विश्व गुरु के पथ पर बढ़ता भारत
   दिनांक 09-अक्तूबर-2019

 
कार्यक्रम को संबोधित करते श्री वेकैंया नायडू। मंच पर उपस्थित विशिष्टजन
 
130 करोड़ भारतीयों के एकत्रित प्रयत्नों के कारण भारत आज विश्वगुरु बनने की ओर तेज गति से बढ़ रहा है।'' उक्त बात उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने कही। 
 
 
 
''देश के युवकों को आज सकारात्मक एवं रचनात्मक वृत्ति से कार्य करने की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति अपना काम करे तो वह भी देश सेवा ही है। 130 करोड़ भारतीयों के एकत्रित प्रयत्नों के कारण भारत आज विश्वगुरु बनने की ओर तेज गति से बढ़ रहा है।'' उक्त बात उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने कही। वे गत दिनों मुंबई में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित प्रथम स्व. यशवंतराव केलकर स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 'राष्ट्र प्रथम' की अवधारणा पर अपने विचार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि जातिभेद तथा स्त्री-पुरुष भेद का भारतीय संस्कृति में, धर्म ग्रंथों में और शास्त्रों में कोई स्थान नहीं है। जाति एवं स्त्री-पुरुष भेद यह देश के माथे पर कलंक है। इस भेदाभेद को दूर करना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति में स्त्री का विशेष महत्त्व है। शिक्षा विभाग देवी सरस्वती के पास, सुरक्षा विभाग देवी पार्वती के पास तथा वित्त विभाग देवी लक्ष्मी के पास है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने 'गांव चलो', ऐसा आह्वान किया था, लेकिन हम शहरों की ओर चले आए। नगरीकरण से हम भाग नहीं सकते, परंतु उसके परिणाम और बढ़ता आकर्षण अवश्य कम कर सकते हैं। शाश्वत कृषि, जलसंवर्धन, आरोग्य के लिए योग, यह केवल राजनीति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में होना आवश्यक है। इसलिए हर चीज के लिए कानून बनाना आवश्यक नहीं है। हमें आगे बढ़कर समाज में खुद बदलाव करना चाहिए, तभी समाज संतुष्ट और राष्ट्र शक्तिशाली बन सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि हम स्वामी विवेकानंद की कल्पना का बलशाली भारत बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।