द आरएसएस : रोडमैप्स फॉर 21 सेंचुरी का लोकार्पण
    दिनांक 09-अक्तूबर-2019
 

दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते श्री मोहनराव भागवत। 
साथ में हैं (बाएं से) के.जी. बालाकृष्णन, सुनील आंबेकर और संदीप सोमानी

 
 
'द आरएसएस : रोडमैप्स फॉर 21 सेंचुरी' का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया।  
 
गत 1 अक्तूबर को दिल्ली के आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सुनील आंबेकर द्वारा लिखित पुस्तक 'द आरएसएस : रोडमैप्स फॉर 21 सेंचुरी' का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा है। भारत एकता की विविधता को समझने वाला देश है। अपना जीवन स्वार्थ के लिए नहीं है, अपना जीवन सबका भला करने के लिए है। संघ का चिंतन है कि व्यवस्था बदलने से काम नहीं चलेगा। व्यक्ति का आचरण बदलना पड़ेगा। यदि समस्याएं हैं तो उसकी व्यवस्था है, चिंतन से समाधान निकल सकता है, मूल बात व्यक्ति को बदलने की है। उन्होंने कहा कि संघ सब कुछ करता है ऐसा नहीं है, सब कुछ संघ ने किया ऐसा जब हो गया तो यह संघ की पराजय है। संघ चाहता है पूरा समाज संगठित हो। मनुष्य के विचारों को देश, काल परिस्थिति की मर्यादा रहती है। देश, काल परिस्थितियां जैसे बदलती हैं, इन विचारों के बहुत अंशों को बदलना पड़ता है, शाश्वत कुछ बातें रहती हैं। अपने विचारों को एक किला बनाकर अपने आप को उसके अंदर बंद कर लें तो यह संभव नहीं होगा।
 
उन्होंने कहा कि कभी-कभी लोगों को लगता है कि कुछ बातों पर मतभेद है, मतभेद तो होता ही है, इसमें कौन सी बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि संघ समझना है तो डॉ. हेडगेवार जी का जीवन समझिए। हमारे यहां व्यक्ति आदर्श नहीं है, भगवाध्वज आदर्श है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे संघ में आएं, संघ में 2-3 साल रहें। संघ के बारे में गलतफहमियां जरूर दूर हो जाएंगी। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन, फिक्की के अध्यक्ष संदीप सोमानी सहित अनेक वरिष्ठ लोग उपस्थित थे। -प्रतिनिधि
 
हिन्दी विवेक के 'नया भारत विशेषांक' का विमोचन

 
 
गत 24 सितंबर को मुंबई में हिन्दी विवेक मासिक पत्रिका द्वारा प्रकाशित 'नया भारत विशेषांक' का लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हिन्दी विवेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमोल पेडणेकर ने बदलते भारत की तस्वीर को प्रस्तुत किया और विशेषांक की प्रासंगिकता, उपलब्धियों एवं बीते 6 वर्ष से भारत में हो रहे परिवर्तन का उल्लेख किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री अनिरुद्ध देशपांडे। उन्होंने कहा कि भारत तो चिर पुरातन है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि यह नित्य नूतन होता रहता है। समय के साथ परिवर्तन होता रहता है। देश में हो रहे बदलाव का केंद्र बिन्दु समाज है, जनता है। जनभागीदारी से ही देश में तेजी के साथ परिवर्तन हो रहा है। लेकिन कुछ दोष हमारे सामने हैं, जिन्हें खत्म करना है। समारोह के विशिष्ट अतिथि ले. जनरल (सेनि.) डॉ. दत्तात्रेय शेकटकर ने कहा कि भारत की सैन्य-शक्ति बहुत मजबूत है। -प्रतिनिधि