कश्मीर में मीडिया के लिए सुरक्षा और सुविधा की मांग
   दिनांक 21-अक्तूबर-2019

 
 
श्री चंद्रमौलि कुमार प्रसाद को रिपोर्ट सौंपते (बाएं से) एनयूजेआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी, दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री अनुराग पुनेठा, पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर, एनयूजे-आई के राष्ट्रीय महासचिव, श्री मनोज वर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राकेश आर्य एवं दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्री आलोक गोस्वामी।
कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद अखबारों में भी आम कश्मीरियों के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास व मौलिक ढांचे से जुड़े मुद्दों पर लेख और समाचार नजर आ रहे हैं। करीब तीन दशक में पहली बार आम कश्मीरी के मुद्दे समाचार पत्रों में प्रमुखता पा रहे हैं। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कश्मीर घाटी में मीडिया के एक बड़े वर्ग की संपादकीय नीतियां और भूमिका निरंतर सवालों के घेरे में रही हैं। इसकी वजह वे परिस्थितियां रही हैं जो आतंकवादियों, अलगाववादियों और पाकिस्तानी मीडिया के चलते पैदा हुर्इं। पूर्व तथा हाल में प्रकाशित खबरों तथा इनकी पड़ताल के आधार पर यह बात भी उभर कर सामने आ रही है कि आतंकवादियों, अलगाववादियों और पाकिस्तानी मीडिया ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर, पत्रकारिता और पत्रकारों के नाम पर कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद और भारत विरोधी तथ्यों को हवा देने का काम किया। फर्जी खबरें और सोशल मीडिया को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर ऐसे तत्वों ने भारत की एकता-अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया। ये तथ्य नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया (एनयूजे-आई) के तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट ‘कश्मीर का मीडिया-तथ्यों के आइने में’ से उभर कर सामने आए हैं। पिछले दिनों कश्मीर से लौटे एनयूजे-आई के प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस काउंसिल आॅफ इंडिया के अध्यक्ष चंद्रमौलि कुमार प्रसाद को तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट सौंपी और मांग की कि कश्मीर में पत्रकारों को श्रीनगर में पत्रकारिता करने के लिए पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए। भारत के अन्य शहरों से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों, मीडिया संस्थाओं को श्रीनगर में कार्यालय खोलने के लिए सुरक्षा व सुविधा प्रदान की जाए।  प्रतिनिधि