इस्राइलियों के लिए दूसरी मां की तरह है भारत
स्रोत:    दिनांक 24-सितंबर-2018
भारत को दुनियाभर में आध्यात्मिकता का केंद्र ऐसे ही नहीं कहा जाता। पूरे विश्व से लोग यहां आते हैं, धर्म का मर्म समझने के लिए, अध्यात्म को जानने के लिए, शांति के लिए। हजारों की संख्या में विदेशी मूल के लोग हैं जो भारत में वर्षों से रह रहे हैं। उनका ज्यादातर समय यहीं पर बीतता है। बहुत कम समय के लिए वे लोग अपने देश के लिए जाते हैं। ऐसे ही व्यक्ति हैं इस्राइल के रहने वाले गिल रोन शमा.
 
परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर पूजा स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती के साथ हवन कुंड में आहूति देते गिल रोन शमा व उनके साथी 
इस्राइल के रहने वाले गिल रोन शमा संगीतकार हैं। वह हिब्रू में भारतीय भजन और आरती गाते हैं। उन्होंने बताया कि इस्राइल में हर व्यक्ति को आर्मी की ट्रेनिंग लेना अनिवार्य है। कुछ समय तक इस्राइल में आर्मी में उन्होंने अपने सेवायें भी दी। रोन शमा के मन में उथल—पुथल रहती थी और वे शान्ति की तलाश में थे।शांति की तलाश में वे भारत आए और यहीं के होकर रह गए. इसके बाद उन्होंने समूचे भारत का भ्रमण किया। ओंकारेश्वर में घूमने के दौरान उन्होंने एक दिन 'ओम जय जगदीश हरे आरती' के बोल सुने तो सुनते ही रह गए। उन्हें बहुत शान्ति मिली. इसके बाद उन्होंने आरती को हिब्रू में गाने का मन बनाया और गाना शुरू किया। वह इस्राइल गए और वहां भी उन्होंने लोगों के सामने गाया तो उसे बहुत पसंद किया गया।
 
उन्होंने अन्य कई भजन भी हिब्रू में गाने शुरू किए तो वह लोगों को पसंद आने लगे। बचपन से ही उनकी संगीत में रुचि थी तो उन्होंने अपना एक ग्रुप बनाया। जिसमें कई ईरान, तुकी आदि कई देशों के लोग हैं। उनकी पत्नी भी भारत में आकर उनके साथ रही। यहां लंबे समय रहने के चलते उनकी पत्नी अच्छी हिंदी बोलना सीख गई। वह उतनी अच्छी हिंदी तो नहीं सीख पाए लेकिन थोड़ी—थोड़ी हिंदी उन्हें आती है। लगभग छह सालों तक वह ओंकारेश्वर में रहे।
 
भारत हमारी दूसरी मां की तरह
रोन कहते हैं कि हमारे लिए भारत दूसरी मां की तरह है। यहां पूरी दुनिया से लोग आते हैं। योग सीखते हैं, यहां के आश्रमों में रहते हैं। भारत में आकर मन को जो शांति मिलती है वह कहीं नहीं मिलती। इस्राइल के लोग भारत के लोगों को बहुत पसंद करते हैं। दोनों देशों के बीच भी अच्छे संबंध हैं। इसलिए इस्राइल के बहुत से लोग यहां आकर रहते हैं। जैसे सभी भारतीय शांति में विश्वास रखते हैं, वैसे ही इस्राइल के लोग भी शांति में विश्वास रखते हैं। भारत और इजरायल के बीच संबंधों का दौर आज का नहीं बल्कि सदियों पुराना है। नए राष्ट्र के रूप में उदय से पहले ही इजरायल के यहूदी लोग पूर्व में स्थित भारत में व्यापार और पनाहगार के रूप में आते रहे। यहां उन्हें अपनत्व मिला। हजारों वर्ष पहले आए बहुत से यहूदी भारत में आकर बसे हुए हैं।

 
 इस्राइल के रहने वाले गिल रोन शमा, हिब्रू में गाते हैं आरती और भजन
भारत से बहुत कुछ सीखा
भारत ने मुझे मानवता के बारे में बहुत कुछ सिखाया है। मेरे शब्द, ईश्वर के प्रति मेरी आस्था और मेरे मन में जो शांति है वह भारत की ही देन है। भारत में रहने दौरान मैंने जो सीखा वह कहीं और नहीं सीख पाता। भारतीय संस्कृति दूसरों को दुत्कारती नहीं बल्कि अपनाती है। यहां आकर मैंने मानवता, सहिष्णुता, दूसरों की मान्यताओं और आस्था का आदर करना सब कुछ सीखा। भारत में सीखने के लिए इतना कुछ है कि आप अपनी पूरी उम्र लगाकर भी नहीं सीख सकते। आपको यह जानकर हैरत होगी कि कुल जनसंख्या के हिसाब से भारत में यदि प्रतिशत निकालें तो उतने लोग यहां योग नहीं करते जितने की इस्राइल में करते हैं। पूरे विश्व में प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा योग करने वालों में इस्राइल के लोग हैं। यहां तक कि इस्राइल की आर्मी में भी योग करना अनिवार्य है।

 
आरती गाते हुए गिल रोन शमा
गंगा के किनारे आकर कम होता है तनाव
गिल कहते हैं कि भारत के मुकाबले इस्राइल में बहुत तनाव है। इस्राइल की सीमा पर लगातार तनाव रहता है, भारत से कहीं ज्यादा, फिर भी इस्राइल के लोग सकारात्मक रहते हैं। एक बात है जो मुझे बहुत खटकती है वह यह है कि भारत में लोग पैसे के पीछे—बहुत भागते हैं जबकि पैसे के पीछे भागने का कोई मतलब नहीं हैै। नदियों को यहां मां का दर्जा दिया जाता है लेकिन नदियों की सफाई के लिए लोग गंभीर नहीं हैं। इस्राइली पानी की कीमत जानते हैं क्योंकि इस्राइल में पानी की बहुत कमी है। हम कोशिश करते हैं कि कम से कम पानी का इस्तेमाल करें। भारत में भी लोगों को ऐसा करना चाहिए। मुझे भारत में सबसे ज्यादा ऋषिकेश में आकर रहना अच्छा लगता है। जीवनदायिनी गंगा के किनारे बैठकर गाने में जो आनंद आता है वैसा और कहीं नहीं आता। गंगा किनारे बैठने से तनाव कम होता है।