केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या पर सेकुलर चुप्पी
स्रोत:    दिनांक 16-जनवरी-2019
- टी. सतीशन, केरल से          
केरल में एक बार फिर से संघ परिवार के कार्यकर्ताओं की हत्या का दौर शुरू हो गया है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालयों पर माकपा के गुंडे और जिहादी तत्व बम फोड़ रहे हैं, लेकिन सेकुलर चुप हैं। शबरीमला को भी सरकारी दमन का अखाड़ा बना दिया गया है
 पुतियातरु स्थित भाजपा कार्यालय में बम विस्फोट के बाद का दृश्य
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और उसके हिंसक तत्वों का इन दिनों एक ही लक्ष्य है, चाहे जो हो जाए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं पर हमले करते रहो। उन पर कोई नियम-कानून लागू नहीं होता, क्योंकि वे ही नियम बनाने वाले, उन्हें लागू करने वाले और तोड़ने वाले हैं। वे शासक हैं। विधानसभा में उनका स्पष्ट बहुमत है। राज्य पुलिस बल उनके हाथों का खिलौना-भर है। उन्हें इसकी परवाह नहीं कि उच्च न्यायालय क्या कहता है। दूसरे शब्दों में कहें तो केरल में इन दिनों कुछ और नहीं, बल्कि फासीवादी शासन है। निर्दयी शासन। शासक वर्ग ही तय करता है कि क्या सही है और क्या गलत।माकपा ने राज्य में हिंसा की जो नवीनतम शृंखला चला रखी है उसका संबंध शबरीमला के रीति-रिवाजों और परंपराओं को तोड़ने की दिशा में शासन के प्रयासों से है। सरकार ने जिस तरह से दो नास्तिक महिलाओं को चोरी-छुपे मंदिर में दाखिल कराया, उसने स्वाभाविक रूप से भक्तों में क्षोभ पैदा किया है और इससे उनकी भावनाओं तथा धार्मिक मनोभावों को चोट पहुंची है। इससे करोड़ों भक्तों में क्रोध और घृणा उपजी है।
कन्नूर स्थित संघ कार्यालय का यह हाल किया माकपा के गुंडों ने
जब भक्त शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक तरीके से सरकारी प्रयासों को विफल करते रहे, तो पिनरई विजयन के नव फासीवादी शासन ने एक घटिया तरीके का इस्तेमाल करते हुए चोरी से मंदिर में दो ऐसी माओवादी महिलाओं को पहुंचा दिया जो नास्तिक भी हैं। सरकार ने यह हरकत बहुचर्चित लेकिन बीच-बीच में टूट रही महिला दीवार बनाने वाली घटना की अगली सुबह की। इन दोनों महिलाओं (कनकदुर्गा और बिंदु) ने कुछ महीने पहले भी मंदिर में प्रवेश करने का निरर्थक प्रयास किया था। बाद में पता चला कि राज्य सरकार ने इन दोनों महिलाओं को कुर्ग में रखा था, जहां पथनमथिट्टा के पुलिस अधीक्षक की पत्नी जिला कलेक्टर के रूप में तैनात हैं। वहां से उन्हें कोट्टम ले जाया गया जहां वे पुलिस गेस्ट हाउस में रहीं; और, पुलिस नियमों की अनदेखी करते हुए उन्हें एक निजी वाहन में पम्पा लाया गया। उल्लेखनीय है कि निलक्कल से आगे किसी भी निजी वाहन को ले जाने की अनुमति नहीं है। वहां से, प्रत्येक भक्त को केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की बस से पम्पा जाना होता है। पम्पा की ओर निजी वाहन ले जाने के मामले में पुलिस अधीक्षक यतीश चनरा ने जैसा अपमानजनक बर्ताव किया था, वह सुर्खियों में आ गया था और अब यह लोकसभा विशेषाधिकार समिति के समक्ष है। लेकिन, ये बातें सक्रिय आंदोलनकारी महिलाओं के लिए किसी मतलब की नहीं थीं। खबरों की मानें तो वे कोट्टायम से पुलिस के घेरे में पुरुष पोशाक में आई थीं और पम्पा से मंदिर तक उन्हें एम्बुलेंस में लाया और ले जाया गया था। पुलिस इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि ये ‘भक्त’ प्रतिबंधित माओवादी समूह से जुड़ी थीं। इन महिलाओं को कन्नूर में माकपा के प्रभाव वाले गांवों में भी ठहराया गया था।
जैसे ही इन महिलाओं के मंदिर में प्रवेश की खबर फैली, पूरे राज्य में नामजप के रूप में शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू हो गया। माकपा कार्यकर्ताओं ने राज्य सचिवालय के सामने आंदोलनकारी शबरीमला कर्म समिति और भाजपा/ रा.स्व.संघ के कार्यकर्ताओं पर पथराव किया। पुलिस ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के ही खिलाफ पानी की तेज धार की बौछार, आंसू गैस के गोले और ग्रेनेडों का इस्तेमाल किया। इनमें से एक गोला उस सत्याग्रह पंडाल के पास एक गिरा, जहां भाजपा उपाध्यक्ष शिवराजन इसी सिलसिले में भूख हड़ताल पर थे। उस गोले से फैली गैस के कारण उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। बहरहाल, माकपा कार्यकर्ताओं का हमला लंबे समय तक जारी रहा।                                       
                
  अस्पताल में इलाजरत संघ के कन्नूर विभाग के संघचालक 80 वर्षीय चंद्रशेखरन
इतना ही नहीं, पंडाल में शांतिपूर्ण नामजप के माध्यम से विरोध प्रदर्शन कर रहे भक्तों पर भी हमला हुआ। माकपाई गुंडों ने इस स्थान के ऊपर बने अपने कार्यालय से भक्तों के मार्च पर पत्थर फेंके जिससे एक भक्त चंद्रन उन्नीथन का सिर फट गया। अगले दिन उसकी मौत हो गई। मुख्यमंत्री विजयन ने इस मामले में बयान दिया कि ‘उन्नीथन की मृत्यु हृदयाघात से हुई थी’ लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच को उजागर करके मुख्यमंत्री को अजीबोगरीब स्थिति में ला दिया। उन्होंने ऐसी अर्थहीन बात कही ही क्यों? इस बात का उत्तर देना आसान है। ऐसा करके वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच की प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। यह वैसा ही नाटकीय प्रयास था जैसा कि 1996 में मन्नार के परुमाला कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के तीन कार्यकर्ताओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से छेड़छाड़ करते हुए किया गया था। उस समय राज्य में माकपाई मुख्यमंत्री ई.के. नयनार का शासन था। अभाविप से जुड़े छात्रों को माकपाइयों ने डुबो कर मारा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही थी कि वे नशे में होने की वजह से डूबे थे। उस घटना ने न केवल मारे गए छात्रों के माता-पिता और परिवार को आहत किया था, बल्कि उससे पूरे राज्य में संघ परिवार के कार्यकर्ताओं की भावनाएं भी आहत हुई थीं।
जिस दिन उन्नीथन की मृत्यु हुई थी, उसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ/भाजपा के चार कार्यकर्ताओं पर राज्य के विभिन्न जिलों में चाकुओं से जानलेवा हमले किए गए थे। उल्लेखनीय है कि इन दिनों माकपा ने एसडीपीआई और पीएफआई जैसे इस्लामिक कट्टरपंथी समूहों से हाथ मिला लिया है। माकपा इन ताकतों का इस्तेमाल संघ/भाजपा के लोगों और अन्य भक्तों पर हमले करने-करवाने में करती है। ऐसे मौकों पर पुलिस अपनी भूमिका बड़ी चतुराई से निभाती है। पेरम्बाऊर में भाजपा की राज्य इकाई की सचिव रेणु सुरेश के सिर पर पुलिस उपाधीक्षक ने लाठी से प्रहार किया जिससे उन्हें आंतरिक रक्तस्राव हो गया। उनका इलाज अमृता इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज में चल रहा है। जब यह घटना हुई उस समय वह राज्य सरकार की शह पर शबरीमला की परंपराएं तोड़े जाने के प्रयासों के खिलाफ महिला भक्तों के एक जुलूस का नेतृत्व कर रही थीं।इस घटना के अगले दिन 4 जनवरी को, शबरीमला कर्म समिति ने आम हड़ताल का आह्वान किया। मंदिर की परंपराओं के पिनरई सरकार प्रायोजित उल्लंघन से परेशान केरलवासियों ने इस आह्वान में पूरे मनोयोग से सहयोग किया।इसके पहले 3 जनवरी को कोच्चि में 14 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया था। हिरासत में लिए गए लोगों में आठ महिलाएं शामिल थीं, जिनमें से तीन- सी.वी. सजनी, अधिवक्ता सिंधुमोल और रीमा पणिक्कर-को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे बिंदु और कनकदुर्गा द्वारा ‘शबरीमला की परंपराओं के उल्लंघन’ का जश्न मनाने के लिए माओवादियों द्वारा आयोजित कार्यक्रम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। कर्म समिति से जुड़ी ये महिलाएं माओवादियों द्वारा मिठाई बांटे जाने का विरोध कर रही थीं |
       
माकपाई हत्यारों के हाथों मारे गए चंद्रन उन्नीथन 
त्रिशूर में देववोम मंत्री कटकमपल्ली सुरेंद्रन के खिलाफ काले झंडे लहराने पर पुलिस वालों ने भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर हमला किया। इसके दो दिन के बाद महिला मोर्चा की राज्य सचिव एडवोकेट निवेदिता को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया। क्यों ? क्योंकि उन्होंने गुरुवायूर में कटकमपल्ली के खिलाफ नामजप में भाग लिया था।
एक अन्य घटना में माकपा और एसडीपीआई के लोगों ने कन्नूर जिले में भाजपा नेताओं के घरों पर बम फेंके। इन हमलों में सेवा भारती की एम्बुलेंस बर्बाद हो गई थी। कन्नूर में कई स्थानों पर भाजपा कार्यालयों पर भी हमला किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक 80 वर्षीय चंद्रशेखरन के घर पर हमला किया गया और उनके साथ मारपीट की गई जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वे मालाबार क्षेत्र में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। संघ ने इस हमले को उनकी हत्या का प्रयास माना है। उल्लेखनीय है कि हमलावरों ने उनका घरेलू सामान तोड़कर एक कुएं में फेंक दिया था। राज्यसभा सांसद तथा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वी. मुरलीधरन के पैतृक आवास और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पी.के. कृष्णदास के घर पर बमबारी की गई और उसी जिले में संघ के एक कार्यालय को आग लगा दी गई। कासरगोड में भाजपा नेता पी. गणेश को मारने की कोशिश की गई। गुंडों ने विहिप नेता के. जयकुमार के घर पर मृत्यु के पश्चात् चढ़ाया जाने वाला पुष्पचक्र रख दिया। यही नहीं, कोझीकोड में भाकपा-एसडीपीआई के गुंडों ने हड़ताल के समर्थन में बंद रखी गर्इं कई दुकानों पर हमला किया। यहां भी भाजपा और संघ के कई नेताओं के घरों पर हमला किया गया। तिरुअनंतपुरम जिले में भी संघ परिवार के लोगों और उनके घरों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर व्यापक हमले किए गए। एर्नाकुलम जिले के उत्तरी परूर में कर्म समिति के कार्यकर्ताओं के खिलाफ सिलसिलेवार हमले हुए हैं।संघ परिवार के नेताओं के साथ-साथ पूरे केरलवासियों का मानना है कि मुख्यमंत्री और दूसरे माकपाई नेता ‘महिला दीवार’ आयोजन के असफल रहने से हताश हैं। वे इस बात से भी निराश हैं कि अराजकतावादी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश दिलाने के उनके प्रयास बेकार हो गए। यह सब संघ परिवार के कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों और नेतृत्व के कारण हुआ। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि अब वे क्या करें। ऐसे में वे केवल एक ही काम कर रहे हैं; हमले करना। लोगों की हत्या की नीयत से हमले करना। केरल घायल है और आक्रोशित है मार्क्सवादी सरकार के हिन्दू-दमन के प्रयासों से।