'मौजूदा शिक्षा प्रणाली केवल सूचना का माध्यम बन कर रह गई''
   दिनांक 16-जनवरी-2019
 
समारोह को संबोधित करते श्री भैयाजी जोशी  
''मौजूदा समय में भारतीय शिक्षा प्रणाली और विद्यार्थी दोनों एक परंपरागत ढांचे में बंध कर आगे बढ़ रहे हैं। इससे शिक्षा का असली उद्देश्य पूर्ण नहीं हो रहा। इसलिए शिक्षा प्रणाली और विद्यार्थियों को एक सीमित ढांचे से निकालना जरूरी है।''
 उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने कही। वे गत दिनों नागपुर स्थित धरमपेठ शिक्षा संस्था के साइंस कॉलेज के सुवर्ण महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विज्ञान की शिक्षा लेते वक्त शिक्षा का विज्ञान जानना जरूरी है। अभी 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाला विद्यार्थी परीक्षा में पास हो जाता है, लेकिन देखा जाए तो वह 65 प्रतिशत फेल होता है। इस तरह का मूल्यांकन कितना योग्य है, इस पर विचार करने की जरूरत है। शिक्षा प्रणाली के पास सर्वसाधारण लोगों की समस्या का समाधान करने की क्षमता व दृष्टिकोण है या नहीं, इसका उत्तर ढूंढना भी जरूरी है। मौजूदा शिक्षा प्रणाली केवल सूचना का माध्यम बन कर रह गई है। इससे स्पर्धा ने जन्म लिया है। वहीं दूसरी ओर रोजगारोंन्मुख शिक्षा का ध्येय रखने वाले बहुत से विद्यार्थी विदेशों में जाकर वहां के विकास में योगदान दे रहे हैं, लेकिन ज्ञान और विवेक के अभाव में उनका गुणात्मक विकास नहीं होता। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा प्राचीन और आधुनिकता का सुवर्ण मध्य बनकर देशहित का विचार सामने रखने वाली होनी चाहिये। ऐसी शिक्षा प्रणाली को बदलने की नीति निर्धारित करने वाले शिक्षाविद, पालक, समाज के विविध घटकों और विद्यार्थियों को अपनी जिम्मेदारी और भूमिका पहचानने की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग से व्यक्तित्व का विकास तो होगा ही। शिक्षा ऐसी हो जो व्यक्ति का विवेक भी जागृत करे, मनुष्य निर्माण हो, मैं कौन हूं और मुझे क्या करना है, यह बताए।