ग्राम विकास केंद्र का शिलान्यास
स्रोत:    दिनांक 19-जून-2018

गत 9 जून को पट्टीकल्याणा (हरियाणा) में सेवा साधना एवं का शिलान्यास हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने भूमि-पूजन कर केंद्र का शिलान्यास किया। उन्होंने पौधारोपण भी किया। इस अवसर पर जैन मुनि उपाध्याय गुप्ती सागर जी , गीतामनीषी ज्ञानानंद जी महाराज , रवि शाह महाराज जी , स्वामी मोलड़ नाथ और श्री माधव जन सेवा न्यास के अध्यक्ष पवन जिंदल भी उपस्थित थे।  

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि भारतीय मनीषियों का चिंतन व जीवन दर्शन संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए है , जिसमें मानव ही नहीं समस्त प्राणी वर्ग के लिए संदेश दिया गया है। सनातन संस्कृति में पुनर्जन्म कर्मफल की अवधारणा से परिभाषित होता है। जो हम कर्म करते हैं उनसे कर्मानुसार पुण्य और पाप एकत्रित होता है। मानव जन्म ही ऐसा है , जिसमें व्यक्ति स्वेच्छानुसार कर्म कर जीवन लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। इसमें भी अहंकार से बचते हुए नि:स्वार्थ सेवा और परोपकार करना महा फलदायी होता है।

उन्होंने कहा कि यदि हम नि:स्वार्थ भाव से सेवा कार्य करते हैं तो हमारे ह्दय में हिमालय जैसी ऊंचाई पैदा हो जाती है। इसके बाद हमें मोक्ष प्राप्ति के लिए कहीं तपस्या करने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि सेवा करने वाले को चिंतन करना चाहिए और चिंतन करने वाले को सेवा करनी चाहिए। सारी सृष्टि अपनी है और यहां रहने वाला हर प्राणी हमारा अपना है , यह भाव होना चाहिए। हमारा जन्म केवल कमाने के लिए नहीं , बल्कि बांटने के लिए भी हुआ है। हमें 100 हाथों से कमाना चाहिए और 1000 हाथों से बांटना चाहिए। पाश्चात्य संस्कृति में अमीरों का चरित्र लिखा जाता है , जबकि भारतीय संस्कृति में अमीरों का नहीं , दान देने वाले भामाशाह का चरित्र लिखा जाता है। पाश्चात्य संस्कृति में सत्ताधीशों का चरित्र लिखा जाता है , जबकि भारतीय संस्कृति में समाज का मार्गदर्शन करने वाले भगवान राजाराम , श्रीकृष्ण , महाराणा प्रताप , छत्रपति शिवाजी जैसे राजाओं का चरित्र लिखा जाता है। उन्होंने कहा कि हमारा जन्म जीवन-यापन करने के लिए नहीं , बल्कि समाज को कुछ देने के लिए हुआ है। इसलिए हमें सीखा हुआ कार्य , कमाया हुआ पैसा और मिला हुआ समय समाजहित के लिए प्रयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री राव इंद्रजीत , अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख श्री अनिल ओक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार चार लाख वर्गफीट में बनने वाला यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। केंद्र के अंदर एक साथ 2,000 कार्यकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा इसमें पुस्तकालय , चिकित्सालय , ध्यान लगाने के लिए मेडिटेशन हॉल , मंदिर और गोशाला भी बनाई जाएगी। इसमें समरसता भवन का निर्माण किया जाएगा। केंद्र में किसानों को जैविक खाद बनाने और जैविक कृषि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 1,000 वाहनों के लिए पार्किंग का भी निर्माण होगा।

संघ शिक्षा वर्ग संपन्न

गत 10 जून को गोरखपुर स्थित सरस्वती वरिष्ठ विद्या मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‘गोरक्षप्रांत ’ के संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष (सामान्य) का समापन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसके मुख्य अतिथि थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री शंकरलाल। उन्होंने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि भारतभूमि पर पैदा हुए हैं। यह भूमि इतनी पवित्र है कि यहां स्वयं भगवान भी जन्म लेने की इच्छा रखते हैं। हिन्दुस्थान की भूमि हिंदू भूमि है। हिंदू कोई जाति या पंथ नहीं है , यह एक संस्कार और संस्कृति है। उन्होंने कहा कि यदि देश को विश्व गुरु के रूप में प्रतिस्थापित रखना चाहते हैं तो अपनी संस्कृति , अनुशासन व संस्कार को बनाए रखना होगा। सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा हेतु समाज को संगठित होना होगा।