देश को दहलाने की जिहादी दस्तक !
स्रोत:    दिनांक 01-जनवरी-2019
  - सतीश पेडणेकर                 
एनआईए ने आईएस के एक ‘स्लीपर सेल’ का पर्दाफाश कर देश को खतरे से बचाने का एक बड़ा काम किया है। जो आतंकी पकड़े गए हैं उनमें से एक इंजीनियरिंग का छात्र भी है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हुई छापेमारी में भारी मात्रा मे बम बनाने का सामान बरामद हुआ
छापेमारी के बाद संदिग्धों से बरामद हुए सामान को सील कर अपने साथ ले जाती हुई एनआईए की टीम
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम ने दिल्ली व उत्तर प्रदेश में 17 ठिकानों पर छापेमारी करके आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से प्रेरित एक नए मॉड्यूल ‘हरकत - उल - हर्ब - ए - इस्लाम’ का पर्दाफाश किया है और कथित रूप से उत्तर भारत, खासकर दिल्ली में अनेक स्थानों पर आत्मघाती हमले करने की साजिश रचने के आरोप में इसके सरगना सहित 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
दरअसल आईएसआईएस की रणनीति यही है कि दुनियाभर के देशों के मुसलमानों को जिहाद में शामिल किया जाए और वहां इस्लामिक कानून लागू किया जाए। इसी से प्रेरित होकर कई देशों में हमले किए गए। फ्रांस के शहर नीस में ट्रक से कुचलकर लोगों मारना हो, शार्ली एब्दो पत्रिका के दफ्तर पर आतंकी हमला हो या फिर बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रेस्टोरेंट पर हुआ आतंकी हमला, सभी में आईएस का हाथ था। गौर करने वाली बात है कि आतंकी हमले करने वाले सभी युवा थे और कहीं न कहीं आईएस की विचारधारा से प्रेरित थे।
जहां तक भारत की बात है तो यदा-कदा खबरें तो ऐसी आती रहती हैं कि आईएस भारत में भी अपना आतंकी मॉडयूल तैयार करने में जुटा है। जब आईएस ने इस्लामिक स्टेट के लिए जिहाद शुरू की थी तो महाराष्ट्र के चार नौजवान- आरिफ फैयाज माजिद, फहद तनवीर शेख, अमन तांडेल औक, शाहीन फारूखी तनकी की आईएस के साथ लड़ने की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र के कुछ सुन्नी युवकों के मोसुल और टिकरित में आईएसआईएस के साथ शियाओं के खिलाफ चल रहे युद्ध में शामिल होने की बात भी सामने आई। इससे पहले तक यही माना जा रहा था कि भारत के मुसलमान मध्यपूर्व के शिया-सुन्नी संघर्ष से अछूते हैं, लेकिन बाद में एक के बाद एक कई ऐसी खबरें खुफिया एजेंसियों को मिलीं कि आईएस भारत में अपने पैर जमाने के लिए पुरजोर कोशिश करने में जुटा है। कश्मीर और तमिलनाडु में कई जगहों पर मुस्लिम युवा आईएसआईएस लिखी टी शर्ट पहनकर घूमते देखे गए। आईएस के मुखिया और स्वयंभू खलीफा बगदादी ने मोसुल की ग्रांड मस्जिद में अपने पहले भाषण में कहा था कि खिलाफत ने कोकेशियन, भारतीय, शामी, चीनी, इराकी, यमनी, मिस्री, मगरबी, मेरिकी, फ्रेंच, जर्मन और आस्ट्रेलियाइयों को ‘इस्लाम के दुश्मनों’ से बदला लेने के लिए एक झंडे तले इकट्ठा किया है।
इसके बाद आईएस की भारत में बढ़ती घुसपैठ का अंदाजा तब लगा, जब खुफिया एजेंसियों ने बंगलुरू से आईएस के संदेशों को प्रसारित करने के आरोपों में पश्चिमी बंगाल के एक नौजवान मेहदी मशरूर बिस्वास को गिरफ्तार किया। वह दो साल से सोशल मीडिया पर आईएस का प्रचार कर रहा था, लेकिन खुफिया एजेंसियों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस बीच ब्रिटेन के एक चैनल ने खुलासा किया कि इस्लामिक स्टेट का ट्विटर एकाउंट एक भारतीय चलाता है। इस खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हुर्इं और आरोपी को गिरफ्तार किया। यह एकाउंट शामी विटनेस के नाम से चल रहा था। मेहदी नामक युवक इसे चला रहा था। इसके 17 हजार से ज्यादा ‘फालोअर्स’ भी हो गए थे। दुनिया के कई आतंकी संगठनों से जुड़े लोग इसे फॉलो कर रहे थे। इसकी वॉल पर हर रोज आईएस और उसके मकसद के समर्थन में संदेश प्रकाशित किए जाते थे।
 
 हिरासत में संदिग्ध
एक चैनल से हुई बातचीत में युवक ने स्वीकारा है कि वह आईएस का समर्थक है और उसका सदस्य बनने को भी तैयार है, लेकिन, उसका परिवार उसी पर निर्भर है। ऐसे में वह जा नहीं पाया। बताया जा रहा है कि वह मोबाइल से ही यह अकाउंट चला रहा था।
मुंबई के कल्याण उपनगर के चार युवकों आरिफ मजीद, शाहीन टांकी फहद शेख और अमन टांडेल की कहानी भी चर्चा में रही। पुलिस के अनुसार इंजीनियरिंग के ये चारों विद्यार्थी इराक में मजहबी स्थलों की यात्रा के लिए 22 यात्रियों के एक समूह का हिस्सा बनकर बगदाद गए थे। अगले दिन आरिफ ने बगदाद से अपने परिवार को फोन किया और उन्हें बगैर बताए चले जाने पर माफी मांगी। अन्य यात्रियों ने भारत लौटने पर बताया कि आरिफ मजीद, शाहिन टांकी, फहद शेख और अमन टांडेल किराये पर टैक्सी लेकर बगदाद से पश्चिम में स्थित शहर फलुजाह चले गए जो इराक के चरमपंथ के केंद्र के रूप में उभरा था।
जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से आईएस का बढ़ता प्रभाव नजर आता है। अक्सर जुम्मे की नमाज के बाद वहां आईएस के समर्थन में झंडे लेकर प्रदर्शन किए जाते हैं। आईएस के मुखपत्र ‘दाबिक’ में तो लिखा भी जा चुका है,‘आईएस कश्मीर पर कब्जा करेगा और गाय की पूजा करने वाले हिंदुओं को खत्म कर देगा।’ इसके 13वें संस्करण में आईएस के अफगानिस्तान-पाकिस्तान के कमांडर हाफिज सईद खान ने कहा है कि ‘‘इतिहास गवाह है कि इस क्षेत्र में मुसलमानों का शासन रह चुका है, मगर अब यहां गाय की पूजा करने वाले हिंदू और नास्तिक चीनी रहने लगे हैं; हिंदुओं और काफिर मुसलमानों को खत्म करने और खलीफा के शासन को बढ़ाने के लिए आईएस तैयारी कर रहा है।’’ सईद ने कहा है,‘‘अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर आईएस का नियंत्रण होना बहुत जरूरी है। ये खलीफा और मुसलमानों के शासन को बढ़ाने का ‘गेटवे’ है। हम पाकिस्तान और अफगानिस्तान सरकार, तालिबान और लश्कर-ए-तैयबा को चेतावनी देते हैं कि वह खलीफा और जिहाद के बीच में न आए ।’’ आतंकी हाफिज सईद खान को मुल्ला सईद ओरकजई के नाम से भी जाना जाता है। वह पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़ा था। बाद में आईएस से जुड़ गया। बता दें कि आईएस ने सईद खान को खुरासान का अमीर बनाया है। उसे कमांडर की जिम्मेदारी दी गई है। ये भी बता दें कि इससे पहले भी आईएस ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी को इस्लाम का दुश्मन बताते हुए कहा था कि ‘मोदी मुस्लिमों के खिलाफ जंग की तैयारी कर रहे हैं।’
ये सारे दावे अपनी जगह हैं, लेकिन देखना यह है कि कश्मीर में आईएस की रणनीति क्या होगी। वह लश्कर-ए तोयबा और जैशे मोहम्मद की तरह केवल भारत सरकार के खिलाफ लड़ने वाला आतंकी संगठन नहीं है। वह पूरे विश्व में इस्लाम की सत्ता चाहता है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी और खुफिया विभाग की तत्परता के चलते आईएसआईएस का हैदराबाद में बड़ा हमला टल गया था। एनआईए की टीम ने हैदराबाद से 11 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया। आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ। गिरफ्तार किए गए आतंकी ने प्राथमिक पूछताछ में कबूल किया कि रमजान में हैदराबाद में ये लोग बड़ा हमला करने वाले थे। आईएस भारत में दाखिल हो चुका है और कभी भी बड़ा हमला कर सकता है। बड़े शहरों में हमलों की आशंका ज्यादा है। उसकी बात में दम था क्यों़कि कुछ ही दिनों बाद हैदराबाद में एक दो नहीं, पूरे के पूरे 11 आतंकी धरे गये। ये लोग स्लीपर सेल के साथ मिलकर यहां आतंकी मॉड्यूल चला रहे थे। जनवरी 2018 में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके आईएस से संबंध थे। उनसे जुड़ी जानकारी खोजते समय इस मॉड्यूल के बारे में पता चला। इन संदिग्ध आतंकियों के पास से विस्फोटक सामग्री व हथियारों के अलावा 15 लाख रुपए नकद बरामद हुए। ऐसा माना जा रहा है कि ये 15 लाख रुपए इस समूह के सभी सदस्यों के वेतन के रूप में बांटे जाने थे। एनआईए के अधिकारी की मानें तो फौरी तौर पर हुई पूछताछ में पता चला है कि ये लोग केवल हैदराबाद ही नहीं, देश के कई अन्य शहरों में भी हमले की तैयारी में थे। अब तक पकड़े गए लोगों से पता चलता है कि भारत में आईएस का संजाल कश्मीर से लेकर केरल तक फैला हुआ है।
केरल के कासरगोड और पलक्कड़ जिलों के 21 मुस्लिम युवक लापता हैं। ये युवक अपने परिजनों को 6 जून को पश्चिम एशिया में मजहबी अध्ययन करने की बात कह कर निकले थे, उसके बाद से परिजनों से इनका कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। लापता हुए सभी युवक उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। इनमें से एक लड़के के परिजनों को कुछ दिन पहले वॉट्सएप्प पर एक संदेश मिला था। इस संदेश में लिख था, ‘‘हम अपनी आखिरी मंजिल तक पहुंच गए हैं।’’ परिजनों को संदेह है कि, सभी युवा आईएस के लिए लड़ने सीरिया पहुंचे हैं। स्मरण रहे कि, पिछले वर्ष भी केरल से आईएस में शामिल होने के लिए जा रहे 4 लड़कों को सऊदी अरब से वापस भारत भेजा गया था।
केरल से बड़े पैमाने पर लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। अरब देशों में सलाफीवाद का भी प्रचार तेजी से चल रहा है जिसे कई केरलवासियों ने अपनाया है। ऐसे कुछ लोगों पर आईएस का सलाफीवाद असर कर सकता है। इस्लाम का प्रचार करने वाले डॉ. जकिर नाइक के दो सहयोगियों-आर्शी कुरैशी और रिजवान खान ने केरल के कुछ लोगों को आईएस में शामिल कराने के लिए कन्वर्ट कराया था।
अभी तक आईएस भारत में हमला कर पाने में कामयाब नहीं हुआ है। भारतीय खुफिया एजेंसियां अभी तक आईएस के आतंकी मंसूबों को नाकाम करने में कामयाब रही हैं। एजेंसियों ने बीते 3 वर्षों में देश के 11 राज्यों से आईएस के 44 से ज्यादा संदिग्धों को पकड़ा है।
दरअसल आईएस एक वैश्विक आतंकवादी संगठन है। उसके जिहादियों में तीस से चालीस देशों के मुसलमान शामिल हैं। आईएस का संगठन दो स्तरीय है। एक तरफ दुनियाभर के 43 इस्लामी संगठनों ने उसके प्रति आस्था का इजहार किया है। दूसरी तरफ दुनियाभर में उसके प्रांत है, जिन्हें वह ‘विलायत’ कहता है। उसके प्रांत हैं:- लीबिया,मिस्र (सिनाई), खुरासान (भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान), नाइजीरिया, अल्जीरिया, यमन, सऊदी अरब, उत्तरी कॉकेशस। इनमें से लीबिया, मिस्र और खुरासान प्रांत बहुत सक्रिय हैं उनका अपने देशों के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा है। भारत आईएस के खुरासान प्रांत के तहत आता है।
पिछले कुछ समय में आईएस ने अफगानिस्तान में कई हमले किए हैं। अफगानिस्तान से इस्लामिक स्टेट अब भारत में पैर जमाने की एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने एक रिपोर्ट केंद्र को सौंपी है। इसमें कहा गया है कि आईएस अफगानिस्तान में नांगरहार कैंप में युवाओं को आतंकी हमलों का प्रशिक्षण दे रहा है। इस समय इस ट्रेनिंग कैंप में 20 से ज्यादा भारतीय युवा मौजूद हैं। इनमें ज्यादातर केरल से हैं।
बहरहाल, आईएस इराक में भले ही हार गया हो लेकिन अभी वह खत्म नहीं हुआ है। उसके लड़ाके अभी भी सक्रिय हैं। आईएस का मुखिया अबू अल बगदादी के मारे की खबर भी आ चुकी है लेकिन अभी यह पुख्ता नहीं हुआ है कि वह मारा गया या जिंदा है। बगदादी की मौत पर अभी भी संशय बरकरार है।