आतंक की राह छोड़ नजीर बने वानी को मिलेगा अशोक चक्र
   दिनांक 24-जनवरी-2019
जम्मू—कश्मीर में कभी बहकावे में आकर आतंकवादी बने नजीर वानी को सब समझ में आया कि वे लोग देश के दुश्मन हैं। उनका मकसद कश्मीर में सिर्फ आतंक फैलाना है तो उन्होंने आतंक का रास्ता छोड़ दिया और आत्मसमर्पण कर दिया।
सेना ने उन्हें मौका दिया और उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी बटालियन ज्वाइन की और कई आतंकियों को मार गिराया लांस-नायक नजीर वानी को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। पिछले साल जम्मू कश्मीर के शोपियां में एक ऑपरेशन के दौरान वह शहीद हो गए थे। उन्हें 2 बार सेना मेडल भी मिल चुका है।
शहीद लांस नायक नजीर वाणी ने कश्मीर के शोपियां में पिछले साल छह आतंकियों को मार गिराया था। अब उन्‍हें देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार अशोक चक्र के लिये चुना गया है। लांस नायक नजीर वानी सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। इसी ऑपरेशन में वह शहीद भी हो गए थे।
शांति के समय अशोक चक्र सेना की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्‍च पुरस्‍कार है। इस साल कीर्ति चक्र के लिए चार जवानों और शौर्य चक्र के लिए 12 जवानों का चयन किया गया है।
जख्‍मी होकर भी आतंकियों से लड़ते रहे
नजीर वानी पिछले वर्ष 23 नवंबर 2018 को 34 राष्ट्रीय रायफल्स के साथियों के साथ ड्यूटी पर थे, तब इंटेलिजेंस से शोपियां के बटागुंड गांव में हिज्बुल और लश्कर के 6 आतंकी होने की खबर मिली। आतंकियों के पास भारी तादाद में हथियार थे। वानी और उनकी टीम को आतंकियों के भागने का रास्ता रोकने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। 23 नवंबर 2018 के दिन आतंकियों ने उनक मुठभेड़ शुरू हुई। वानी और उनकी टीम ने कुछ छह आतंकियों को मार गिराया। इनमें दो को वानी ने मारा। मुठभेड़ में बुरी तरह घायल वानी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। शहीद वानी को सपुर्दे ए खाक करने से पहले सेना ने उनके गांव में जाकर उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई थी।
बहादुरी से गांव को भी मिली पहचान
नजीर कुलगाम के गांव अश्‍मुजी के रहने वाले थे। उनकी बहादुरी से इस गांव को नई पहचान मिली है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। वानी के घर में उनकी पत्‍नी और दो बच्‍चे हैं, जिनकी उम्र 20 और 18 वर्ष है। जब वानी शहीद हुए तो गांव के हर शख्स की आंखें नम थीं।