इस घर को आग लग गई !
   दिनांक 13-अक्तूबर-2019
 मनोज वर्मा
  कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को लेकर अपनी ही पार्टी की आलोचना कर चुके सलमान खुर्शीद ने एक बार फिर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की जरूरत बताई है। अपने हालिया बयान को लेकर पार्टी के अन्य नेताओं की टिप्पणी पर भी उन्होंने खरी-खोटी सुनाई है। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा है कि जो मुझे ठीक से नहीं जानते हैं, वे मुझे नसीहत ना दें

 
कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर मचे घमासान के चलते कांग्रेस पार्टी सोनिया कांग्रेस बनाम राहुल कांग्रेस के दो पाटो के बीच फंसी नजर आ रही है। सोनिया गांधी के करीबी नेता राहुल गांधी के समर्थकों को किनारे लगा रहे तो राहुल गांधी समर्थक सोनिया गांधी के करीबियों पर साजिश रचने के खुले आरोप लगा रहे हैं। इतना ही नहीं महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए टिकट तय करने के लिए बुलाई गई बैठक से भी राहुल गांधी दूर रहे और जब उनके करीबी संजय निरूपम और अशोक तंवर जैसे नेताओं ने टिकट वितरण को लेकर सवाल उठाना शुरू किया और तो राहुल गांधी विदेश चले गए।लिहाजा कांग्रेस के भीतर सोनिया कांग्रेस बनाम राहुल कांग्रेस को लेकर जितने मुंह उतने सवाल हो रहे हैं।
क्या कांग्रेस, सोनिया कांग्रेस और राहुल कांग्रेस में बंट गई है? राहुल गांधी किससे नाराज हैं अपनी मां सोनिया गांधी से या उनके करीबी समर्थकों से? क्या कांग्रेस में बुर्जुग और युवा कांग्रेसियों के बीच जंग छिड़ी हुई है? क्या राहुल गांधी के समर्थकों को पार्टी में किनारे लगाया जा रहा है? राहुल गांधी के विरोध के बाद भी आखिर सोनिया गांधी ने क्यों कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनना स्वीकार कर लिया? क्या राहुल गांधी और सोनिया गांधी के समर्थकों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर घमासान मचा हुआ है? क्या है इसके पीछे साजिश? कौन रच रहा है साजिश? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि मुबंई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने सोनिया गांधी के समर्थकों पर राहुल गांधी के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं हरियाणा में टिकट बंटवारे से नाराज हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर के समर्थकाें ने तो दस जनपथ स्थित साेनिया गांधी के घर के सामने ही प्रदर्शन कर डाला। दूसरी ओर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने यह कह रहा कांग्रेस में विवाद पैदा कर दिया कि'लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी के इस्तीफे से कांग्रेस का संकट बढ़ा है। राहुल गांधी के इस फैसले के कारण पार्टी हार के बाद जरूरी आत्मनिरीक्षण भी नहीं कर पाई। कांग्रेस पार्टी की हालत ऐसे स्तर पर पहुंच गई है कि न केवल आगामी विधानसभा चुनावों में बल्कि यह अपना भविष्य तक नहीं तय कर सकती है।'
बकौल खुर्शीद'हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारे नेता (राहुल गांधी) हमें छोड़ कर चले गए। कांग्रेस की जो स्थिति है, उसमें महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव जीतने की संभावना नहीं है। पार्टी संघर्ष के दौर से गुजर रही है और अपना भविष्य तक तय नहीं कर सकती।'कांग्रेस और राहुल गांधी की कार्यशैली को लेकर सलमान खुर्शीद का अपना दर्द है तो कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का अपना। लिहाजा सलमान खुर्शीद के बयान पर राशिद अल्वी ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई। बकौल राशिद अल्वी 'कांग्रेस के भीतर ही ऐसे नेता हैं, जो पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस नेता अलग राग अलाप रहे हैं,यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। घर को आग लग गई, घर के चिराग से। राहुल गलत नहीं थे,उन्हें कुछ नेताओं का समर्थन नहीं मिला,इसलिए राहुल ने इस्तीफा दे दिया।' दरअसल कांग्रेस के भीतर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की इस बयानबाजी ने सोनिया गांधी कांग्रेस बनाम राहुल गांधी कांग्रेस की स्थिति पैदा कर दी है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी भले एक दूसरे को लेकर चुप्पी साधे हो पर दोनों के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस नेता जैसे तेवर दिखा रहा है उससे साफ है कि कांग्रेस दो पाटो के बीच फंसी है। वैसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच आपसी मनमुटाव की खबरें राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के साथ ही आने लगी थी।
कांग्रेस के भीतर यह चर्चा आम है कि लोकसभा चुनाव 2019 में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से पहले अपनी मां सोनिया गांधी को विश्वास में नहीं लिया था। इस्तीफे को लेकर सोनिया गांधी ने राहुल से नाराजगी भी जताई थी और राहुल गांधी पर इस्तीफा वापस लेने का दबाव भी बनाया था लेकिन राहुल गांधी नहीं माने। राहुल नहीं माने तो इस बीच कांग्रेस के ही कुछ नेताओं ने अध्यक्ष पद के लिए प्रियंका गांधी का नाम उछालना शुरू कर दिया। लेकिन राहुल गांधी ने गांधी परिवार से बाहर का कांग्रेस अध्यक्ष होने का बयान देकर सोनिया गांधी और उनकी टीम के सामने मुश्किल खड़ी कर दी। राहुल गांधी चाहते थे कि कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का कोई बने, पर कांग्रेस सोनिया गांधी के करीबी माने जाने वाले पार्टी के बुजुर्ग नेताओं ने सोनिया गांधी को ही कार्यकारी अध्यक्ष बनने के लिए राजी कर सोनिया गांधी के जरिए ही राहुल गांधी की राजनीति को पलट दिया। राहुल के विरोध और इंकार के बाद भी सोनिया गांधी कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष बनने गईं। कार्यकारिणी अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी ने बीते अगस्त में कांग्रेस की बैठक बुलाई तो पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उस बैठक में शामिल नहीं हुए। यह पहला मौका था जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी किसी महत्वपूर्ण बैठक में साथ—साथ नहीं दिखे। महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए टिकट तय करने के लिए बुलाई गई बैठक से भी राहुल गांधी दूर रहे और जब उनके करीबी संजय निरूपम और अशोक तंवर जैसे नेताओं ने टिकट वितरण को लेकर सवाल उठाना शुरू किया और तो राहुल गांधी विदेश चले गए।
जाहिर तौर पर राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं कांग्रेस पार्टी के कोई साधारण नेता नहीं। इसलिए सोनिया गांधी का कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनना राहुल गांधी को भी रास नहीं आया। लिहाजा कांग्रेस की अहम बैठकों से राहुल गांधी की दूरी ने खुद पार्टी के भीतर कांग्रेस के शीर्ष स्तर पर मचे घमासान को लेकर सवाल करने का मौका दे दिया। वैसे पिछले एक साल में कांग्रेस के जिन दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस का साथ छोड़ा है अगर उनके नामों पर नजर डाले तो उनमें अधिकांश नाम वही है जो राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे। एक साल में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में अल्पेश ठाकोर, प्रियंका चतुर्वेदी,कृपाशंकर सिंह, उर्मिला मातोंडकर जैसे कई नाम हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में अशोक तंवर, संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा,देब बर्मन और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे चेहरों को तरजीह मिलती रही। लेकिन लोकसभा चुनाव की हार के बाद जैसे ही राहुल ने अध्यक्ष पद छोड़ा,इन करीबियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई। पंजाब कैबिनेट में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच कई मौकों पर खींचतान नजर आई। सिद्धू राहुल को अपना कैप्टन बताते रहे और कभी अमरिंदर सिंह को अपना लीडर स्वीकार नहीं कर पाए। संजय निरुपम के बयान ने कांग्रेस के भीतर सोनिया गांधी और राहुल की टीम के बीच के अंदरूनी गतिरोध को सार्वजनिक रूप से लाने का काम किया है। वहीं अशोक तंवर ने स्पष्ट तौर पर सोनिया गांधी की टीम के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि पार्टी ने राहुल गांधी के वफादारों को किनारे किया है। राहुल गांधी के एक ऐसे ही करीबी माने जाने वाले युवा नेता देब बर्मन से भी त्रिपुरा में कांग्रेस की कमान छिन चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर देब बर्मन ने कहा भी था कि कांग्रेस में भ्रष्ट लोगों की एंट्री हो चुकी है यानी लोकसभा चुनाव की हार के बाद राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ना उनके कई करीबी नेताओं पर भारी पड़ा है। यही वजह है कि सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते किनारे किए जा रहे राहुल के करीबी भी खुलकर ये मुद्दा उठा रहे हैं और सोनिया गांधी को अपने करीबियों से बचने की नसीहत दे रहे हैं।
कांग्रेस में जहां शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर खींचतान मची हुई है वहीं उसका असर चुनाव व राज्यों में संगठन स्तर पर भी साफ नजर आ रहा है। इसका उदाहरण हरियाणा और महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव है जहां कांग्रेस आपस में ही लड़ी रही है। हरियाणा में कांग्रेस की अंतर्कलह साेनिया गांधी के दरवाजे तक पहुंच गई है। हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशाेक तंवर ने पार्टी के टिकट पांच कराेड़ रुपए में बेचने का आरोप लगाया तो उनके समर्थकाें ने 10 जनपथ स्थित साेनिया के घर के सामने प्रदर्शन कर डाला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए तंवर ने आराेप लगाया कि सोहना विधानसभा के लिए पार्टी का टिकट पांच कराेड़ रुपए में बेचा गया है। टिकटों के बंटवारे में अनदेखी के चलते पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने अपने समर्थकों को दिल्ली बुलाकर नारेबाजी करवाई। बाद में तंवर ने कांग्रेस से ही इस्तीफा दे दिया।अशोक तंवर ने कहा है कि वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि कांग्रेस हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में पांच से अधिक सीटें न जीत पाए।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे से नाराज मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने पार्टी में बगावत का बिगुल फूंक दिया। बकौल संजय निरुपम,'सोनिया गांधी को अपने दरबारियों से मुक्ति पानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वो सोनिया गांधी के खिलाफ नहीं है, लेकिन निरुपम ने राहुल गांधी से वनवास खत्म कर पार्टी की कमान संभालने की भी अपील की। राजनीतिक भंगिमाओं में उन्होंने यह साफ़ संकेत दिया कि पार्टी में राहुल गांधी से जुड़े लोगों को पार्टी से अलग-थलग किया जा रहा है। उन्होंने कहा 'दिल्ली में बैठे लोगों में समझ की कमी है। कांग्रेस पार्टी ने योग्य व्यक्तियों के साथ न्याय नहीं किया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े लोग उनके खिलाफ षडयंत्र रच रहे हैं।'
दिलचस्प यह भी है कि महाराष्ट्र में निरुपम जैसे बड़े नेता की दहलीज से बगावत के सुर उठते ही राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री, सोनिया खेमे के विश्वस्त सुशील कुमार शिंदे ने निरुपम को आड़े हाथों लिया।
हरियाणा और महाराष्ट्र में टिकट बंटवारे के साथ उभरी आंतरिक कलह से साफ है कि कांग्रेस राहुल गांधी के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही सोनिया गांधी के लिए दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतने से ज्यादा पार्टी को बचाना चुनौती बन गया है। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद कांग्रेस का कार्यकर्ता पहले से ही पस्त है और ऐसे में पार्टी में शीर्ष स्तर पर मचे आंतरिक घमासान ने कांग्रेस को सोनिया गांधी कांग्रेस बनाम राहुल गांधी कांग्रेस के दो पाटों के बीच ला खडा किया है। लिहाजा कभी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक अदिति सिंह पार्टी से अलग लाइन पर चलती नजर आती है तो कभी कोई और।