''अखंड गंगा प्रवाह का आधुनिक रूप है संघ''
स्रोत:    दिनांक 16-जनवरी-2019

पुस्तक का विमोचन करते( दाएं से) श्री जे नंदकुमार एवं अन्य विशिष्टजन
गत दिनों भोपाल स्थित मानस भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर केंद्रित 'कृति रूप संघ दर्शन' पुस्तक के खंडों के लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक श्री जे़ नंदकुमार। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संघ अखंड गंगा प्रवाह का आधुनिक रूप है। संघ को लेकर कई परिभाषाएं प्रचलित हैं, जबकि संघ को उसके स्वयंसेवक को देखकर समझा जा सकता है। भारत की परंपरा और संस्कृति कुछ ऐसी है कि हमारी हस्ती अभी भी वैसी है,जो मिटती नहीं। कई देश ऐसे हैं, जो समाप्त हो गए। संघ के एक संस्थापक प्रचारक दादाराव परमार्थ ने संघ की जो परिभाषा दी है, उसमें उन्होंने हिन्दू राष्ट्र के लिये जीवित लक्ष्य पाने का परिणाम बताया था। भारत में पुराने समय में कुछ ऐसी प्रथाएं पैदा हो गईं, जिसमें हमने पहले महिलाओं को वेदों से अलग कर दिया, उसके बाद पिछड़े वर्ग के लोगों को समाज से अलग कर दिया। यह इतिहास का अंधकारमय कालखण्ड था, इससे हम दुर्बल हो गए। उन्होंने कहा कि छह खण्डों में विभक्त यह पुस्तक संघ के बारे में लोगों को परिचित कराती है। संघ का मूल कार्य कार्यकर्ता निर्माण है और कार्यकर्ता अन्यान्य क्षेत्रों में कार्य करते हैं। आजादी के आंदोलन में भी कार्यकर्ताओं ने भूमिका निभाई थी। भारत रत्न भगवान दास के उद्घरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ ने आजादी के आन्दोलन के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को भी सुरक्षा प्रदान की थी, जब उन पर विभाजनकारी ताकतों ने आक्रमण की कोशिश की थी। इसके अलावा स्वयंसेवकों ने दिल्ली की वाल्मीकि बस्ती में महात्मा गांधी को भी सुरक्षा प्रदान की थी। इस घटना के बाद गांधी जी ने संघ के एक एकत्रीकरण में संघ की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि सेवा और त्याग के मूल आदर्श से अनुप्राणित हो रहे इस संगठन की शक्ति बढ़ती जाएगी।