वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम का सम्मेलन संपन्न
   दिनांक 09-अक्तूबर-2019

 
 
मंच पर उपस्थित (बाएं से ) स्वामी विज्ञानानंद जी, श्री योगी आदित्यनाथ एवं अन्य प्रतिनिधि 
 
गत 27 सितंबर को मुंबई में वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम की ओर से तीन दिवसीय 7वां अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में 37 देशों के 254 एवं भारत से 456 प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सम्मेलन का सार था कि कैसे भारत में अधिक मात्रा में रोजगार के अवसर पैदा हों और एक तय नियम के अनुसार आर्थिक लक्ष्य को पाया जाए। सम्मेलन के एक सत्र में प्रमुख रूप से उपस्थित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हमारी सरकार राज्य में बनी, तो हमारे सामने बहुत सी चुनौतियां थीं। लेकिन आज हम न केवल उनसे लड़ रहे हैं बल्कि सफलतापूर्वक विकास को आगे बढ़ा रहे हैं। तीनों दिन देश-विदेश के विशिष्ट लोगों ने अपने विचार रखे और भविष्य की संभावनाओं को साकार रूप देने का संकल्प लिया।  प्रतिनिधि
 
स्वयंसेवकों ने बढ़ाया मदद का हाथ

 
 
आपदा प्रभावित लोगों की भोजन-व्यवस्था में लगे स्वयंसेवक
 
 
 
पिछले दिनों महाराष्ट्र के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण जनजीवन बाधित हुआ। लेकिन पुणे इससे ज्यादा प्रभावित दिखा। भारी बारिश के कारण अनेक घर, गाडि़यां एवं पशु पानी में बह गए। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सहायता के लिए प्रशासन के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जनकल्याण समिति के स्वयंसेवक राहत कार्य में जुटे। इसके साथ ही प्रभावित लोगों तक भोजन-पानी सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने का काम किया।  प्रतिनिधि
जैथलिया जी की स्मृति में व्याख्यानमाला
 
''लोक साहित्य में राजस्थानी भाषा का बड़ा अवदान है। विघटन के इस दौर में भाषाओं के बीच अन्त:संबंध तलाशना आज की महती आवश्यकता है। अपनी भाषा का गौरव बोध रखने के साथ राष्ट्रभाषा हिन्दी के विराट साहित्यिक अवदान से संपृक्त होने की जरूरत है। हिन्दी कविता में शौर्यभाव राजस्थानी की ही देन है।'' ये विचार हैं प्रख्यात साहित्यकार प्रो. सूर्यप्रकाश दीक्षित के। वे कोलकाता स्थित बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा स्थानीय ओसवाल भवन सभागार में आयोजित कर्मयोगी जुगल किशोर जैथलिया स्मृति व्याख्यानमाला के चतुर्थ आयोजन में 'हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य का अन्त:संबंध' विषय पर बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि राजस्थानी भाषा अत्यंत संपन्न और समृद्ध भाषा है। कहीं ये मारवाड़ी है तो कहीं ये मेवाड़ी, ढुंढाड़ी। जैथलिया जी के जीवन प्रसंगों के बारे में वक्तव्य रखा पुस्तकालय के मंत्री श्री महावीर बजाज ने तथा धन्यवाद ज्ञापन साहित्य मंत्री श्री बंशीधर शर्मा ने। अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया उपाध्यक्ष श्री नन्दकुमार लढ़ा एवं कवि श्री अनिल ओझा नीरद ने। ल्ल