'हिंदुत्व मुर्दाबाद' के नारे लगाए जाएं क्या इसलिए हुई थी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना
   दिनांक 11-दिसंबर-2019
आश्चर्य की बात है कि जिस कानून से घुसपैठियों को दिक्कत बढ़ने वाली है. उस क़ानून का विरोध अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हो रहा है. वहां हिन्दू मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं

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एएमयू में छात्रों ने बिल की प्रतियां फाड़ीं, हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे लगाए
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जिसकी स्थापना पठन -पाठन और उच्च स्तरीय शोध के लिए की गई थी. विगत कई दशकों से वहां पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियां संचालित हो रही हैं. जब भी कोई राष्ट्र हित का विषय आता है तब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुसलमान छात्रों की तरफ से विरोध किया जाता है. देश के सभी विश्वविद्यालयों में भारत सरकार की तरफ से की गई आरक्षण व्यवस्था लागू है मगर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने इसे लागू नहीं किया है. फिलहाल ताजा विवाद, नागरिकता संशोधन विधेयक का है. इस मामले में पुलिस ने छात्र संघ के दो पूर्व अध्यक्षों समेत 20 नामजद एवं 700 से अधिक अज्ञात के खिलाफ एफ.आई.आर दर्ज की है.
 मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी से जुलूस निकाला गया. इस जुलूस में हिन्दू मुर्दाबाद के नारे लगाए गए. केन्द्रीय गृह मंत्री, अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की गई. विधेयक की प्रतियों को जलाया गया. छात्रों का कहना था कि " किसी भी कीमत पर इस विधेयक को लागू नहीं होने दिया जाएगा. यह विधेयक मौलिक अधिकार और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है. यह मुस्लिम विरोधी, विधेयक है. इसके साथ ही दिल्ली रवाना होने की घोषणा भी की गई." पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सलमान इम्तियाज़ ने कहा कि " नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में हम लोगों ने मशाल जुलूस निकाला है. सभी लोगों से हमारी अपील है कि इस विधेयक का विरोध करें. यह विधेयक , मुस्लिम विरोधी विधेयक है." पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष फैज़ुल हसन ने कहा कि " यह विधेयक मुसलमानों की पहचान को समाप्त करने के लिए लाया गया है. इस विधेयक के माध्यम से देश में गृह युद्ध की स्थिति पैदा की जा रही है."
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने परीक्षा को भी स्थगित करने की मांग की थी मगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इससे इन्कार कर दिया. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना था कि " अन्य राज्यों के भी छात्र अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं. परीक्षा के बाद सभी ने अपना ट्रेन में आरक्षण करा रखा है. परीक्षा स्थगित करने से सभी को दिक्कत होगी.”
भाजपा सांसद सतीश गौतम ने कहा कि "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह साबित किया है कि यहां पर राष्ट्र विरोधी ताकतें एकत्र हो चुकी हैं. पूरे देश में नागरिकता संशोधन विधेयक पर हर्ष का वातावरण है मगर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विरोध किया जा रहा है. परिसर में हिन्दुओं के खिलाफ नारेबाजी की घटना यह साबित करती है कि वहां पर राष्ट्र विरोधी ताकतें अपनी जड़ें जमा रहीं हैं.”

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आरक्षण का भी है विवाद
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष बृजलाल ने कहा कि "जब मेरी जानकारी में यह मामला आया था. तब आयोग की तरफ से नोटिस जारी किया गया था. नोटिस में उच्च न्यायालय का भी हवाला दिया गया था कि जब कोर्ट, उसे मुस्लिम विश्वविद्यालय नहीं मानती तो किस आधार पर पिछड़ों और वंचितों को आरक्षण नहीं दिया जा रहा है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना के समय हिन्दुओं ने भी अनुदान दिया था. मगर आरक्षण की व्यवस्था में वहां पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है." इस मामले में 2018 में 5 जुलाई को आयोग की तरफ से नोटिस जारी किया गया था. नोटिस का जवाब देने के लिए एक माह का समय दिया गया था. कुछ माह बाद बृजलाल का कार्यकाल समाप्त हो गया. वर्ष 2018 में ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया ने भी यह चेतावनी दी थी कि “अगर आरक्षण नहीं लागू किया गया तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की ग्रांट रोकने के लिए सिफारिश की जाएगी." मगर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अभी भी उसी ढर्रे पर चल रहा है.
तिरंगा यात्रा निकालने पर विश्वविद्यालय ने दिया कारण बताओं नोटिस
वर्ष 2018 के जनवरी माह में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो छात्र नेताओं को तिरंगा यात्रा निकालने पर कारण बताओं नोटिस जारी किया था. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दो छात्र नेताओं ठाकुर अजय सिंह एवं सोनवीर सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से तिरंगा यात्रा निकाली थी. तिरंगा यात्रा को लेकर कहीं कोई विवाद नहीं हुआ और ना ही कहीं पर कोई शान्ति भंग हुई. मगर यह बात विश्वविद्यालय प्रशासन को नागवार लगी और इन दोनों छात्र नेताओं को कारण बताओ नोटिस दे दी गई थी. छात्र नेता ठाकुर अजय सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस का जबाब देते हुए कहा कि “तिरंगा यात्रा निकालने के पहले ही 19 जनवरी को अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था मगर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई भी निर्णय नहीं लिया गया. प्रार्थना पत्र पर कोई भी निर्णय न लिए जाने का यह आशय निकलता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को उस पर कोई आपत्ति नहीं है. जहां तक बात तिरंगा यात्रा निकालने के अधिकार की है तो ऐसा करने का अधिकार संविधान में मिला हुआ है. संविधान के अनुच्छेद 19 (1 ) ए और 19 (1 ) बी में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के अंतर्गत यह अधिकार सभी नागरिक को प्राप्त है.”
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम ने उस समय कहा कि ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भी इसी देश में है और उत्तर प्रदेश में स्थित है. नियम – कानून जो अन्य लोगों के लिए हैं. वही नियम विश्वविद्यालय के लोगों के लिए भी हैं. ऐसा देखने में आया है कि किसी ना किसी कारण से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय इस तरह के विवादों में रहता है. तिरंगा कहीं भी फहराया जा सकता है. तिरंगा यहीं पर फहराया जाएगा और उसे कोई रोक नहीं सकता है. जब कैम्पस में देश विरोधी नारे लगाये जाते हैं, आतंकवादी मन्नान वानी का समर्थन किया जाता है. तब विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई दिक्कत नहीं होती है. जब तिरंगा यात्रा निकालने के लिए अनुमति मांगी जाती है तो उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया जाता है. तिरंगा यात्रा निकालने पर छात्रों को कारण बाताओ नोटिस दी जाती है. विश्वविद्यालय प्रशासन दोहरा रवैया अपना रहा है . इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’
छात्र नेता ठाकुर अजय सिंह एवं सोनवीर सिंह ने सवाल उठाया था कि “जम्मू -कश्मीर में जब आतंकवादी मन्नान वानी मारा गया तब इस विश्वविद्यालय में उसके मारे जाने का विरोध किया गया. आतंकी वानी के समर्थन में कुछ लोगों ने नारे तक लगाए मगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसका संज्ञान तक नहीं लिया.”