#AshokChakra:महजबीं बोलीं मुझे ही नहीं पूरे कश्मीर को उन पर गर्व
   दिनांक 26-जनवरी-2019

देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले नजीर अहमद वानी कभी आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहा करते थे। लेकिन साल 2004 में सेना की 162 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) में भर्ती होने के बाद आतंकियों के सबसे बड़े दुश्मन वही बन बैठे। समय-समय पर आतंकियों के खिलाफ चलाये गए कई बड़े अभियानों में उन्होंने अद्भुत वीरता का परिचय दिया।सेना ने उनके अदम्य साहस और पराक्रम को देखते हुए साल 2007 और 2018 में उन्हें सेना पदक से सम्मानित किया। नवम्बर, 2018 में कश्मीर के शोपियां स्थित बाटगुण्ड में आतंकियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में 38 वर्षीय नजीर ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए 2 आतंकियों को मार गिराया और अपने एक साथी को बचाते समय आतंकियों द्वारा की गई फायरिंग में वह बलिदान हो गए।  उन्हें मरणोपरांत शांतिकाल का वीरता का सर्वोच्च सेना सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की गई। पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र ने उनकी पत्नी महजबीं से विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश:-
आप के पति लांस नायक नजीर अहमद वानी को शांतिकाल में वीरता के लिए सेना का सर्वोच्च सैनिक सम्मान देने की घोषणा हुई। जब यह खबर सबसे पहले आप को पता चली तो पहली प्रतिक्रिया क्या थी ?
जब मुझे सूचना मिली तो बड़ा गर्व हुआ। हकीकत में मेरे और मेरे परिवार के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि मेरे पति को उनकी वीरता के लिए देश का इतना बड़ा सैनिक सम्मान दिया जा रहा है।लेकिन दूसरी ओर दुख भी है कि वह आज इस दुनिया में नहीं हैं। किसी भी पत्नी के लिए उसका शौहर ही सब कुछ होता है।इसलिए उनके जाने का बड़ा दुख है जो हरदम जीते जी सालता रहेगा। क्योंकि कोई भी पुरस्कार उनकी कमी को पूरा नहीं कर सकता। लेकिन इस खबर से मुझे गर्व होता है कि उनके बलिदान होने के बाद आज लोग उन्हें दिल से याद कर रहे हैं।
 
आप के पति पहले आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहे।पर ऐसा क्या हुआ कि वे सेना में शामिल हो गए ?
मुझे उनके पहले के इतिहास के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है और जो है वह सबके सामने है। वैसे मैंने कभी भी उनके काम के बारे में जानने की ज्यादा कोशिश नहीं की। सेना में भर्ती होने के बाद भी वे आम लोगों की ही तरह सबके साथ घूमते थे, सबके साथ रहते थे।
आप के 2 बेटे हैं। आप उन्हें क्या बनाना चाहती हैं आपके पति उनके लिए क्या सोचते थे ?
वैसे हम लोगों के बनाने से कुछ नहीं होता। जो उनकी किस्मत और ऊपर वाले ने सोच रखा होता है वही होता है। इसलिए उन्होंने जो सोच रखा होगा वहीं वे बनेंगे। लेकिन मेरे पति की इच्छा थी कि मेरा एक बच्चा डॉक्टर बने, जो गरीब लोगों सेवा करे। क्योंकि यहां गांव-देहात में बहुत से गरीब लोग हैं जिन्हें इलाज नहीं मिल पाता और इलाज के अभाव में उन्हें बड़ी परेशानियां होती हैं। इसलिए मेरा बेटा डॉक्टर बनकर ऐसे लोगों की सेवा करे। दूसरा बेटा इंजीनियर बनकर देश और आवाम की की सेवा करे। मेरे पति नजीर कभी भी यह नहीं सोचते थे कि मेरे बेटे डॉक्टर-इंजीनियर बनकर खूब पैसा कमाएंगे। वह तो सैदव गरीबों की चिंता करते रहते थे। और जितने दिन वे जिये सदा गरीबों को मदद और साथ देते रहे।
हाल ही में घाटी के शाह फैजल नाम के एक युवा आईएएस ने यह कहते हुए नौकरी से इस्तीफा दे दिया कि घाटी में अशांति है। साथ ही जम्मू-कश्मीर की पहचान पर संकट है, इस सबकी वजह केंद्र सरकार है। क्या शाह फैजल जैसे लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए न केवल कश्मीर को बदनाम कर रहे हैं बल्कि एक साजिश के तहत घाटी के युवाओं को बरगला और गुमराह कर रहे हैं ?
मैं इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहती। बस इतना जरूर कहना चाहती हूं कि यह शाह फैजल की अपनी राय है। पर मैं उनकी बात से बिल्कुल भी इत्तेफाक नहीं रखती। मैं खुद कश्मीर में रहती हूं और सब कुछ महसूस करती हूं। हकीकत में शाह फैजल ने जिसे लेकर इस्तीफा दिया वैसा कुछ भी मैंने देखा नहीं।
घाटी में हर किसी वर्ग की बात होती है, लेकिन यहां की महिलाओं को सदैव नजरअंदाज किया जाता है। इसके पीछे क्या कारण आप मानती हैं ?
यह बात सही है कि महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता है। यहां का माहौल इतना संवेदनशील है कि सब कुछ जानकर भी हम कुछ बोल नहीं सकते। जबकि बोलने के लिए बहुत कुछ है। इसलिए मैं इस विषय पर ज्यादा कुछ नहीं कहूंगी। यहां इतना ख़ौफ़ है कि अगर मेरे मुंह से कुछ भी ऐसा-वैसा निकल गया तो मैं और मेरे बच्चों, परिवार पर यह भारी पड़ेगा।
घाटी के सियासतदान हर विषय पर बोलते दिखाई देते रहते हैं। लेकिन बहुत कम ही ऐसा होता है जब वे कभी लड़कियों की शिक्षा, रोजगार और उन्हें आगे बढ़ाने वाले विषयों पर बात करते हों, लेकिन इसके बावजूद हाल ही में घाटी की लड़कियों ने बंदिशों को तोड़ते हुए पायलट से लेकर फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में कदम रखा है, जहां उन्हें जाने से रोका जाता था। इस बदलाव को आप कैसे देखती हैं ?
यह कश्मीर के लिए अच्छा है। यहां की लड़कियां भी दिल्ली-मुंबई की तरह आगे बढ़ना चाहती हैं और बढ़ भी रही हैं। क्योंकि अब घाटी का समाज बदल रहा है। अब यहां भी हरेक काम में लड़कियों को क्रेडिट दिया जाता है। पर कुछ लोग हैं जो इसमें रोड़ा लगाने का काम करते हैं, यह लोग चाहते हैं कि महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता रहे।
खासकर घाटी की लड़कियों, महिलाओं और युवाओं को आप का क्या संदेश है ?
उत्तर-मैं इन सभी से इतना ही कहना चाहूंगी कि सभी लोग पढ़-लिखकर आगे बढ़ो, और अपने देश,समाज और अपने माता-पिता का नाम रोशन करो।