''जमाती-जिहादियों की शरणस्थली बना हुआ है पश्चिम बंगाल''
   दिनांक 06-नवंबर-2019
पंचायत चुनाव से अब तक पश्चिम बंगाल में रा.स्व.संघ एवं भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जहां मौत के घाट उतारा जा चुका है, वहीं 28 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में जेलों में ठूंस दिया गया है। राज्य में आए दिन होते भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न, अत्याचार और राज्य प्रशासन की कार्यशैली को केन्द्र में रखकर पश्चिम बंगाल की सांसद एवं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री देबश्री चौधरी से पाञ्चजन्य के मुख्य उपसंपादक नागार्जुन एवं वरिष्ठ संवाददाता अश्वनी मिश्र ने विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:

 पश्चिमी बंगाल से आएदिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के शोषण, हमले, अत्याचार और हत्या तक के समाचार आते रहते हैं। हाल ही में मुर्शिदाबाद के संघ कार्यकर्ता समेत पूरे परिवार की नृशंस हत्या कर दी गई। ऐसे में पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को आप कैसे देखती हैं ?
देखिए, पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति बहुत खराब है। उदाहरण के तौर पर नवरात्रि को ही लें। यह राज्य का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दौरान राज्य में नौ दिनों में नौ हत्याएं हुईं। लोकसभा चुनाव के बाद इन हत्याओं का आंकड़ा 35 से अधिक हो गया है। पंचायत चुनाव के बाद तो यह आंकड़ा 90 के पार जाता है। इसके अलावा, भाजपा के लगभग 28 हजार कार्यकर्ता जेलों में बंद हैं। इनमें से लगभग 20 हजार कार्यकर्ताओं को मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में फंसाया गया है। यहां की पुलिस तृणमूल के काडर की तरह काम कर रही है। जब भी कोई मामला घटित होता है तो पुलिस मुख्य व्यक्ति के साथ 60-70 अन्य लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज करती है। ये अन्य कोई और नहीं, बल्कि भाजपा कार्यकर्ता होते हैं। यह सब कुछ राज्य के हालात, यहां की कानून-व्यवस्था और शासन-प्रशासन की कार्यशैली बताने के लिए काफी है। पश्चिम बंगाल में इस समय जो तानाशाही चल रही है, ऐसा इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। यहां के हालात इतने भयावह हैं कि आम व्यक्ति भी जब रोजमर्रा के काम के लिए घर से निकलता है तो उसे एवं उसके परिवार को डर लगा रहता है कि शाम को वह घर वापस आएगा या नहीं।
आपने बताया कि झूठे आरोपों में भाजपा के 28 हजार कार्यकर्ता जेलों में बंद हैं। यकीनन इसमें से अधिकतर कार्यकर्ता सामान्य परिवारों से हैं। इन कार्यकर्ताओं को मुक्त कराने के लिए पार्टी क्या कदम उठा रही है ?
भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के साथ हर स्तर पर खड़ी है। हम और हमारी पार्टी उन सभी कार्यकर्ताओं और परिवारों केे साथ है जो किसी न किसी कारण से प्रताडि़त किए गए। जिन परिवारों ने अपने बेटे को खोया, उन परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम हम पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं। इसी तरह, जिन कार्यकर्ताओं को साजिशपूर्ण तरीके से अलग-अलग झूठे मामलों में फंसाया गया, उनकी जमानत से लेकर मुकदमे लड़ने तक का काम हमारे द्वारा किया जा रहा है। इन सभी मामलों में प्रधानमंत्री एवं भाजपा केराष्ट्रीय अध्यक्ष पूरी तरह संवेदनशील हैं।
बंगाल से भाजपा के 18 सांसद सहित दो मंत्री आते हैं। बावजूद इसके राज्य के अराजक तत्व बेखौफ होकर कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं। ऐसे हालात में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को कैसे सुरक्षित रखेगी ?
कार्यकर्ताओं की आएदिन हो रही हत्याओं से पार्टी एवं कार्यकर्ता आक्रोशित हैं। स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कार्यकर्ताओं पर हमले और अत्याचार की घटनाओं से पूरी तरह अवगत हैं। दूसरी बात, लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के दौरान देशभर ने देखा कि कैसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह तक के चुनावी काफिले को निशाना बनाया गया और पत्थरबाजी की गई। ऐसे में राज्य एवं केंद्रीय नेतृत्व कार्यकर्ताओं की पीड़ा को निकट से महसूस करता है और उसे समझता है। देखिए, आज जो बंगाल के हालात हैं, उसे समझने की आवश्यकता है। जहां जाने पर देश के सबसे बड़े दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरक्षित न हो, वहां कार्यकर्ताओं की स्थिति और उनकी सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ, जिस प्रदेश में देश के प्रधानमंत्री की सभा की अनुमति में हीला-हवाली की जाती हो, सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर को उतरने नहीं दिया जाता, राज्य सहित केंद्र के बड़े-बड़े नेताओं को कई जगह जाने से रोका जाता हो, उस राज्य की कार्य प्रणाली, शासन-प्रशासन की स्थिति को जाना जा सकता है। इसी सबको देखते हुए हाल ही में एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मिला और उन्हें वहां की दयनीय स्थिति से रूबरू कराया। देखिए, वर्तमान की केंद्र सरकार लोकतांत्रिक पद्धति पर भरोसा रखती है। अगर कोई और पार्टी होती तो अब तक धारा 356 लागू कर चुकी होती। लेकिन हमारी सरकार इस पर भरोसा नहीं करती है। जनता ही इन्हें इनके कर्मों का सबक सिखाए और उन्हें जवाब दे, उस पर भरोसा करती है। इसीलिए भाजपा कार्यकर्ता जनता पर भरोसा जताते हुए कमर कसकर पश्चिम बंगाल के मैदान में उतरे हैं। कितनी भी मौत हों, चाहे जितना खून बहे, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। हमारे कार्यकर्ता हरेक स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। 2011 से पहले बंगाल के कम्युनिस्ट अपने को अजेय समझते थे, लेकिन आज उनका पतन हो गया। इसी प्रकार, ममता बनर्जी जो आज दंभ, मद और अहंकार में चूर हैं, उनका भी पतन नजदीक है। अगर वह समझती हैं कि तुष्टीकरण, अत्याचार, दंगा-फसाद फैलाकर राज्य की सत्ता में बनी रहेंगी तो यह उनकी भूल है। राज्य की जनता उन्हें उनके कर्मों की सजा तय समय पर जरूर देगी।

 
उत्तर दिनाजपुर स्थित करनदिघी में हाल ही में हुई एक कार्यकर्ता की हत्या के बाद परिजनों को ढांढस बंधातीं देबश्री चौधरी
 आखिर एक ही संगठन, पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के पीछे क्या कारण हो सकता है ?
इसका एक ही कारण है कि ममता बनर्जी सिर्फ भाजपा से डरी हुई हैं। भाजपा सबको छोड़कर आगे बढ़ रही है और ममता की लड़ाई भाजपा के साथ है। दूसरा कारण यह है कि देश से भगाए गए जमाती, जिहादी और रोहिंग्याओं की शरणस्थली पश्चिम बंगाल बना हुआ है। ऐसे में जब भी कोई इनका विरोध करता है तो रक्तपात होता है। वे बचने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए भाजपा कार्यकर्ताओं पर इतने आक्रमण हो रहे हैं।
क्या आप मानती हैं कि जो हालात कभी कश्मीर के थे, अब बंगाल भी उसी रास्ते पर चल रहा है ?
निश्चित। पश्चिम बंगाल के हालात लगभग उसी रास्ते पर पहुंच रहे हैं। यहां की सरकार गुंडों और अराजक तत्वों के सहारे चल रही है। इन सबका सहयोग कर रहा है राज्य का पुलिस प्रशासन। इन गंुडों और अराजक तत्वों में आते हैं- रोहिंग्या मुस्लिम, जिन्हें ममता सरकार प्यार से पाल-पोस रही है। जमाती, जिहादी और कट्टरपंथी तत्व सभी जगह से राज्य में इकट्ठा होकर अराजकता फैलाने के लिए हरदम तैयार रहते हैं, क्योंकि राज्य सरकार का हाथ जो उनके सिर पर है। इस सब पर लगाम लगाने के लिए तैयारियां चल रही हैं। बहुत जल्द इन्हें सबक सिखाया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से राज्य में एनआरसी लागू करने की बात की जाती है तो ममता बनर्जी का गुस्सा सातवें आसमान पर चला जाता है। आखिर उनके आक्रोश की वजह क्या है ?
इस विषय में ज्यादा कुछ बोलने की जरूरत नहीं है। हम लोग साफ शब्दों में कह रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में डेढ़ से दो करोड़ घुसपैठिए हैं। आप अंतिम लोकसभा के चुनाव के आंकड़े विस्तार से देखें और जीत के अंतर को देखें। यह सब देखने के बाद उन्हें मिले मतों से यह संख्या घटा दें, तो परिणाम क्या होगा? ममता बनर्जी की व्याकुलता, आक्रोश और एनआरसी लागू करने की बात पर झल्लाहट की यही साफ वजह है। उन्हें डर है कि एनआरसी लागू होते ही घुसपैठिये चिह्नित हो जाएंगे और उनका वोट बैंक धराशायी हो जाएगा।
वामपंथी शासन में राज्य के लोग न्याय के लिए भटकते थे। वही स्थिति टीएमसी के शासन में भी है। दोनों दलों के काम करने का तरीका लगभग एक-सा है। ऐसे हालात में बंगाल में आम आदमी के न्याय की कितनी गुंजाइश रह जाती है ?
देखिए, सीपीएम का तो कुछ कैडर था भी। लेकिन टीएमसी का तो वह भी नहीं है। टीएमसी को तो गुंडे और घुसपैठिये चला रहे हैं। पुलिस वालों को तो इन्होंने खरीदा हुआ है। प्रशासन का कोई ईमानदार अफसर अगर इनके विरुद्ध जाने की सोचता है तो उसे दंडित किया जाता है। राज्य पुलिस के आलाअधिकारियों के सामने निरीह भाजपा कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढाया जाता, लेकिन वे इसे अनदेखा करते हैं। इससे समझा जा सकता है कि राज्य का आम नागरिक कितना सुरक्षित है और उसे क्या न्याय मिलता होगा!
...यानी राज्य की पुलिस एक पार्टी के काडर की तरह काम कर रही है ?
बिल्कुल, यहां का प्रशासन टीएमसी का कार्यकर्ता बनकर कार्य कर रहा है। मजे की बात यह है कि बाकायदा इनके अधिकारियों को अध्यक्ष से लेकर पार्टी के मंडल अध्यक्ष तक से संबोधित किया जाता है। दूसरी तरफ, गुंडों को ही पुलिस की वर्दी पहना दी गई है। यही लोग अब भाजपा कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढा रहे हैं।
बंगाल को लेकर भाजपा की आगे क्या रणनीति है ?
रणनीति की चर्चा हम यहां नहीं कर सकते। लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगी कि एक भी कार्यकर्ता के रक्त की बूंद व्यर्थ नहीं जाएगी। रही बात आने वाले विधानसभा चुनाव की तो हम उसमें दो तिहाई बहुमत से जीतेंगे और राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। जनता को भाजपा पर पूर्ण विश्वास है कि वही राज्य में अच्छा शासन दे सकती है। भाजपा सही नियत से कार्य करती है। हमारी पार्टी का सपना है कि बंगाल को हम जल्द ही 'सोनार बांग्ला' बनाएंगे।
पश्चिम बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगी ?
राज्य का इतिहास है कि यहां वामपंथियों से लेकर तृणमूल पार्टी के नेताओं ने शवों पर राजनीति और रक्त बहाकर सत्ता हथियाई। लेकिन इस बार उनका मंसूबा पूरा नहीं होगा। हमारे कार्यकर्ता इस बार पश्चिम बंगाल एवं यहां की जनता को अराजक तत्वों से बचाने के लिए अपने प्राणों को होम तक करने के लिए तैयार हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसलिए अगर हमें बलिदान देना पड़ेगा तो हम पीछे हटने वाले नहीं है, क्योंकि अन्याय को समाप्त करने के लिए बलिदान तो देना ही पड़ेगा।