ॐ और राफेल से किसको लग रहा है डर
   दिनांक 09-अक्तूबर-2019
विजयादशमी के दिन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शस्त्र पूजन की परंपरा के तहत राफेल पर ॐ क्या लिख्र दिया कथित लिबरल और सेकुलरों को परेशानी हो गई. इन्हें हर राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक, चिह्न और अवसर नहीं भाते. इन्हें रिलीजन भाता है, मजहब भाता है, लेकिन धर्म से चिढ़ है.

ॐ... यह सनातन धर्म की चेतना है. ॐ क्या है, इसकी व्याख्या अनंत काल तक अनंत शब्दों में भी नहीं की जा सकती. ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है...
अ उ म् "अ" का अर्थ है उत्पन्न होना, "उ" का तात्पर्य है उठना, अर्थात अनंत विस्तार "म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना.
इस प्रकार ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का प्रतीक है. वैदिक संस्कृति और कालांतर में इससे जन्मे सिख, जैन, बौद्ध समेत सभी पंथों में ॐ है, ओंकार है. ॐ देवत्व है, इसलिए आसुरी शक्तियों का विनाशक है. यह असुर नहीं, असुरता (प्रवृत्ति) का विनाश करता है. विजयदशमी के दिन देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत को मिले पहले राफेल लड़ाकू विमान का पूजन करते हुए ॐ अंकित किया. पुष्प नारियल से पूजन किया. विजयदशमी पर यह राष्ट्र का शस्त्र पूजन था. यह सतयुग से चली आ रही परंपरा है. शक्ति पूजन की परंपरा. सनातन धर्म में शक्ति पूजन का मतलब सृजन है. विनाश, आक्रमण सनातन परंपरा में कहीं है ही नहीं. लेकिन जहां शुभता होती है, वहां आसुरी शक्तियों को भय होता है. ऐसा ही भय राफेल और ॐ को लेकर कथित लिबरलों, सेक्यूलरों की फौज में नजर आता है. इन्हें हर राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक, चिह्न और अवसर नहीं भाते. इन्हें रिलीजन भाता है, मजहब भाता है, लेकिन धर्म से चिढ़ है.
प्रतिक्रियाओं में आप तमाम संचार माध्यमों, सोशल मीडिया पर देखेंगे, तो पाएंगे कि आकाश में भारत को अविजित कर देने वाले राफेल का भारतीय वायुसेना में शामिल होना तमाम लोगों को नहीं भा रहा है. ये वही लोग हैं, जिन्होंने भारतीय वायुसेना को पचास साल पुराने मिग-21 उड़ाते रहने पर मजबूर किया. ऐसा नहीं कि मिग-21 अच्छा विमान नहीं है. लेकिन इससे आगे के तीन पीढ़ी के विमान हमारे पड़ोसी पाकिस्तान और चीन के पास हैं. आप कितना भी कहिए कि जंग हौसलों से होती है, लेकिन हथियार की अपनी भूमिका है. विंग कमांडर अभिनंदन ने मिग-21 पायथन से पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया. लेकिन ये भी हकीकत है कि पुराने दौर का विमान होने के कारण मिग-21 एफ-16 का निशाना बना और हमारे जांबाज को पाकिस्तान में लैंडिंग करनी पड़ी. दस साल तक कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन की सरकार के दौर में भारतीय सशस्त्र बलों को कमजोर करने की भरपूर कोशिश हुई. भारतीय वायुसेना के लिए विमान खरीदने का नाटक भी हुआ, लेकिन मिला कुछ नहीं. जब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने राफेल विमान खरीदने का फैसला किया, तो उसमें विघ्न डालने का कांग्रेस ने पूरा प्रयास किया. पूरे देश ने देखा कि भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमान चाहिए और कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी के चहेते कागज के जहाज बनाकर उड़ा रहे थे. देश की जनता ने जवाब दिया. वह समय बीत गया, जब आप देश विरोधी एजेंडा लेकर भी जनादेश पा लेते थे. ये नया भारत है, जनता जागरुक है. अब नरेंद्र मोदी सरकार वह कार्य कर रही है, जिसके लिए जनादेश मिला है.
पिछले कुछ अरसे मे आप देखेंगे, तो पाएंगे कि भारत ने चिनूक हेलीकॉप्टर खरीदा. एअर और कवर्ट आपरेशन में गेमचेंजर अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना को दिया. राफेल की प्रतीकात्मक डिलीवरी भारत को मिल गई है. मई तक चार राफेल विमान हथियार प्रणालियों से लैस होकर भारत को मिल जाएंगे. राफेल का भारत को मिलना ऐतिहासिक क्षण क्यों है. वजह है इसकी ताकत. यह सौ किलोमीटर के दायरे में 40 टारगेट को एक साथ पहचान सकता है. इस मायने में यह पाकिस्तान के एफ-16 और चीन के जे-20 से दोगुना ताकतवर है. राफेल मेटयोर और स्‍काल्‍प मिसाइलों से लैस है. मेटयोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. यह 150 किलोमीटर की दूरी तक हवा में मौजूद किसी भी खतरे को पलक झपकते ही भेद सकती है. यह सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, ड्रोन और यहां तक किसी मिसाइल को भी मार गिरा सकती है. अपनी मिसाइलों के दम पर भारत को लगातार परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के लिए यह खासा तगड़ा जवाब होगी. इसके अलावा स्काल्प मिसाइल हवा से जमीन पर मार करती है. तीन सौ किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली ये मिसाइल जमीन पर मौजूद किसी भी खतरे को तबाह कर सकती है. मिसाइल के लिए अदृश्य यह विमान तकनीक के मुकाबले में बेजोड़ है. मल्टीरोल कांबेट विमान यानी कई भूमिका निभाने वाला लड़ाकू विमान है राफेल. यह परमाणु हमले, क्लोज एयर कांबेट, लेजर डायरेक्ट लॉन्ग रेंज मिसाइल से हमले और समुद्र में किसी भी लड़ाकू पोत व पनडुब्बी को निशाना बनाने में कारगर है. यह 2,223 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से 24,500 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम है. एक मिनट के अंदर यह 60 हजार फिट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है.
आपको राफेल की ये सारी खूबियां बताने की वजह है. राफेल एक ऐसा युद्ध उपकरण है जो एशिया में हवाई शक्ति के संतुलन को बदलकर रख देगा. इस देश में इस्लामाबाद और बीजिंग की बोली बोलने वाले बहुत हैं. राफेल इन दोनों ही खेमों की बोलती बंद करने वाला इंतजाम है. पाकिस्तान और चीन परस्त हमारे लिबरल और सेक्यूलर इस समय बहुत बौखलाए हुए हैं. उन्हें डराने के लिए राफेल ही काफी था, ऊपर से सरकार ने उस पर ॐ और अंकित कर दिया है. लेकिन इनकी घबराहट बेवजह है. ॐ अंकित होने का मतलब ही ये है कि राफेल किसी पर आक्रमण करने के लिए नहीं है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कोई आक्रमण करे, तो उसे माकूल जवाब न दिया जा सके.