विश्व कल्याण के लिए चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ
   दिनांक 21-अक्तूबर-2019
एक सत्र को संबोधित करते श्री मोहनराव  मोहनराव भागवत
 
एक सत्र में हरिद्वार के पूज्य संत रूपेंद्रानाथ, दिल्ली से पूज्य सुधांशु जी महाराज भी महायज्ञ में उपस्थित रहे। इस अनुष्ठान के अलग-अलग दिन के लिए अलग-अलग यजमान थे। 
 
गत 9-14 अक्तूबर तक नई दिल्ली स्थित बिरला मंदिर में चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ का आयोजन किया गया। इसका आयोजन विश्व हिन्दू परिषद के तत्वावधान में अशोक सिंहल फाउंडेशन व झंडेवाला देवी मंदिर ने किया था। यह अनुष्ठान दक्षिण के प्रख्यात संत रामानुजाचार्य पूज्य चिन्ना जीयर स्वामी जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। उनके साथ 50 से अधिक वैदिक विद्वान भी थे। छह दिवसीय इस अनुष्ठान में विद्वानों द्वारा ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्वेद के लगभग 29,000 से अधिक मंत्रों का उच्चारण किया गया।
 
अनुष्ठान के तीसरे दिन यजमान के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत पधारे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतवर्ष के सभी लोगों के नित्य जीवन का वेदों से संबंध है। वेद में विज्ञान भी है और ज्ञान भी। वेदों का ज्ञान अपने अंदर की खोज करता है। समाज को उन्नत धर्म करता है और धर्म का मूल वेद हैं। अध्यात्म विज्ञान का विरोधी नहीं हो सकता, क्योंकि अध्यात्म में विज्ञान से भी ज्यादा अनुभूति है। हमारे यहां अध्यात्म और विज्ञान दोनों का विचार पहले से हुआ है। वेदों में ये दोनों बातें हैं, इसलिए वेदों का महत्व ज्यादा है।

 
कार्यक्रम को संबोधित करते (मध्य में) पूज्य चिन्ना जीयर स्वामी जी। साथ में, (बाएं से)
श्री स्वामी राघवानंद जी महाराज एवं महंत नवल किशोर दास जी महाराज (सबसे दाएं)
 
 
उन्होंने कहा कि जो भौतिक ज्ञान आज की दुनिया को प्राप्त है, उसको संभालने के लिए जो आंतरिक ज्ञान चाहिए, जिसके अभाव में युद्ध हो रहे हैं, जिसके अभाव में विनाश और पर्यावरण की हानि हो रही है। उस ज्ञान को पूर्णत: देने वाला वेद ज्ञान हमको फिर अपने परिश्रम से पुनर्जीवित करना पड़ेगा। यज्ञ में उपस्थित महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने महायज्ञ के उद्देश्य पर कहा कि ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के कारण विश्व में प्रकृति के प्रति प्रतिकूलता बढ़ रही है। ऐसे में हम मानते हैं कि यज्ञ के माध्यम से धरती, अंबर, अग्नि, जल, वायु, निहारिका, नक्षत्रों का संतुलन बनेगा और प्राणियों में सद्भावना आएगी। यज्ञ से उन्माद शिथिल होता है, उत्तेजना शिथिल होती है। यज्ञ से जिस वातावरण का निर्माण होता है उससे एक ऐसा हार्मोन-विकसित होता है, जो व्यक्ति को सहज, स्वाभाविक, नैसर्गिक, प्राकृतिक और संयमित रखता है। यज्ञ से पाचक रस सहज बनते हैं। साथ ही यह भी परिणाम देखे गए हैं कि समूची प्रकृति में एकता आ जाती है, एकरूपता आ जाती है। यज्ञ सब के कल्याण की चीज है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:,’ का संदेश है सबका आनन्द हो, सबके स्वाभिमान, सम्मान की रक्षा हो। एक दिन यज्ञ में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह भी पधारे और उन्होंने अपने विचार भी रखे।
 
एक सत्र में विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति के सदस्य श्री दिनेश चन्द्र ने कहा कि विश्व के कल्याण के लिए यह यज्ञ है। वेद के विषय में अनेक भ्रांतियां फैलाई गई हैं, जैसे-‘महिलाएं वेद पढ़-सुन नहीं सकतीं’, ‘कोई विशेष वर्ग नहीं सुन सकता’। ये बातें सच नहीं हैं। यजुर्वेद के 26वें मंडल के दूसरे अध्याय में बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वेदों का श्रवण, अध्ययन और पाठन ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, नारी, सेवक कोई भी कर सकता हैै।

 
 
महायज्ञ में उपस्थित (बाएं से) स्वामी श्री अवधेशानंद जी , स्वामी श्री गुरुशरणानंद जी महाराज एवं अन्य संत
वेदों के बारे में फैले भ्रम इत्यादि दूर हों, इसलिए दिल्ली में ऐसा महायज्ञ पहली बार हो रहा है। अशोक सिंहल फाउंडेशन के प्रमुख श्री महेश भागचंदका ने कहा कि श्री अशोक सिंहल जी की अंतिम इच्छा थी कि वेदों को घर-घर तक पहुंचाना है। विश्व शांति के लिए वेदों को सुनना-पढ़ना चाहिए। युवा पीढ़ी को वेदों की जानकारी हो, इसके लिए विश्व स्तर का चारों वेदों का स्वाहाकार दिल्ली में किया जाए। उनके रहते 2015 में यह योजना बनी थी, लेकिन कार्यक्रम से चार दिन पहले उनका शरीर शांत हो गया था। तब इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया था। अब चार वर्ष बाद हमने इस कार्यक्रम को करके उनकी इच्छा को पूर्ण किया है। एक सत्र में हरिद्वार के पूज्य संत रूपेंद्रानाथ, दिल्ली से पूज्य सुधांशु जी महाराज भी महायज्ञ में उपस्थित रहे। इस अनुष्ठान के अलग-अलग दिन के लिए अलग-अलग यजमान थे।
 
यजमान के रूप में राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी, सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रह्मणयम स्वामी, विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री आलोक कुमार सहित अनेक वरिष्ठ जन पधारे। ल्ल प्रतिनिधि