पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों पर बड़ी कार्रवाई कर सकती है सेना
   दिनांक 22-अक्तूबर-2019
नियंत्रण रेखा के पास आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ कराने के इरादे से बनाए गए कैंपों पर तोपखाने से भारी हमले के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है.

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी शिविरों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार के इरादे बिल्कुल साफ हैं. नियंत्रण रेखा के पास आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ कराने के इरादे से बनाए गए कैंपों पर तोपखाने से भारी हमले के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान की बौखलाहट वाजिब है. उसने बड़े अरमान से इन ठिकानों पर आतंकवादियों को जुटाया था, जो बदलते मौसम में बर्फबारी के बीच भारतीय सीमा में दाखिल कराए जाने थे. पाकिस्तान के दहशतगर्दी ढांचे को रविवार को हुए जोरदार हमले से काफी नुकसान पहुंचा है. पाकिस्तान की बौखलाहट के एक बड़ी वजह ये भी है कि पहले सर्जिकल स्ट्राइक, फिर बालाकोट पर एअर स्ट्राइक और अब आर्टिलरी स्ट्राइक के रूप में तीन तमाचे मुंह पर लग चुके हैं, लेकिन वह कुछ कर नहीं पा रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पास परमाणु हमले की खोखली धमकी के अलावा कोई हथियार नहीं बचा है.
बात सिर्फ रविवार को हुए आर्टिलरी हमले की नहीं है. सोमवार को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने इरादे बिल्कुल साफ कर दिए. मलिक ने कहा कि आतंकवादी कैंपों को तो हम बिल्कुल तबाह कर देंगे. और अगर जरूरत पड़ी, तो हम अंदर जाएंगे. आप समझ रहे हैं, अंदर जाने का मतलब. मायने ये कि सेना के पास नियंत्रण रेखा पार करने का भी विकल्प है. इस तरह की साफगोई से पहली बार भारत की ओर आला स्तर पर कहा गया है कि हम आतंकवाद के समूल नाश के लिए नियंत्रण रेखा पार कर सकते हैं. आपको याद होगा कि ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने भी कहा कि आतंकवाद पर हमले का निर्णायक वक्त आ गया है.
नियंत्रण रेखा पर हालात तनावपूर्ण हैं. पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ कराने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं. अफगानिस्तान से 60 से ज्यादा आतंकवादियों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लाया गया है. इसके अलावा हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद समेत कई आतंकवादी संगठनों के दहशतगर्द पाकिस्तान सेना की सरपरस्ती में भारत में घुसने की फिराक में हैं. अनुच्छेद 370 की समाप्ति और जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के फैसले के बाद से घाटी में जिस तरह से शांति है, वह पाकिस्तान के दुष्प्रचार अभियान को रास नहीं आ रही है. ये शांति पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे को पलीता लगा रही है. अगर कुछ दिन और यही हालात रहे, तो इमरान सरकार और पाकिस्तान सेना को अपनी ही आवाम को ये समझाना मुश्किल हो जाएगा कि 70 साल से कैसे वह अपने देश को कश्मीर के नाम पर मूर्ख बनाते रहे हैं. पाकिस्तान के पास भारत के खिलाफ इकलौता हथियार छाया युद्ध, यानी आतंकवादियों के कंधे पर रखकर बंदूक चलाना बचा है. सेना की चौकसी के कारण घुसपैठ बहुत मुश्किल हो चुकी है.
शनिवार से पाकिस्तान सेना ने घुसपैठ कराने की कोशिश शुरू की. टंगडार इलाके में सीज फायर का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तान सेना ने ताबड़तोड़ गोलाबारी की. इस इलाके के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी का फायदा उठाते हुए घुसपैठ कराने की कोशिश की गई. इस हमले में दो भारतीय जवान शहीद हुए. भारतीय सेना रविवार को इसका जवाब दिया. भारतीय तोपखाने ने बोफोर्स और धनुष तोपों के साथ राकेट दागे. ये हमला पूरी तरह योजनाबदध और पुख्ता इंटेलीजेंस सूचनाओं पर आधारित था. नीलम घाटी में पाकिस्तान सेना की सरपरस्ती में चल रहे चार लांचपैड इस गोलाबारी में तबाह हुए. थलसेना प्रमुख जनरल विपिन रावत के मुताबिक 6 से 10 पाकिस्तानी सैनिक और इतने ही आतंकवादी इस हमले में मारे गए. हालांकि सूत्रों का कहना है कि हमले में मारे जाने वाले आतंकवादियों की तादाद बीस से अधिक है. यह पहला मौका है, जब नियंत्रण रेखा से पच्चीस से तीस किलोमीटर के अंदर मौजूद आतंकवादी ठिकानों को तोपखाने की मदद से निशाना बनाया गया है.
जिस सटीक तरीके से गोलाबारी हुई है और जिस तरीके से कैंपों को ध्वस्त किया गया है, उस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि ये लेजर गाइडेड बम भी हो सकते हैं. भारत ने जिन इलाकों में आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया, उसमें जुरा, अथमुकम और कुंडलशाही शामिल हैं. इन सभी कैंपों में दस से पंद्रह आतंकवादी थे.
पाकिस्तान इस हमले से बुरी तरह बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल अब पाकिस्तान का चेहरा बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका दावा है कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों को उन जगहों का दौरा कराने के लिए तैयार हैं, जहां भारत आतंकवादी शिविर होने का दावा कर रहा है. पाकिस्तान ने ऐसा ही दावा बालाकोट में आतंकवादी कैंप पर हुए हवाई हमले के बाद किया था. लेकिन हकीकत में दो महीने बाद तक उस जगह पत्रकारों तो दूर, स्थानीय लोगों तक को जाने नहीं दिया गया. पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दावा किया किया पांच पाकिस्तानी नागरिक इस हमले में मारे गए. पाकिस्तान कैसे ये स्वीकार कर सकता है कि मारे गए आतंकवादी हैं. पाकिस्तान ने भारतीय राजदूत को बुलाकर इसका विरोध भी जताया है. वहीं सेना का कहना है कि पाकिस्तान सेना ने बिना उकसावे गोलाबारी की. आवश्यकता पड़ने पर इस तरह की जवाबी कार्रवाई की जाती रहेगी. भारतीय नेतृत्व के रुख से लगता है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकती है.