अयोध्यावासियों ने जलाए दिए मनाई खुशियां
   दिनांक 10-नवंबर-2019
                       
 
 राममंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद अयोध्या में सरयू नदी के तट पर हुई भव्य आरती का दृश्य
वैसे तो दिवाली, कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जा चुकी है. मगर शनिवार को उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने के बाद अयोध्यावासियों ने एक बार फिर से दिवाली मनाई. लोगों ने दिए जलाए, मिठाइयां बांटी. रामलला विराजमान के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास कहते हैं कि "जब प्रभु श्री राम, लंका से लौटने वाले थे. उस समय अयोध्या में सभी लोग टकटकी लगाये आसमान की तरफ देख रहे थे. जब भगवान राम - सीता और लक्ष्मण पुष्पक विमान से उतरे तो अयोध्या की जनता ने दिवाली मनाई थी . ठीक वैसा ही दृश्य आज अयोध्या में फिर से एक बार देखने को मिल रहा है." अयोध्या में लोगों ने शाम होते ही दीप प्रज्जवलित किये गए. अयोध्या के लोगों का कहना है कि “भगवान राम का मन्दिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो और कहां बनेगा!” उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने के बाद राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है. लोगों के उत्साह की कोई सीमा नहीं हैं. सामान्य दिनों में एक बार सरयू नदी की आरती की जाती हैं. निर्णय आने के बाद शाम को पांच बार सरयू नदी की आरती उतारी गई.
अयोध्या जनपद में फोटो स्टेट की एक छोटी से दुकान के मालिक वासुदेव लाल वैश्य की उम्र करीब 77 वर्ष है, वासुदेव बताते हैं कि "मैंने ढांचा गिरने के पहले भी भगवान राम लला विराजमान का दर्शन किया है. उच्चतम न्यायालय का निर्णय आ जाने के बाद अब किसी भी पक्ष को कोई मुकदमा नहीं करना चाहिए और सभी को राम मंदिर के निर्माण में सहयोग करना चाहिए ."

अयोध्या में जलपान की दुकान के मालिक सागर यादव ने भी अपनी दुकान पर दिवाली की तरह सजावट की, उन्होंने "आज मैं बहुत खुश हूं. राम जन्म भूमि में करोड़ों हिन्दुओं की आस्था है. उच्चतम न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी तब कई बार लगा कि साक्ष्य के आधार पर हिन्दुओं का पक्ष कमजोर तो नहीं पड़ जाएगा. मगर जब फैसला आया तो मन प्रसन्न हो गया. हम लोगों का पक्ष उच्चतम न्यायालय ने मान लिया और सबसे बड़ी बात यह कि सभी पांच जजों ने एक मत से फैसला दिया.”
हालांकि प्रदेश सरकार की तरफ से लगातार यह अपील की जा रही थी कि फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आ चुका है. सभी लोग अपने व्यवहार से ऐसा कुछ भी प्रदर्शित न करें जिसको देखकर यह लगे कि किसी की जीत हुई है और कोई हार गया है. मगर वर्ष 1950 से शुरू हुई कानूनी लड़ाई का अंत होने पर लोग अपनी प्रसन्नता को रोक नहीं पाये. हनुमान गढ़ी के निकट बाबा गौरी शंकर दास जी ने मिठाई बांटी. बाबा गौरी शंकर दास जी ने कहा कि "आज हम लोग बहुत आनंदित हैं. अब मंदिर निर्माण का द्वार खुल चुका है. जल्द ही मंदिर बनने लगेगा. हिन्दू जो इस देश में बहुसंख्यक कहलाता है. उस हिन्दू को अपने आराध्य भगवान राम का मंदिर बनवाने के लिए इतने वर्षों तक मुकदमा लड़ना पड़ा मगर अंत में सत्य की विजय हुई."
श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री नरसिंह दास जी महाराज भी अत्यंत प्रसन्न हैं. पांचजन्य से बातचीत में उन्होंने कहा कि " यह फैसला प्रभु श्री राम की मर्जी से ही आया है. जिस तरह 22 / 23 दिसंबर की रात भगवान राम की मूर्ति प्रकट हुई थी. ठीक उसी तरह से भगवान राम की प्रेरणा से सभी जजों ने फैसला दिया. प्रभु श्री राम के मंदिर बनने का मार्ग अब साफ़ हो गया है. सभी बाधाएं हट गई हैं. शिलाएं तराश कर रखी हुईं हैं. एक तल का निर्माण तो देखते-देखते हो जाएगा. भगवान राम का भव्य मंदिर बनेगा."
राम जन्म भूमि के मुकदमे के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि "यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट में गया. उसी समय मैंने कह दिया था कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आयेगा. उस फैसले को हम स्वीकार करेंगे. फैसला आ चुका. हम इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं. सब लोग राजी - खुशी से रहें. जहां मंदिर बनना है वहां मंदिर बने. जहां मस्जिद बनना है वहां मस्जिद बने. आज यह विवाद खत्म हो गया."