समाजवादी पार्टी को नमाजवादी पार्टी आजम खान ने बनाया
स्रोत:    दिनांक 30-दिसंबर-2018
कभी मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी रहे राज्यसभा सांसद अमर सिंह का कहना है कि समाजवादी पार्टी को नमाजवादी पार्टी बनाने के लिए आजम खान जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि मुलायम सिंह यादव अपनी बात पर कायम रहने वाले व्यक्ति नहीं रहे। पहले उन्होंने अपने बेटे को सत्ता सौंप दी। यदि सौंप दी थी तो फिर उन्हें सत्ता का मोह छोड़ देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले हम सबको बुरा बनवया फिर बाद में मुलायम अपनी बात से पलट गए और फिर से अपने पुत्र से जा मिले। अमर सिंह ने पाञ्चजन्य से हुई विशेष बातचीत में कई और खुलासे किए। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश: 
आपने सेवा भारती को कुछ जमीन दी है। यह बात मीडिया के माध्यम से पता चली। इसकी वास्तविकता क्या है ?
देखिए यह कहना कि मैंने सेवा भारती को कुछ दिया है गलत होगा, क्योंकि लेनदेन व्यापार में होता है। मैं भी स्वार्थी हूं। मैंने जो किया अपने मन की खुशी के लिए किया। मेरे पिता का जन्म आजमगढ़ के लालगंज के तिरवा में हुआ। उनका गांव के प्रति बहुत लगाव था। मैंने यह मकान अपने पिताजी के सुख के लिए बनवाया था। उस मकान के पास एक बहुत बड़ी जमीन भी है। पिताजी चले गए। वहां कोई नहीं रहता। मैं उसे बेच नहीं सकता क्योंकि वह मकान मेरे पिता के लिए मैंने बनवाया था। सेवा भारती देश के कोने—कोने में सेवा का कार्य करती है। आजमगढ़ में एक विशेष तरह का माहौल है। मुझे लगता है कि वहां सेवा भारती कोई प्रकल्प शुरू करेगी तो समाज का हित होगा और मेरे पिता का नाम भी जिंदा रहेगा और एक बेटे के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी।
आजकल आप मुलायम सिंह के प्रति भी काफी सख्त रहते हैं जबकि आपके उन से बड़े अच्छे संबंध रहे हैं ?
मैं उनके ढुलमुल रवैये के चलते सख्त रहता हूं। वो स्थिरप्रज्ञ राजनेता के तौर पर जाने जाते थे। राजनीति में यह बड़ी बात होती है। जैसे रावण अपनी बुराई में भी एक बात पर स्थिर रहा। व्यक्ति को अपने जीवन में एक विचार के प्रति स्थिर रहना चाहिए। उनके कुछ ऐसे कृत्य हैं जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता। एक तो सरयु के पानी को हिंदुओं के खून से लाल करना। दूसरा गेस्ट हाउस कांड आपको मालूम ही है। मैं 1996 में समाजवादी पार्टी में आया। मेरे आने से पहले यह दोनों कांड हो चुके थे। इसके बाद जब मुजफ्फरनगर दंगा हुआ तो वह सैफई में फिल्मी सितारों का नृत्य देख रहे थे, उस समय भी मैं सपा से निष्कासित था। किसी एक धुरी पर नहीं टिके रहना यह मुलायम के चरित्र का मूल नहीं था, लेकिन बाद में वह बदल गए। उन्होंने अपने पुत्र को सत्ता दी। यदि सत्ता दे दी थी तो दे दी। फिर उसमें लिप्त रहने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने सत्ता देने के बाद उससे द्वंद्व किया हम लोगों को बुरा बनवाया। बाद में फिर पुत्र से मिल गए। देखिए मेरे लिए मित्र धर्म और स्वाभिमान सबसे बड़ी चीज है। इसलिए आज भी मुलायम मेरे विरुद्ध कुछ नहीं बोलते हैं क्योंकि मैंने कभी ऐसा अवसर ही नहीं दिया। हां मैं बोलता हूं तो वह सुनते हैं। अभी मैं तीन साल और सांसद रहूंगा। जब नहीं रहूंगा तो अपने 24 साल के राजनीतिक जीवन पर एक किताब लिखूंगा, जो मेरी आत्मकथा होगी। इतिहास की कई घटनाओं का मैं पात्र हूं। यहां तक कि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टिर जो फिल्म आने वाली है उसमें भी एक चरित्र अमर सिंह हैं, तो मुझे सुनना तो आपको पड़ेगा, क्योंकि 24 सालों की कई बड़ी कहानियां हैं और खुलासे हैं।
आप संघ की व्याख्यान माला में आए आपका ध्येय क्या था ?
देखिए संघ एक महासागर है। हम उसमें गोता लगाने वाले बहुत बड़े गोताखार तो नहीं हैं लेकिन संघ को समझने का प्रयास करने के लिए मैं वहां आया। संघ का अनुशासन मुझे प्रभावित करता है। संघ के स्वयंसेवक हों या अधिकारी किसी को भी आत्मप्रचार करने का शौक नहीं होता। मैं व्याख्यान माला में इसलिए भी आया कि श्री मोहनराव भागवत जी को सुन सकूं। मुझे संघ से बेहद स्नेहिल आमंत्रण मिला था। मैं तीनों दिन आया वहां आकर बहुत सारी बातें सुनी। मुझे आनंद आया और संघ की कार्यपद्धति को समझने का थोड़ा अवसर मुझे मिला यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
क्या कारण है कि आप आजम खान से इतना चिढ़ते हैं ?
देखिए, आजम खान जिस तरह के व्यक्ति हैं उसके बारे में दुनिया जानती है। वह बात करने लायक व्यक्ति ही नहीं हैं। मैं आपको बता दूं कि जयाप्रदा जी को मेरी कैंडिडेट बताया जाता है लेकिन वास्तव में वह मेरी कैंडिडेट नहीं थीं। वह आजम खान की कैंडिडेट थीं। वह चुनाव लड़ीं और जीतीं। जब उन्हें भी आजम खान की प्रवृत्ति और प्रकृति के बारे में पता लग गया तो उनसे दूर हो गईं। समाजवादी पार्टी को नमाजवादी पार्टी बनाने का सारा श्रेय आजमखान को ही जाता है, और भी कई ऐसी बाते हैं आजम खान के बारे में जो मैं सार्वजनिक तौर पर मीडिया में बोल चुका हूं। समय आने पर और भी कई बाते हैं जिनका खुलासा मैं करूंगा।