नारी के सम्मान व सुरक्षा का आह्वान
   दिनांक 11-दिसंबर-2019

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मंच पर विराजमान (बाएं से) मनोहरलाल, ओम बिरला, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज एवं श्री मोहनराव भागवत 
'महिलाओं के साथ अत्याचार करने वालों की भी माता-बहनें हैं। ऐसे लोगों को शायद घर में यह सिखाया नहीं गया कि मातृशक्ति से कैसे व्यवहार करना चाहिए। हैदराबाद की घटना से पूरा देश आक्रोशित है, यकीनन उसने सबको व्यथित किया है। समाज की ही जिम्मेदारी बनती है कि वह सजग हो और मातृशक्ति का सम्मान व सुरक्षा करे।'' उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही। वे गत दिनों नई दिल्ली स्थित लाल किला मैदान में गीता जयंती पर 'जियो गीता' संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने हैदराबाद की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यकीनन सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है और रहेगी। लेकिन सब उन्हीं पर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। परिवार एवं समाज को जिम्मेदारी लेनी होगी। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भारत जैसे देश में दुष्कर्म और भ्रष्टाचार की घटना अशोभनीय एवं चिंताजनक है। वहीं लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में जीवन की हर विपदा, चुनौती का समाधान समाहित है।
 
 
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कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्धजन
 
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए साधु-संतों को भी आगे आना होगा। महिलाओं की सुरक्षा का कर्तव्य किसी एक व्यक्ति का हो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह कर्तव्य समस्त समाज का है, हम सबका है। उनका सम्मान, संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है और हमारे धर्म में इसे परिभाषित भी किया गया है। जैन संत आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। जूनापीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज, परमानंद जी महाराज, राघवानंद जी महाराज जैसे अनेक लोगों ने भी उपस्थित जन समुदाय को संबोधित किया।