कमलेश तिवारी की हत्या पर सेकुलर चुप्पी!
   दिनांक 21-अक्तूबर-2019
फेक नरैटिव बनाने के लिए बात—बात पर पत्र लिखने वाले वामपंथी समूह की कमलेश तिवारी की हत्या पर चुप्पी कचोटने वाली और उनकी मंशा पर सवाल उठाने वाली है। आखिर उनका डर इतना एक पक्षीय क्यों है ?

चार साल पहले इस देश में जिन अभिनेताओं को डर लगता था, यहां के हालात से इतने चिंतित हो गए थे कि उनके मन में देश छोड़ने का भी ख्याल आने लगा था। यह संयोग ही था कि चार साल बाद बीते 19 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास पर पीएम के आतिथ्य से लौटकर खान बंधुओं ने जब ट्वीट किया। उस वक्त युवा हिन्दू नेता कमलेश तिवारी को 'हलाल' किए जाने के चौबीस घंटे भी पूरे नहीं हुए थे। संभव है अखलाक का नाम जानने वाले लोग कमलेश तिवारी को नहीं जानते हों। कमलेश तिवारी का परिचय बताने से पहले आप 2015 में दिए गए आमिर और शाहरूख के बयान को पढ़िए।
नवम्बर 2015 की बात है, फिल्म अभिनेता आमिर खान ने पत्रकारिता के लिए दिए जाने वाले रामनाथ गोयनका पुरस्कार के वितरण कार्यक्रम में कहा था— कई घटनाओं ने उन्हें ‘चिंतित' कर दिया है और उनकी पत्नी किरण राव ने उन्हें सुझाव दिया है कि संभवत: उन्हें अब यह देश छोड़ देना चाहिए।
वास्तव में यह बयान उस डर के माहौल की अभिव्यक्ति के समर्थन में था, जिसके नाम पर देश भर के वामपंथी— छद्म धर्म निरपेक्ष अपना पुरस्कार लौटा रहे थे। इसी दौरान शाहरूख खान का बयान आया। जो आमिर के बयान के समर्थन में था। शाहरूख ने कहा था— ‘'मुझे लगता है कि असहिष्णुता बढ़ रही है।'' खान ने यह भी कह दिया— ''असहिष्णु होना मूर्खता है और यह सिर्फ एक मुद्दा नहीं बल्कि सबसे बड़ा मुद्दा है।''
आमिर—शाहरूख के बयान के तीन साल के बाद 2018 में नसीरूद्दीन शाह का बयान आया— नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उन्हें आज के भारत में डर लगता है। उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर में भड़की हिंसा की तरफ इशारा करते हुए शाह ने कहा, "हम पहले ही देख चुके हैं कि एक गाय की जान की कीमत एक पुलिस वाले की जान से ज़्यादा है।" इन दोनों ही बयानों को इस तरह वामपंथी पत्रकारों द्वारा पेश किया गया जैसे यह देश अब मुसलमानों के रहने के लिए सही जगह नहीं रही। जबकि आमिर, शाहरूख और नसीरूद्दीन के पास भारत से अलग होकर देश बने बांग्लादेश और पाकिस्तान का उदाहरण था। जहां से उत्पीड़न से तंग आकर अपनी इज्जत और जान बचाकर भारत की तरफ पलायन करने वाली हजारों की महिलाओं चीत्कार वे सुन नहीं पाए। हिन्दू महिलाओं पर पाकिस्तान और बंगलादेश में हो रहे अत्याचार की खबर सुनकर भी इसमें भारतीय मुसलमानों का क्या कसूर की सोच, वास्तव में हिन्दुओं की सहिष्णुता की बार—बार गवाही देती है।
इसके बावजूद भारत में बार—बार हिन्दू समाज की सहिष्णुता को परखा गया। उसकी परीक्षा ली गई। मकबूल फिदा हुसैन ने हिन्दू देवी—देवताओं को नग्न चित्रित किया और उनके इस कुत्सित मानसिकता से उपजी चित्रकारी को अभिव्यक्ति की आजादी की श्रेणी में रखकर देश भर के प्रगतिशील—धर्मनिरपेक्षता की लबादे में छुपे वामपंथी गिरोह ने प्रमोट किया। इससे अधिक असहिष्णुता क्या होगी कि कोई देवी सरस्वती को नग्न चित्रित करे, जिसे करोड़ों भारतीय मां कहते हैं। उसके बाद भी भारत हिन्दू समाज न्यायालय की शरण में जाए। वहां न्याय की मांग करे। क्योंकि भारतीय हिन्दू बाबा साहब के संविधान में विश्वास करता है।
वैसे मकबूल फिदा हुसैन ने अपनी मां की भी एक पेंटिंग बनाई थी। जो काफी चर्चित हुई। अपनी नग्न तस्वीरों के लिए चर्चित रहने वाले मकबूल अपनी मां की तस्वीर नग्न नहीं बना पाए। फिर उन्हें वामपंथ के किस कार्यशाला में करोड़ों भारतीयों की मां देवी सरस्वती को नग्न चित्रित करने की प्रेरणा मिली ? क्या उस कार्यशाला में यह नहीं बताया गया उन्हें कि यही असहिष्णुता है।
जैसा मकबूल ने भारतीय हिन्दू समाज के साथ किया, कुछ—कुछ वैसा ही 'शार्ली हेब्दो' नाम की पत्रिका ने फरवरी 2006 में मुस्लिम समाज के साथ कर दिया। पत्रिका ने पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छाप दिया। इस पत्रिकार में जो कार्टून इस्तेमाल किया वह मूल रूप से डेनिश अखबार जेलैंड्स पोस्ट में पहले से छपा था। जिसे उसने फिर से इस्तेमाल किया। 7 जनवरी 2015 को एके 47 से लैस दो बंदूकधारियों ने इस्लाम समर्थक नारे लगाते हुए फ्रांसीसी पत्रिका 'शार्ली हेब्दो' के दफ्तर पर धावा बोला और 12 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी। हत्यारे घटना को अंजाम देकर निकलते वक्त जोर-जोर से कहते हुए निकले, "हमने पैगंबर का बदला ले लिया है।" इसके अलावा उन्होंने "अल्लाहु अकबर" के नारे लगाए। याद नहीं दुनिया भर में बढ़ रही इस इस्लामिक असहिष्णुता के खिलाफ किसी शबनम हाशमी, किसी शबाना आजमी, किसी अरूंधति राय, किसी मौलाना—मुफ्ती ने दो शब्द कहे हो। शांति के मजहब इस्लाम का पूरा इतिहास ही कत्ल और नरसंहार से भरा हुआ है। क्या कभी किसी मौलाना, मुफ्ती, या फिर वामपंथी जमात के लोगों ने ऐसे हत्यारों के लिए — जो इस्लाम के नाम पर दहशत फैला रहे हैं, अभिव्यक्ति का गला घोट रहे हैं — लानत भेजी। कोई फतवा जारी किया।
बात कमलेश तिवारी की करें। कमलेश ने एक बयान दिया मोहम्मद साहेब को लेकर। इस बात से इंकार नहीं कि वह बयान भारत में रहने वाले करोड़ों मुसलमानों को आहत करने वाला था। इसलिए कमलेश ने जेल में रहकर सजा काटी। उन पर रासुका लगा। वह जेल से लौटकर आए थे। लेकिन क्या उन्होंने जो बयान दिया उसकी एवज में किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है ? किसी के लिखने का जवाब क्या हत्या हो सकता है? किसी के कहे का जवाब क्या हत्या हो सकता है? कहे का जवाब तो कहा ही हो सकता है। जैसे लिखे का जवाब लिखा। जब आप किसी कमलेश के मोहम्मद साहब पर दिए बयान को सुनकर उसकी हत्या करते हैं, इसका संदेश समाज में यही जाता है कि हत्यारे डरे हुए थे। उनका मजहबी विश्वास कमजोर है।
बात—बात पर पत्र लिखने वाले वामपंथी समूह की कमलेश तिवारी की हत्या पर चुप्पी कचोटने वाली है और पत्र लेखकों की मंशा पर सवाल उठाने वाली। उनका डर इतना एक पक्षीय क्यों है? एक लंबी श्रृंखला है, ऐसे मौकों की जब भारतीय समाज उन पत्र लेखकों की तरफ देख रहा था, जो असहिष्णुता, डर लगने जैसे जुमले अवसर विशेष पर बोला करते हैं। लेकिन जब पीड़ित हिन्दू हो तो वे खामोशी ओढ़ लेते हैं।
ऐसी घटनाओं की एक लम्बी श्रृंखला है। जो घटती है इसी देश में लेकिन कहीं दर्ज नहीं होती। कोई ऐसी घटनाओं पर अपना पुरस्कार नहीं लौटाता। कोई ऐसी घटनाओं से आहत होकर प्रधानमंत्री को चिट्ठी नहीं लिखता।

आइए जानते हैं, ऐसी ही एक पक्षीय घटनाओं के संबंध में। जहां सेकुलर—वामपंथी जमात ने बेशर्म खामोशी ओढ़ ली और ना कोई चिट्ठी लिखी ना उन्हें इनमें कोई असहिष्णुता दिखी:-

मुस्लिम युवकों ने किया अनुसूचित जाति की बच्ची से गैंगरेप
घटना इसी साल 26 सितम्बर की है। उत्तर प्रदेश के कौशांबी में थाना सराय अकिल इलाके कुछ मुस्लिम युवकों ने नाबालिग अनुसूचित जाति की बच्ची के साथ गैंगरेप किया और उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सोचिए अगर ये घटना किसी हिंदू ने मुस्लिम बच्ची की साथ की होती तो सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेन्ड कर जाता और पूरे देश में असहिष्णुता का माहौल बना दिया जाता। इस घटना के मुख्य आरोपी मोहम्मद आदिल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना में एक अन्य आरोपी नाजिम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीसरा आरोपी अभी भी फरार है।
दिल्ली में ध्रुव त्यागी की हत्या
दिल्ली के मोती नगर के बसई दारापुर इलाके में इसी साल 21 मई को 51 साल के बिजनेसमैन ध्रुव त्यागी को मुसलमानों ने चाकुओं से गोद कर मार डाला। वे अपनी 27 साल की बेटी से छेड़छाड़ का विरोध कर रहे थे। इस घटना में अपने पिता को बचाने आया 19 साल का ध्रुव का बेटा अनमोल गंभीर रूप से घायल हो गया था।
विष्णु को मुस्लिम भीड़ ने जिन्दा जला दिया
15 मई, 2019 को यूपी के गोंडा में मामूली विवाद के बाद चार मुसलमानों ने विष्णु कुमार गोस्वामी नाम के युवक को पेट्रोल डालकर जला दिया, लेकिन कहीं से इसके विरोध में कोई आवाज सुनाई नहीं दी।
लस्सी के पैसे मांगे तो कर दी हत्या
18 मई, 2019 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में मुसलमानों की भीड़ ने एक हिंदू युवक को सरेआम पीट-पीट कर मार डाला। भारत यादव और पंकज यादव नाम को दो भाई मथुरा में लस्सी की दुकान चलाते थे। 18 मई को कुछ मुस्लिम आए और 15 गिलास लस्सी पी गए। जब भाइयों ने पैसे मांगे तो मुसलमानों ने अपने साथियों को बुलाया और दोनों को काफिर कहते हुए मारा-पीटा। पिटाई से भरत यादव की मौत हो गई। इतनी बड़ी घटना को मीडिया ने भी दबा दिया और धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वालों ने भी। समाजवादी पार्टी भी इस पूरे मामले में सिर्फ इसलिए खामोश रही क्योकि पीड़ित चाहे यादव थे लेकिन इस नृशंस हत्या को अंजाम देने वाले आरोपी मुसलमान थे।
नूरपुर में मुसलमानों ने किया सामूहिक बलात्कार
10 जून, 2019 को बिहार में बेगूसराय के नूरपुर गांव में 10 जून की रात को कुछ मुस्लिम युवकों ने एक अनुसूचित जाति की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। गांव छोड़ने की धमकी भी दी। लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए किसी ने आंदोलन नहीं चलाया।
मध्य प्रदेश के गुना में हुई थाने के अंदर पुलिस वालों की लिंचिंग
24 जून, 2019 को मध्य प्रदेश के गुना में अपहरण के आरोपी इमरान के परिजनों ने पुलिस स्टेशन पर हमला बोल दिया और पुलिसवालों को जान से मारने की धमकी दी।
08 साल की हिन्दू बच्ची का बलात्कारी शमशुद्दीन
23 जून, 2019 को बिहार के जमुई में शमशुद्दीन अंसारी नाम का शख्स एक 8 वर्षीय हिंदू बच्ची की रेप के बाद हत्या कर देता है, लेकिन इस घटना के खिलाफ किसी का मुंह नहीं खुलता है।
बजरंग दल के कार्यकर्ता की मुसलमानों ने की लिंचिंग
7 जून, 2019 को यूपी के शामली में मुसलमानों की भीड़ ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया। इतना ही नहीं जब पुलिस आरोपियों को पकड़ने गई तो पुलिस टीम पर भी पथराव किया गया।
नमाज की देरी का शिकार हुआ पेट्रोल पंप
8 जनवरी, 2019 को मुंबई के मलाड मुसलमानों की टोली ने एक पेट्रोल पंप पर तोड़फोड़ की और स्टाफ को मारा, क्योंकि पेट्रोल पंप पर लंबी लाइन की वजह से उन्हें नमाज के लिए देर हो रही थी।
 कन्वर्जन रोकने पर मार डाला गया
तमिलनाडु के तंजावुर के कुम्भकोणम में पीएमके पट्टाली मक्काल काछी नेता 42 वर्षीय रामालिंगम की हत्या इसी साल फरवरी में कर दी गई। इस घटना को अंजाम रामलिंगम के रात में घर लौटते वक़्त दिया गया। लौटते वक्त कुछ अज्ञात लोगों ने उसके हाथ काट दिए जिससे अत्यधिक रक्त स्त्राव से रामालिंगम की मृत्यु हुई। घटना की वजह थी, कन्वर्जन का विरोध।
होली पर सांप्रदायिक टकराव
जयप्रकाश नामक व्यक्ति द्वारा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में होली खेलते समय कुछ मुस्लिमों पर रंग पड़ जाने की वजह से सांप्रदायिक तनाव भड़क गया। घटना इसी वर्ष की है। इस मामले में साबिर अली और शाकिर अली को सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए गिरफ्तार किया गया।
चंदन गुप्ता की हत्या
पिछले साल उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद में चंदन गुप्ता की महज इसलिए हत्या कर दी गई थी कि क्योंकि वह 26 जनवरी को तिरंगा फहराने के लिए निकाले जा रहे जुलूस में शामिल था। वह भारत माता जय के नारे लगा रहा था। मुस्लिम बहुल इलाके से निकली तिरंगा यात्रा के दौरान कुछ मुसलमानों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। तिरंगा यात्रा निकाल रहे लोगों पर पथराव किया गया। इस दौरान मुसलमानों की तरफ से चलाई गई गोली से चंदन गुप्ता की मौत हो गई।
हिन्दू होने की वजह से जलाया गया
महाराष्ट्र के पंढरपुर में एक 17 साल के हिंदू लड़के सावन राठौड़ को सिर्फ हिंदू होने के कारण सरेआम जला दिया गया। मामले में फातिम नगर के इब्राहिम मेहबूब शेख, इमरान तांबोली और झुबेर तांबोली पर आरोप लगा, लेकिन 18 जनवरी 2016 को हुए इस लिंचिंग पर सेक्युलर जमात ने चुप्पी साध ली। लेकिन इसकी हकीकत एक मिनट और 19 सेकेंड के वीडियो से खुल गई जो मौत से पहले सावन राठौड़ ने पुलिस को बताई थी। एक मिनट और 19 सेकेंड के वीडियो में सावन कहता है, “मैं पंढरपुर में अपने परिवार के साथ काम कर रहा था। एक दिन जब मैं पाइप में रिसाव ठीक कर रहा था, तीन लोगों ने आपत्ति जताई और मुझसे मेरा नाम पूछा। मैंने कहा सावन राठौड़, उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं हिंदू हूं? मैंने कहा हां। फिर उन्होंने मुझे आग लगा दी।” वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाला व्यक्ति, सावन से पूछता है क्या उसे लगता है कि उसे जला दिया गया था क्योंकि वह एक हिंदू है? तो सावन ने सहमति में सिर हिला दिया और उसके बाद उसकी मौत हो गई। लेकिन सेक्युलर जमात को इसमें असहिष्णुता—लिंचिंग नहीं दिखी।
दिल्ली में हिंदू डेंटिस्ट की नृशंस हत्या
24 मार्च, 2016 को दिल्ली के विकासपुरी में एक डेंटिस्ट डॉ पंकज नारंग को 15 मुसलमानों की भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, इनमें से चार नाबालिग थे। सेकुलर गैंग इस लिंचिंग को सामान्य अपराध ठहराने में लग गया।
गाय चराने पर मुसलमानों ने 15 साल के बच्चे को मारी गोली
रामपुर में खेत में गाय चराने की मामूली घटना पर मुसलमानों ने मिलकर 15 साल के बच्चे की गोली मारकर हत्या कर दी, घर में आग लगा दी। सिर्फ इसलिए कि एक हिंदू ने मुसलमान के चारागाह में गाय चराई थी। इस घटना पर भी कोई सेक्युलर पैरोकार आगे नहीं आया, क्योंकि यहां भी एक हिंदू मारा गया था।
अंकित सक्सेना हत्याकांड
दिल्ली के ख्याला इलाके में एक फोटोग्राफर अंकित सक्सेना की कुछ मुस्लिमों ने मिलकर 2 फरवरी 2018 को हत्या कर दी। अंकित का कुसूर केवल इतना था कि वह एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता था। उस लड़की के परिवार वालों ने ही अंकित को बीच सड़क पर चाकुओं से गोदकर मार डाला।
शवयात्रा से मुस्लिमों को दिक्कत
तमिलनाडु स्थित थेनी ज़िले में पिछले साल 06 मई को एक अनुसूचित जाति की महिला की मृत्यु के बाद उनकी शवयात्रा से मुसलमानों को दिक्कत हो गई। इसके बाद हिंसा भड़क गई। मुस्लिमों का कहना था कि उनकी बस्ती से शवयात्रा क्यों निकाली? दलितों की वकालत करने वाले सेकुलर इस घटना पर चुप्पी साधे रहे।
मुस्लिम प्रेमिका के कारण मिली मौत
21 जुलाई 2018 राजस्थान के बाड़मेर में एक 22 वर्षीय हिंदू युवक को को हाथ-पांव बांध कर इतना पीटा गया कि वह मर गया। उसकी प्रेमिका मुस्लिम समुदाय से थी, इसी नाराज़गी के कारण मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। मृतक भील जाति से था और एक मुस्लिम परिवार के घर में काम करता था।
ऐसी घटनाएं अनगिनत है। यहां उनमें से कुछ घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है। जिससे असहिष्णुता का राग अलापने वाले समूह की सच्चाई समाज समझ सके। बहरहाल सवाल सिर्फ इतना है कि अभिव्यक्ति की आजादी समाज में क्या सिर्फ एक वर्ग विशेष के पास है। यदि कमलेश तिवारी जैसा कोई इसका इस्तेमाल करेगा तो इसी तरह दिन दहाड़े 'हलाल' कर दिया जाएगा? इस बात पर समाज को एक बार जरूर विचार करना चाहिए।