राफेल यानी तूफ़ान, जिसके आगे नहीं टिक सकेगा दुश्मन
   दिनांक 16-अक्तूबर-2019
चीन-पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती, भविष्य की सर्जिकल स्ट्राइक्स, हिंद महासागर में चीन का नौसैनिक घेरा, कारगिल-सियाचिन से लेकर डोकलाम और अरुणाचल तक, राफेल हर चुनौती का उत्तर देने में सक्षम है. भारतीय वायुसेना का यह नया बाज धरती, आसमान और समुद्र, हर जगह झपट्टा मारने की ताकत रखता है. फिलहाल चीन के पास भी इसका जवाब नहीं है.

 
राफेल का अर्थ होता है तूफान. भारत सीमाओं पर राफेल गरजे उसके पहले ही सीमा पार उसका कंपन महसूस जा सकता है. राफेल के आने के भारत और उसके विरोधियों दोनों के लिए गहरे मायने हैं. भारत की रक्षा ज़रूरतें बड़ी और विविधतापूर्ण हैं. उत्तर में चीन, पश्चिम में पाकिस्तान और तीन तरफ से घेरता समुद्र यानी अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी. भारत द्वारा पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद पर की जा रही सर्जरी और सागर की ओर से बढ़ रहीं सुरक्षा और सामरिक चुनौतियाँ भारत की रक्षा तैयारियों में नए आयाम जोडती हैं. इन सबके मद्देनजर राफेल एक बड़ी छलांग है. इन्हें हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हाशीमारा में तैनात किया जाएगा जहाँ से ये चीन और पाकिस्तान के मोर्चों पर नज़र रखेंगे.
राफेल का इस्तेमाल हर मौसम और हर जगह किया जा सकता है. पलक झपकते ही यह 60 हजार फुट की ऊंचाई पर होता है. भारतीय वायु सेना के मिराज़ और जगुआर विमानों के साथ मिलकर यह हमारी घातकता को कई गुना बढ़ा देगा. दो दशकों से भारत के लिए खतरा बने हुए पाकिस्तान के f16 और चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों से यह बेहतर है. इस पर लगी मीटिऑर और स्कैल्प मिसाइलों के काट चीन के भी पास नहीं है. भारत की ज़रूरतों के हिसाब से इसमें 13 तरह के परिवर्तन किए गए हैं. मई 2020 में यह भारत के आकाश में उड़ान भरने लगेगा. इतना समय क्यों? क्योंकि भारत आने के पहले हर राफेल को पंद्रह सौ घंटों की उड़ान परीक्षा से गुजरना होगा जिसमें उसमें भारत की आवश्यकताओं के अनुसार किए गए परिष्करण को परखा जाएगा.
अगर अभिनंदन राफेल पर सवार होते....
इनमें से एक परिष्करण है दुश्मन को हमारे सिग्नलों को बाधित करने से रोकना. जब पायलट किसी अभियान पर (या सामान्य उड़ान पर भी) होता है तो एयरबेस पर मौजूद कंट्रोल रूम से उसे लगातार निर्देश मिल रहे होती हैं. इन संदेशों को दुश्मन बाधित करके आपके अभियान को प्रभावित करने का प्रयास करता है. अभिनंदन के मामले में यही हुआ. जब अभिनंदन पुराने मिग-21 विमान को उड़ाते हुए पाकिस्तान के f16 लड़ाकू विमान का पीछा कर रहे थे तब उन्हें ग्राउंड स्टाफ से भेजे गए संदेश को पाकिस्तान ने रोक लिया. जिसकी परिणिति अभिनंदन के विमान के नष्ट होने और अभिनंदन के पकडे जाने के रूप में हुई. राफेल होता तो ऐसा नहीं होता. राफेल तो दुश्मन के रडार को भी जाम कर सकता है. इसमें लगे सेंसर विमान के नीचे धरती पर भी नज़र बनाए रखते हैं, और पायलट को बतलाते रहते हैं कि वो दुश्मन के जमीन के ऊपर उड़ रहा है या अपनी धरती पर.
राफेल में लगे उपकरण इसके पायलट को स्क्रीन पर 360 डिग्री का दृश्य दिखाते हैं, यानी चारों तरफ देखती आंख, जो विमान की तरफ किस दिशा से क्या आ रहा है, यह लगातार देखती रहती है. इन विमानों की एक और खासियत है, इनकी जासूसी की क्षमता. लड़ाकू विमानों की उड़ानें सिर्फ हमले करने के लिए नहीं होती बल्कि दुश्मन की टोह लेने ( रिकॉनिसंस) के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है. राफेल की आधुनिक तकनीक इसे इस काम के लिए बेहतरीन विमान बनाती है.
संख्या को मात करती फुर्ती
राफेल की कई खासियतों में से एक यह भी है कि दुश्मन पर हमला करके लौटकर आने के बाद इसे अगले हमले के लिए कुछ ही देर में तैयार किया जा सकता है. इससे इनकी उपयोगिता और वायुसेना की ताकत में कई गुना इजाफा हो जाता है. इसे इस तरह समझें कि यदि हमारे किसी एयरबेस पर 10 राफेल विमान तैनात हैं. और पाकिस्तान के किसी निकट के एयरबेस पर भे उनके दस विमान तैनात हैं. अब यदि ये दस पाकिस्तानी विमान 24 घंटे में तीन बार उड़ान भरते हैं, और उनके मुकाबले हमारे दस राफेल 24 घंटे में पांच बार उड़ान भर सकते हैं, तो संख्या बराबर होते हुए भी हमारी ताकत पाकिस्तान से काफी ज्यादा हो जाती है. फिलहाल चीन के पास हमसे ज्यादा लड़ाकू विमान हैं. ऐसे में राफेल की ये क्षमता इस असंतुलन को साधने में मदद करेगी.
क्लोज एयर सपोर्ट
जब कभी जमीन पर दुश्मन और हमारी सेनाएं आमने सामने हो, या टैंक युद्ध चल रहा हो, उस समय वायुसेना अपने देश की सेना या टैंक यूनिट की मदद करने के लिए दुश्मन पर हमले करती है. इसे क्लोज एयर सपोर्ट कहते हैं. ये बड़ा करीबी मामला होता है क्योंकि ज़रा सी चूक, सिर्फ एक सेकंड की चूक से दुश्मन की जगह अपने जवान या टैंक चपेट में आ सकते हैं. राफेल की खूबियां क्लोज एयर सपोर्ट अभियानों को अपनी सेना के लिए ज्यादा सुरक्षित बनाती हैं. फिलहाल हमारी 26 वीं स्कवाड्रन क्लोज एयर सपोर्ट की भूमिका निभाती है, जिसमें सुखोई और मिग-21 विमान तैनात हैं.
आकाश पर मालकियत
वायु सुरक्षा की भाषा में वायुसेना की क्षमता के तीन प्रतिमान होते हैं. पहला है समता याने एयर पैरिटी. अर्थात अपनी वायुसेना का अपने देश अपने नियंत्रण की जमीन के आकाश पर नियंत्रण होना. इससे बड़ी उपलब्धि होती है, श्रेष्ठता यानी एयर सुपीरिऑरिटी. अर्थात दुश्मन की जमीन पर, समुद्र या आकाश में प्रभावी हमला करने सक्षम होना, और दुश्मन की वायुसेना पर हावी हो जाना. तीसरी और सर्वोच्च उपलब्धि होती है प्रभुत्व याने एयर सुप्रीमसी, जिसमें आप दुश्मन के आकाश पर भी पूरा नियंत्रण रखते हैं, और दुश्मन के वायुसेना को पंगु या निष्क्रिय बना देते हैं. राफेल भारत की वायुसेना को यही प्रभुत्व या एयर सुप्रीमसी प्रदान करने की क्षमता रखता है.
डायनामिक टारगेटिंग
युद्ध के समय ये तय नहीं होता कि अगला खतरा क्या होगा और किस ओर से होगा. आधुनिक हवाई युद्ध में ये बात और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है. और जब पायलट इन खतरों से उलझ रहा होता है तो वह अपने अभियान या लक्ष्य से न भटके यह भी अतिआवश्यक होता है. ऐसे समय यदि विमान की तकनीक त्वरित खतरों और चुनौतियों को भाँपकर पायलट को विकल्प चुनने में मदद करे, पहले से मौजूद जानकारियों का विश्लेषण करके स्क्रीन पर दिखाए तो पायलट पर से बहुत सा दबाव हट जाता है. राफेल यही डायनामिक टारगेटिंग प्रदान करता है.
अगर अब बालाकोट एयर स्ट्राइक हुई तो.....
राफेल के हवा से जमीन पर सटीक मार करने की क्षमता है. इसे एयर टू ग्राउंड प्रिसीजन स्ट्राइक कहते हैं. यह क्षमता होती है विमान से दागे गए गाईडेड बम या मिसाइल का लक्ष्य पर अचूक निशाना लगाना, ताकि लक्ष्य पूरी तरह ध्वस्त हो, और लक्ष्य के आसपास मौजूद आबादी का नुकसान न हो. राफेल के अंदर यह क्षमता है कि यह अपने आसमान से दुश्मन के इलाके में 600-700 किलोमीटर अंदर किसी आतंकी कैम्प या अन्य लक्ष्य को तबाह कर सकता है. हवा से जमीन पर मार करने के लिए इसमें बेहद घातक स्कैल्प मिसाइल लगी है जो दुश्मन के इलाके में सैकड़ों किलोमीटर अंदर तक मार कर सकती है
इसी क्षमता की बात प्रधानमंत्री मोदी कर रहे थे जब उन्होंने कहा था कि यदि बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय हमारी वायुसेना के पास राफेल होता तो हमारे विमानों को पाकिस्तान के अंदर प्रवेश करने की भी ज़रूरत नहीं होती. हमारे विमान उड़ान भरते और पाकिस्तान की सीमा के पास जाकर मिसाइल दागकर दो-तीन मिनिट में लौट आते. . इसके अलावा यह अलग अलग प्रकार के विस्फोटकों से लैस लेज़र नियंत्रित बम और परंपरागत बम भी शत्रु पर गिरा सकता है. इसकी तोप एक मिनिट में ढाई हजार गोलियां दाग सकती है.
आमने-सामने की जंग का जंगबाज़
राफेल 2222 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ सकता है. 50 हजार किलोमीटर की ऊँचाई तक जा सकता है, और साढ़े नौ हजार किलो विस्फोटक ले जा सकता है. विस्फोटकों की ये बहुत बड़ी मात्रा है. यह परमाणु बम दाग सकता है. दुश्मन के लड़ाकू विमानों का सामना करने के लिए इसमें घातक गन और मिसाइलें लगी हैं. ये मिसाइलें दुश्मन विमान पर निकट और बहुत दूर से हमला कर सकती हैं. हवा से हवा में मार करने एमआईसीए मिसाइल 80 किलोमीटर दूरी से लेकर 500 मीटर जितनी कम दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमानों पर निशाना साध सकती है. इसी श्रेणी की मीटिऑर मिसाइल ध्वनि से 4 गुना रफ़्तार से आसमान में 150 किलोमीटर दूर तक निशाना लगा सकती है. तूफानी उड़ान के दौरान इसके विशेष डैने, डेल्टा विंग इसे स्थिरता और संतुलन देते हैं. जब दुश्मन विमानों से आमने–सामने की लड़ाई होती है, तो उस समय थ्रोटल ईंधन आपूर्ति बढ़ा देता है, क्योंकि तब विमान को अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है. राफेल का थ्रोटल तीन सेकंड से कम समय में सामान्य उड़ान से डॉग फाइट (आमने सामने की लड़ाई) मुद्रा में आ सकता है.
चीनी घेरे पर झपटने वाला बाज़ 
ये धरती, आकाश और समुद्र कहीं पर भी अपने लक्ष्य को ढूँढ कर उस पर निशाना लगा सकता है. इसकी ये क्षमता हिंद महासागर पर बढ़ते चीनी दबदबे को ख़त्म करने में मदगार साबित होगी. दशकों पहले से चीन ने हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक मौजूदगी दर्ज करवानी शुरू की. उसने बंग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और पाकिस्तान के नौसैनिक बंदरगाहों के विकास में भागीदारी करके वहाँ अपने जहाज़ों को भेजना शुरू किया. कभी समुद्र अन्वेषण तो कभी अपने जहाज़ों की सुरक्षा के नाम पर चीनी नौसैनिक जहाज हिंद सागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मँडराते रहते हैं. ये भारत और चीन समेत दुनिया के बहुत से देशों का व्यापार और तेल मार्ग है. चीन ने इस समुद्री मार्ग पर अपनी धौंस बढाई और खुद के लिए पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को रेल और सड़क मार्ग द्वारा अपनी मुख्य भूमि से जोड़ने की विशाल महत्वाकांक्षी परियोजना सीपैक प्रारंभ कर दी. इससे दुनिया चिंतित हुई. भारत के हिट भी दाँव पर लगे. भारत ने ईरान से उसके चाबहार बंदरगाह का समझौता कर, तथा हिंद महासागर के अनेक द्वीपों पर अपनी जलसेना और नभसेना को मजबूत करके चीन को जवाब दिया. राफेल की समुद्र में हमला करने की ताकत और लंबी उड़ान भरने की क्षमता अरब प्रायद्वीप से लेकर दक्षिण पूर्वी एशिया के मलक्का बायपास तक भारतीय जल सुरक्षा को निरापद करेगी.
एफ -16 की पाकिस्तानी इतराहट की हवा निकली
पाकिस्तान के पास अमेरिका से खरीदा गया चौथी पीढ़ी का एफ-16 लड़ाकू विमान है. ये विमान दो दशकों से भारत की वायुसेना की चिंता का विषय बने हुए थे. पर अब राफेल ने आकर पाकिस्तान को बदहवास कर दिया है. राफेल, एफ-16 से बड़ा, एक पीढ़ी आगे और ज्यादा ताकतवर है. एफ-16 13 टन वजन उठाकर उड़ सकता है जबकि राफेल 24.5 टन वजन ले जा सकता है. याने राफेल की विस्फोटक ले जाने की क्षमता दोगुनी है. एफ-16 पंद्रह हजार मीटर प्रति मिनिट की रफ़्तार से ऊपर उठ सकता है, तो राफेल 18 हजार मीटर प्रति मिनिट की रफ़्तार से. आमने सामने की लड़ाई में यह गति बहुत मायने रखती है. एफ-16 की ईंधन क्षमता साढ़े चार टन है, तो राफेल की साढ़े ग्यारह टन से अधिक. राफेल की मिसाइलें एफ-16 से बेहतर हैं. राफेल का रडार एक साथ 40 लक्ष्यों की पहचान कर सकता है. बहुत बारीकी से निशाना लगा सकता है. इसका कैमरा 10 सेंटीमीटर की वस्तु के भी तस्वीर ले सकता है. इस पर लगा हुआ स्पेक्ट्रा नामक सिस्टम पास आती दुश्मन की मिसाइल को उसके रडार सिग्न पर नियंत्रण करके उसे बहका सकता है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत के एक राफेल से निपटने के लिए पाकिस्तान को दो एफ-16 लगाने होंगे.
रूस के साथ हुए एस-400 मिसाइल सुरक्षा तंत्र के सौदे ने भारत की सुरक्षा को काफी मजबूत किया है. एस-400 और राफेल की जोड़ी भारत के रक्षा क्षेत्र को नया आसमान दे रही है.