर कानूनी तरीके से चल रहे इन आश्रय गृहों से बच्चों की तस्करी की भी जानकारी सामने आ रही है
कन्वर्जन के दौरान एक बच्चे को बपतिस्मा प्रक्रिया से गुजारते मिशनरी एजेंट 
ईसाई मिशनरियां अपनी काली करतूतों के कारण लगातार खबरों में बनी हुई हैं। इस बार ओडिशा के ढेंकानाल जिले की एक मिशनरी संस्था की करतूत उजागर हुई है।
ढेंकानाल जिले के सदर प्रखंड के बेलटिकरी में ईसाई मिशनरी संस्था गुड न्यूज इंडिया द्वारा चलाए जा रहे आश्रय गृह में रहने वाली कुछ लड़कियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले के खुलासे के बाद राज्य भर में गुड न्यूज इंडिया के आश्रय गृहों पर छापेमारी की गई। शुरुआती जांच में स्तब्ध कर देने वाली जानकारियां सामने आई हैं। ‘ड्रीम सेंटर्स’ नाम से चल रहे इस आश्रय गृह में लड़कियों का न केवल यौन शोषण हो रहा था, बल्कि यहां रहने वाले बच्चों का कन्वर्जन भी किया जा रहा था। इतना ही नहीं, पुलिस को आश्रय गृह से नाबालिग बच्चों की तस्करी की भी जानकारी मिली है। इस मामले में पुलिस ने इस संस्था के प्रमुख फयाज अहमद, केयर टेकर सीमांचल नायक तथा उसके सहयोगी उदित लीमा को गिरफ्तार किया है। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय इलाकों में तनाव का माहौल है तथा लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। राज्य के महिला एवं बाल कल्याण मंत्री प्रफुल्ल सामल ने स्पष्ट किया कि यह संस्था गैर-कानूनी तरीके से चल रही थी। केवल बेलटिकरी ही नहीं, राज्य में 23 स्थानों पर यह संस्था आश्रय गृह का संचालन कर रही है। ओडिशा के अलावा, गुड न्यूज इंडिया की शाखाएं पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी हैं।
पुलिस गुड न्यूज इंडिया द्वारा संचालित आश्रय गृहों की गतिविधियों के अलावा, उनके पंजीकरण और धन उगाही के तौर-तरीकों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के कई इलाकों में आश्रय गृह गैर कानूनी तरीके से चलाए जा रहे थे। इन्हें सील कर दिया गया है और इनमें रहने वाले 5 से 18 वर्ष के लड़के व लड़कियों को राज्य सरकार के सहयोग से चलाए जा रहे बालगृहों में भेज दिया गया है। आश्रय गृह में यौन उत्पीड़न का दो बच्चियों ने उठाया था। उनका आरोप है कि फयाज अहमद एक-दो माह में आता था तथा उनका यौन शोषण करता था। संस्था के रसोइये ने भी इसकी पुष्टि की है। उसका कहना है कि फयाज के साथ आने वाले विदेशी भी बच्चियों का उत्पीड़न करते थे। पूरे मामले का खुलासा करने वाली दो बच्चियों को संस्था ने घर भेज दिया था। पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज कर लिए हैं। जांच में आश्रय गृह में रहने वाले 11 बच्चों का पता नहीं चल पाया है। आशंका जताई जा रही है कि इन्हें किसी दूसरी जगह भेज दिया गया है।
इन आश्रय गृहों में गरीब परिवार के बच्चों को रखा जाता था और फयाज अहमद इसी का फायदा उठाता था। वह बच्चों को आश्रय गृह में रखने से पहले उनका कन्वर्जन करता था। राज्य भर में कुकुरमुत्ते की तरह फैले इन आश्रय गृहों में 3,500 बच्चे रहते थे। गुड न्यूज इंडिया के प्रमुख फयाज अहमद की शिक्षा-दीक्षा कोलकाता में हुई है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह ईसाई बन गया। इसके बाद पढ़ाई के लिए वह विदेश गया और अब विदेशी पैसे से पूर्वी भारत में कन्वर्जन को बढ़ावा दे रहा है।
कठघरे में राज्य सरकार
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मामले में राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि बेलटिकरी में जहां यह आश्रय गृह गैर कानूनी तरीके से चल रहा था, वह ढेंकानाल के जिलाधिकारी और आरक्षी अधीक्षक के कार्यालय से महज दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्रशासन की नाक के नीचे गैर कानूनी कार्य चलता रहा, लेकिन सरकार को इसका पता ही नहीं चला। यह लड़कियों के प्रति राज्य सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस तरह के 23 अन्य आश्रय गृहों का गैर कानून ढंग से संचालन दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले में संबंधित विभाग के मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
वहीं, राज्य के अधिकारियों का कहना है कि ओडिशा में 324 बालगृह हैं, जिनमें केवल छह का संचालन ही राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। शेष सभी का संचालन निजी स्तर पर किया जा रहा है।
ओडिशा में छल-प्रपंच, प्रलोभन और जबरन कन्वर्जन को रोकने के लिए कानून है। इसके बावजूद खुलेआम इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बिस्वाल का कहना है कि राज्य में विदेशी पैसों से चलने वाली ईसाई मिशनरियों की बाढ़ सी आ गई है। ये ‘ओफ्रा’ कानून की धज्जियां उड़ाते हुए प्रशासन की नाक के नीचे कन्वर्जन के जरिये राष्ट्रांतरण और समाज में जहर घोल रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए न्यायमूर्ति भवानी शंकर नियोगी आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू किए जाने की आवश्यकता है।