विचार, विकास व संस्कृति को मिलाकर बनता है भारत
    दिनांक 09-अक्तूबर-2019
 
 
मंच पर उपस्थित (बाएं से) सर्वश्री राजनाथ सिंह, डॉ. कृष्ण गोपाल एवं संतोष गंगवार 
 
पिछले दिनों जयपुर के धानक्या रेलवे स्टेशन स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक पर दीनदयाल उपाध्याय जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि श्री गुरुजी कहते थे कि देश में राजनेता ऐसा कार्य करें कि उसकी परिभाषा ही बदल जाए और पं.दीनदयाल उपाध्याय जी ने वैसा ही कार्य किया। दीनदयाल जी कहते थे कि एक राष्ट्र हमारा प्रधान विचार है और इसके लिए कार्य करना हमारा लक्ष्य है। देश में आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने कहा था कि आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर दिया जाए, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने गांधी जी की बात को नकार कर, ऐसा नहीं किया। कांग्रेस सरकार की नीतियां महात्मा गांधी व सरदार पटेल आदि के विचारों के विपरित जाने लगीं। गीता व रामायण को आदर्श मानने वाले देश में विचार दूषित होने लगे थे। ऐसे में विचारों का संरक्षण करने वाला कोई भी राजनेता नहीं था, कांग्रेस का उत्कर्ष चरम पर था, वामपंथ भी भारत में पैर पसारने लगा था। ऐसे में देश के सामने यह प्रश्न खड़ा हुआ कि कांग्रेस को चुनौती कौन देगा? उस समय पंडित उपाध्याय ने देश का मार्गदर्शन किया। दीनदयाल जी पढ़ाई के बाद संघ से जुड़े और जनसंघ में आए. हालांकि उनके स्वभाव में राजनीति नहीं थी, लेकिन गुरुजी के आग्रह पर उन्होंने जनसंघ का कार्य संभाला और फिर जनसंघ के महामंत्री बने। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दीनदयाल जी का यह स्मारक भविष्य में और भी भव्य बनेगा और देश के लोगों के लिए आदर्श केन्द्र। दीनदयाल जी सिर्फ कर्मयोगी, ज्ञानयोगी, भक्ति योगी नहीं थे, भक्ति समन्वय युक्त, ज्ञानयुक्त ज्ञानयोगी थे। ल्ल