घोटाले से जुड़ते अखिलेश के तार
स्रोत:    दिनांक 16-जनवरी-2019
खनन खोटाले को लेकर सीबीआई की कार्रवाई ने जहां ‘ईमानदारी का बाना’ ओढ़े आईएएस अधिकारी की हकीकत को उजागर किया है वहीं सपा के मुखिया अखिलेश यादव की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं
 
                                                घोटाले के आरोपों से घिरीं बी. चंद्रकला एवं अखिलेश यादव  
सपा सरकार के कार्यकाल में खनन घोटाले का मामला इस कदर बढ़ गया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। 2016 में ही सीबीआई ने खनन घोटाले की जांच शुरू कर दी थी। हमीरपुर जनपद के खनन घाटों और दस्तावेजों को खंगालने के बाद सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए, 2008 बैच की आईएएस अधिकारी बी.चन्द्रकला के घर पर छापा। जनपद हमीरपुर की जिलाधिकारी रहते हुए खनन का पट्टा नियम विरुद्ध तरीके से दिए जाने के आरोप में बी. चंद्रकला के खिलाफ सीबीआई ने प्राथमिकी भी दर्ज कर ली है। बी. चंद्रकला के लखनऊ स्थित आवास के अतिरिक्त 14 अन्य जगहों पर छापेमारी की गयी। उल्लेखनीय है कि हमीरपुर की जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने खनन के 60 लाइसेंस जारी किये थे। इसमें ई-टेंडरिंग की नीति को ताक पर रखकर लाइसेंस जारी किए गए थे। सभी जगह की छापेमारी में सीबीआई अधिकारियों को चार किलो सोना और ढाई करोड़ रूपया नकद मिला है।
यह खनन घोटाले की पहली बड़ी कार्रवाई है। मामले की जिस तरह से परतें खुल रही हैं, उससे स्पष्ट होता है कि घोटाले की आंच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचनी शुरू हो गयी है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से छह सवाल पूछे हैं। सवाल है, ‘2012 में खनन के ठेके ई-टेंडर के माध्यम से देने का निर्णय किया था। ई-टेंडर तो लाए, लेकिन बी. चंद्रकला ने उसका उल्लंघन किया। क्या ऐसा उनकी जानकारी में हुआ? जिस समय खनन की लूट मची, उस समय आप खनन मंत्री थे या नहीं? 2012 और 2013 में बी. चंद्रकला को हमीरपुर का डीएम क्यों बनाया गया? तीसरा, सपा और सपा प्रमुख का दिनेश कुमार मिश्रा, अंबिका तिवारी, संजय दीक्षित और आदिल खान से क्या संबंध हैं? जो इस मामले में आरोपी हैं। आपके बाद गायत्री प्रजापति को खनन मंत्री बनाया गया।
क्या उन्हें बाद में इसलिए भूमिगत किया गया क्योंकि इस मामले के तार गायत्री से जुड़े थे? आपने मुख्यमंत्री आवास जब खाली किया था तो दीवारें भी तोड़ी थीं। क्या दीवार के पीछे का राज हमीरपुर की ‘लूट’ थी।’
हालांकि आरोपों से घिरने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जब लोकसभा चुनाव करीब आया है तो भाजपा डराने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है क्योंकि भाजपा सपा-बसपा के गठबंधन से डर गयी है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खनन घोटाले का संज्ञान लिया था। इसके बाद ही सीबीआई ने 2012-17 के बीच हुई खनन की लूट की जांच की। सीबीआई ने दो चरण में प्राथमिकी दर्ज की। तीसरे चरण में अब प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। सीबीआई उच्च न्यायालय के अधीन काम कर रही है। वह किसी के गठबंधन के समय या फिर चुनाव को देखते हुए कार्रवाई नहीं कर रही है।
ऐसे राजनीतिक दल जिनके नेता आरोपी हैं, उनको मामले से ध्यान नहीं भटकाकर, सटीक जवाब देना चाहिए। अब सपा अध्यक्ष अखिलेस यादव चारों तरफ से घिरते दिख रहें हैं।