दुश्मन का काल है ब्रह्मोस मिसाइल, ऐसी क्षमता दुनिया में किसी के पास नहीं
   दिनांक 07-अक्तूबर-2019
भारत ने दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सफल परीक्षण कर लिया है। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज़ मारक मिसाइल बनाती है। यहां तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फेल साबित होती है

हाल में ही भारत ने दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सफल परीक्षण कर लिया । ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक मिसाइल माना जा रहा है क्योंकि इसकी रफ़्तार 2.8 मैक यानि ध्वनि की रफ़्तार से लगभग तीन गुना ज्यादा है। दुश्मन की सीमा में घुसकर लक्ष्य भेदने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल इसी गति से हमला करने में सक्षम है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के बालासोर जिले में ब्रह्मोस के जमीन से जमीन पर मार करने वाले संस्करण का सफल परीक्षण किया है । नए संस्करण का प्रोपल्शन सिस्टम, एयरफ्रेम, पॉवर सप्लाई समेत कई अहम उपकरण स्वदेश में ही विकसित किए गए हैं। ब्रह्मोस का नया संस्करण 290 किमी तक लक्ष्य को भेद सकता है। परीक्षण में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने सभी फ्लाइट पैरामीटर्स को पूरा लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया।

गेम चेंजर साबित हो सकती है ब्रह्मोस
ब्रह्मोस की रेंज अभी लगभग 300 किलोमीटर है, जिससे युद्द के समय पड़ोसी देश में हर जगह प्रहार करना संभव नहीं है। भारत के पास नई जेनरेशन की ब्रह्मोस मिसाइल से अधिक रेंज की बैलेस्टिक मिसाइल हैं, लेकिन ब्रह्मोस की खूबी यह है कि उससे खास टारगेट को तबाह किया जा सकता है। यह पाकिस्तान के साथ किसी टकराव की सूरत में गेम चेंजर साबित हो सकती है। बैलेस्टिक मिसाइल को आधी दूरी तक ही ही गाइड किया जा सकता है । इसके बाद की दूरी वे ग्रैविटी की मदद से तय करती हैं। वहीं क्रूज मिसाइल की पूरी रेंज गाइडेड होती है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल है। यह बिना पायलट वाले लड़ाकू विमान की तरह होगी, जिसे बीच रास्ते में भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसे किसी भी एंगल से अटैक के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। यह दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बचते हुए उसकी सीमा के अंदर घुसकर ठिकानों को तबाह करने का दमखम रखती है। मिसाल के लिए, ब्रह्मोस से पहाड़ी इलाकों में बने आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाया जा सकता है, जहां पारंपरिक तरीकों से असरदार हमले नहीं किए जा सकते। इसकी खासियत यह भी है कि यह मिसाइल आम मिसाइलों के विपरित हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है।
अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल से बेहतर
मिसाइल तकनीक में दुनिया की कोई भी दूसरी मिसाइल तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकती है। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज़ मारक मिसाइल बनाती है। यहां तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फेल साबित होती है। ब्रह्मोस की सफलता का आंकलन इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भारत अब दूसरे देशों को बेचने की दिशा में काम कर रहा है। ब्रह्मोस बनाने वाली कंपनी ब्रह्मोस एयर प्रोग्राम कंपनी को करीब सात अरब डॉलर के घरेलू ऑर्डर मिल चुके हैं। यहां पर ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते 2016 से पहले इनका निर्यात नहीं किया जा सकता था, लेकिन एमसीटीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम) में शामिल होने के बाद भारत को इनकी खरीद-फरोख्त का अधिकार मिल चुका है। इंडो-रसियन संयुक्त उपक्रम के तहत इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी।
क्या होती है क्रूज मिसाइल
ब्रह्मोस एक सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। क्रूज मिसाइल उसे कहते हैं जो कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार से बची रहती है। ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन से, हवा से, पनडुब्बी से, युद्धपोत से यानी कि कहीं से भी दागा जा सकता है। यही नहीं इस मिसाइल को पारम्परिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है। ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण का हाल ही में सफल परीक्षण किया गया। जिससे इस मिसाइल की मारक क्षमता में और भी बढोत्तरी हुई है। ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से लगभग 3 गुना ज्यादा यानि 2.8 मैक की गति से उड़ सकती है।
‘ट्रायड’ क्षमता वाली मिसाइल
भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से तैयार हुई इस मिसाइल का जल और थल से पहले भी सफल परीक्षण किया जा चुका है । इस तरह यह तय हो गया है कि ब्रह्मोस जल, थल और वायु से छोड़ी जा सकने वाली मिसाइल बन गई है। इस क्षमता को ट्रायड कहा जाता है, ट्रायड की विश्वसनीय क्षमता इससे पहले सिर्फ़ अमरीका, रूस और सीमित रूप से फ्रांस के पास मौजूद है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के पास भी नहीं है। अधिकतम स्वदेशी उपकरणों से लैस ब्रह्मोस के नए संस्करण का इस्तेमाल थल सेना करती है। ब्रह्मोस मिसाइल को हवा, जमीन या समुद्र में मौजूद प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। ब्रह्मोस को भारत की तरफ से डीआरडीओ और रूस की तरफ से एनपीओएम ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। ब्रह्मोस दुनिया में अपनी तरह की इकलौती क्रूज मिसाइल है, जो सुपरसॉनिक स्पीड से दागी जा सकती है। भारतीय सेना के तीनों अंग ब्रह्मोस मिसाइल के अलग-अलग संस्करण इस्तेमाल करते हैं। थल सेना, वायु सेना और नौ सेना की जरूरतों के हिसाब से ब्रह्मोस को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली का तीसरा सफल परीक्षण था, जिसे भारतीय सेना की तीसरी पीढ़ी के एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की आवश्यकता के लिए विकसित किया जा रहा है.
वैसे, अब ब्रह्मोस को ज़मीन, समुद्र तथा हवा कहीं से भी चलाया जा सकता है । हवा से जमीन पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल का दुश्मन देश की सीमा में स्थापित आतंकी ठिकानों पर हमला बोलने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मिसाइल अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बनाने में भी सक्षम है। बीते एक दशक में सेना ने 290 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को पहले ही अपने बेड़े में शामिल कर लिया है।
ब्रह्मोस मिसाइल का देशी बूस्टर
पुणे में स्थित डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन(डीआरडीओ) की हाई एनर्जी मैटरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी यूनिट ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का देशी बूस्टर डिवेलप किया है। डीआरडीओ के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने इस बूस्टर की महत्ता का जिक्र करते हुए बताया, एक ब्रह्मोस मिसाइल 2 स्टेज में फायर होता है। पहले स्टेज में एक सॉलिड प्रॉपेलेन्ट बूस्टर, मिसाइल को सुपरसोनिक स्पीड से धक्का देता है और फिर अलग हो जाता है। इसके बाद दूसरे स्टेज में लिक्विड फ्यूल इंजिन, इसको ध्वनि की गति की 3 गुना गति दे देता है। भारत अभी तक रूस से ही बूस्टर को आयात करता था। इस देशी तकनीक से देश के पैसों की भी बचत होगी।

 
ब्रह्मोस के निर्यात की भी तैयारी
इस कामयाबी के बाद भारत दुनिया में स्वयं को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में भी सफल हुआ है। भारत इस मिसाइल के निर्यात की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी में लग गया है। एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद यह कार्य और आसान हो गया है। वियतनाम 2011 से इस तेज गति की मिसाइल को खरीदने की कोशिश में लगा हुआ है। वह चीन से बचाव के लिए ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल लेना चाहता है। इस अत्याधुनिक मिसाइल को बेचने के लिए भारत की नजर में वियतनाम के अतिरिक्त 15 अन्य देश भी हैं। वियतनाम के बाद फिलहाल जिन चार देशों से बिक्री की बातचीत चल रही है उनमें इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली व ब्राजील हैं। शेष 11 देशों की सूची में फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड व संयुक्त अरब अमीरात आदि शामिल हैं। इन सभी देशों के साथ दक्षिण चीन सागर मसले पर चीन के साथ तनातनी चल रही है। दुनिया की सबसे तेज गति वाली मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल सर्वाधिक खतरनाक एवं प्रभावी शस्त्र प्रणाली है। यह न तो राडार की पकड़ में आती है और न ही दुश्मन इसे बीच में भेद सकता है। एक बार दागने के बाद लक्ष्य की तरफ बढ़ती इस मिसाइल को किसी भी अन्य मिसाइल या हथियार प्रणाली से रोक पाना असंभव है।
कुलमिलाकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण एक बड़ी कामयाबी है। इस कामयाबी से भारत की सामरिक क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि होगी ।
(लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं )