जादवपुर के शहरी नक्सली
   दिनांक 04-अक्तूबर-2019
 डॉ. अम्बा शंकर बाजपेयी
पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो पर हमला और उन्हें घंटों तक बंधक बनाकर वामपंथी ब्रिगेड ने एक बार फिर साबित किया कि सियासी तौर पर चाहे उनका उन्मूलन हो जाए, लेकिन वे अपनी चाल, चरित्र और चेहरा कभी नहीं बदलने वाले

 
 
केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ जादवपुर विवि. में धक्का-मुक्की करते वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ता
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जादवपुर इकाई ने 19 सितंबर, 2019 को 'फ्रेशर्स वेलकम' और 'स्वाधीनता के बाद प्रशासन एवं राजनीति' विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम दोपहर दो बजे से जादवपुर विश्वविद्यालय के के.पी. बसु मेमोरियल सभागार में होना था, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में गौरबंग विश्वविद्यालय के पूर्व उप-कुलपति प्रो. अचिंत्य बिस्वास, प्र्रख्यात फैशन डिजाइनर अग्निमित्र पॉल और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता दिलीप कुमार दुबे भी उपस्थित थे।
निर्धारित समय पर कार्यक्रम शुरू हुआ। बाबुल सुप्रियो करीब 2.50 बजे विवि. में पहुंचे और सुरक्षाकर्मियों को परिसर के बाहर छोड़कर अकेले सभागार की ओर जाने लगे। तभी परिसर में पहले से मौजूद वामपंथी संगठन एसएफआई और एआईएसए के अलावा माओवादी छात्र संगठन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूएसडीएफ) तथा कला संकाय के पूर्व छात्रों ने बाबुल सुप्रियो को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। केंद्रीय मंत्री की कमीज फाड़ दी, बाल पकड़ खींचे और लाठी से भी हमला किया। देखते-देखते स्थिति बिगड़ गई तो अभाविप से जुड़े छात्र उन्हें बचाने के लिए आगे आए। लेकिन वामपंथी ब्रिगेड उनसे भी भिड़ गई। दोनों पक्षों में तीखी झड़प हुई। इस दौरान करीब एक घंटे तक वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्रों ने उन्हें बंधक बनाए रखा। किसी तरह 4 बजे उन्हें सभागार में ले जाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद शाम पांच बजे जब बाबुल सुप्रियो सभागार से बाहर निकले तो इस बार पहले से भी ज्यादा संख्या में भीड़ ने उन पर जानलेवा हमला किया। 500 की इस भीड़ में अधिकतर बाहरी थे। केंद्रीय मंत्री को परिसर के गेट नंबर 4 पर ही रोक कर बैरिकेट लगा दिए गए। वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ता 'भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह' के साथ कश्मीर की आजादी के नारे लगा रहे थे।
केंद्रीय राज्यमंत्री की जान पर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था। अभाविप ने कार्यक्रम के मद्देनजर अप्रिय घटना की आशंका जताई थी और इसकी पूर्व सूचना जादवपुर प्रशासन और स्थानीय पुलिस को दी थी। इसके बावजूद बाबुल सुप्रियो को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दो बार फोन किया और हालात की गंभीरता से अवगत कराया। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो की जान खतरे में है। लेकिन ममता बनर्जी ने कोई कदम नहीं उठाया। तब जाकर राज्यपाल को स्वयं घटनास्थल को रवाना होना पड़ा। राज्यपाल जब घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्हें भी प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें भी विवि. परिसर में दाखिल नहीं होने दिया। काफी मशक्कत के बाद वे परिसर में दाखिल हुए। अभाविप ने पूरे मामले की कुलपति से लिखित शिकायत की है।
कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद जब बाबुल सुप्रियो कुलपति से मिलने गए तब प्रदर्शनकारी छात्राओं ने उन्हें अपशब्द कहे। प्रदर्शनकारी बाबुल सुप्रियो को धमकाते हुए कह रहे थे, ''अभी छोड़ रहे हैं, अगली बार आए तो जान से मार देंगे।'' साथ ही, उन्होंने अभाविप के झंडे उखाड़ कर फेंक दिए और उन पर पेशाब भी किया।
जब बाबुल सुप्रियो बाहर निकल रहे थे तब एक बार फिर उन्हें घेर लिया गया और उनकी कार पर पत्थर व बोतलें फेंकी गई तथा गेट को बंद कर दिया गया। जब अभाविप के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों से गेट खोलने को कहा तो उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दीं गई व पथराव किया।  
गेट नंबर 4 से जब बाबुल सुप्रियो बाहर निकल रहे थे तब एक बार फिर उन्हें घेर लिया गया और उनकी कार पर पत्थर व बोतलें फेंकी गई तथा गेट को बंद कर दिया गया। जब अभाविप के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों से गेट खोलने को कहा तो उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दीं गई व पथराव किया। बाद में जब पुलिस आई तो भीड़ में शामिल बाहरी तत्वों ने गेट नहीं खोलने दिया। कुलपति के कहने के बावजूद गेट नहीं खोला गया। उसी समय मदद के लिए जब राज्यपाल आए तो भीड़ ने बाबुल सुप्रियो को छोड़कर उन्हें घेर लिया। काफी देर तक प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की जाती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बाद में किसी तरह अभाविप कार्यकर्ताओं ने गेट खोलकर राज्यपाल के साथ बाबुल सुप्रियो को बाहर निकालना चाहा तो अंदर से फिर पथराव शुरू हो गया। रात 9:30 बजे तक वामपंथी छात्रों का उपद्रव जारी रहा।
जादवपुर विवि. में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। बीते चार दशकों से वामपंथी यहां मनमानी करते आ रहे हैं। कुलपति प्रो. गोपाल चंद्र सेन की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि उन्होंने उनका फरमान नहीं माना।
 वामपंथियों ने परीक्षा के बहिष्कार का आह्वान किया, किंतु सेन से न केवल सफलतापूर्वक परीक्षा आयोजित की, बल्कि प्रमाणपत्र भी बांटे थे। प्रो. सेन की हत्या के बाद उनके परिवार को इतना तंग किया कि उन्हें घर बेचकर भागना पड़ा। इस पर वामपंथी संगठनों ने कोई प्रदर्शन नहीं किया। वामपंथियों से सभी डरते हैं, क्योंकि ये कुछ भी कर सकते हैं। पूर्व कुलपति प्रो. अभिजीत चक्रवर्ती ने विवि. का माहौल सुधारने का प्रयास किया था। उन्होंने परिसर में अराजक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए, पर तृणमूल सरकार से सहयोग नहीं मिला।
1992 में बाबरी ढांचा विध्वंस के बाद अभाविप के एक कार्यकर्ता को बेरहमी से पीटा गया। उस समय मेकैनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. धनंजय दास ने जब हमलावरों से इसका कारण पूछा तो जवाब मिला कि वह बाहरी है, इसलिए उसे पीटा। इसी तरह 6 जून, 2016 को डॉ. त्रिगुण प्रेक्षागृह में 'बुद्धा इन ट्रैफिक जाम' के स्क्रीनिंग की अनुमति दी गई थी, जिसे इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने रद्द करने का दबाव बनाया। स्क्रीनिंग के समय 50 से अधिक वामपंथी छात्रों ने उपद्रव मचाया और अभिनेता विवेक अग्निहोत्री के साथ मारपीट की।
दरअसल, वामपंथियों के प्रति राज्य सरकार ही नहीं, स्थानीय मीडिया भी नरम रुख रखती है। कुछ मीडिया घरानों के पत्रकार तो उनके लिए बाकायदा 'एक्टिविस्ट' के तौर पर काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें सरकार से आर्थिक मदद मिलती है।