यदि हर यहूदी इजरायल का नागरिक हो सकता तो हर हिंदू भारत का नागरिक क्यों नहीं..
   दिनांक 11-दिसंबर-2019
सात दशकों तक भारत में सेकुलरिज्म के नाम पर फिलिस्तीन को लेकर आंसू बहाए जाते रहे. वैश्विक मंचों पर फिलिस्तीन के विषय को भारतीय राजनयिकों से उठवाया जाता रहा लेकिन पाकिस्तान बंग्लादेश में मिटाए-सताए-तडपाए जा रहे हिंदुओं के आंसुओं पर धूल डाली जाती रही क्यों ?

bangladesh _1  
वो इतने बेबस रहे हैं कि मरने के बाद उनकी राख भी गंगा में समाने के लिए बरसों इंतज़ार करती आई है. जीवन भर पाकिस्तान और बांग्लादेश के पिंजरे में कैद रही उनकी आत्मा मृत्यु के बाद भी अपने उन परिजनों के इर्द-गिर्द बेचैन घूमती होगी जो आज भी इन कट्टर इस्लामी समाजों में ज़िल्लत भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं. भारत के अलावा उनके लिए उम्मीद की कोई किरण सारे संसार में नहीं है. पर भारत की छद्म सेकुलर राजनीति ने उन्हें सात दशक का पीड़ादायी इंतज़ार करवाया, और आज भी उन पर रहम नहीं कर रहे. सात दशकों तक, वो भागकर, लुट-पिटकर भारत आते रहे लेकिन यहां भी पराए बनकर जिंदगी काटने पर विवश रहे. स्वयंसेवी संस्थाएं उनकी कुछ मदद करती, लेकिन प्रशासन, क़ानून और कागज़ का हवाला देकर बेदर्द बना रहता.
सुकून की बात है, कि मोदी सरकार उनके लिए नागरिकता संशोधन विधेयक लेकर आई है. लेकिन गठ्ठा वोट की राजनीति उसमें अड़ंगे लगाने पर आमादा है. विधेयक को लेकर असत्य फैलाया जा रहा है. नागरिकता संशोधन विधेयक पर भ्रम का जाल बुनने की कोशिश छद्म सेकुलरवाद के ढहते किले को बचाने की आख़िरी कोशिशों में से है. ये उपासना पद्धति के नाम पर सताए गए लोगों को देर से मिलने जा रहे न्याय में अड़ंगा लगाने का अमानवीय प्रयास है.
ख़त्म न होने वाला सिलसिला
जब भारत का विभाजन होकर पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान अस्तित्व में आया तो वहां हिंदू कुल आबादी का क्रमशः 28 और 11 प्रतिशत थे, जो आज 8 और 2 प्रतिशत रह गए हैं. उनके मंदिर मिटा दिए गए. उनके काम धंधे उनसे छीने गए. सरकारी नौकरियों के दरवाजे उनके लिए बंद हो गए. इस्लाम के नारे पर अपनी दूकान चलाने वाले वहां के राजनीतिक लोग उनके लिए कुछ करने को तैयार नहीं थे. उन्हीं में से बहुत उनके जर –ज़मीन, घर की स्त्रियों और बेटियों पर नज़र लगाए बैठे थे. इसलिए उन्हें कभी पनपने नहीं दिया गया और आज तक ऐसा जारी है. इन विपरीत परिस्थितियों में जब कुछ लोग अपने मेहनत से कुछ कर दिखाते हैं, तो उनका अपहरण हो जाता है, और कई बार तो फिरौती लेकर भी हत्या कर दी जाती है. अगस्त 2016 में कराची के 56 वर्षीय चिकित्सक प्रीतम लखवानी को हिंदू होने के अपराध में गोली मार दी गई. उसके एक हफ्ते पहले 32 वर्षीय चिकित्सक अनिल कुमार को भी इसी प्रकार मार डाला गया था. दिसंबर 2012 में इस्लामाबाद में जानेमाने चिकित्सक डॉ लक्ष्मीचांद को गोलियों से भून दिया गया था. नवंबर 2011 में सिंध में ईद उल अदहा के दिन तीन हिंदू चिकित्सकों अशोक कुमार, नरेश कुमार और अजीत कुमार को दिन दहाड़े मार डाला गया था. छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को फिरौती के लिए उठा लेना आम बात है. पाकिस्तान के अधिकांश हिंदू मजदूरी, सफाई या छोटे मोटे मेहनत के काम करके जिंदगी गुजारते हैं. बहुत से तो बड़े-बड़े जमींदारों के यहां बंधुआ मजदूर हैं. पाकिस्तान में 80 प्रतिशत सफाई कर्मचारी गैर मुस्लिम हैं. उनकी कोई सुनवाई नहीं है. नए पाकिस्तान का वादा करके सत्ता में आए इमरान खान की पार्टी की पहली सरकार खैबर पख्तून ख्वा में बनी थी. इस सरकार ने क़ानून पारित किया कि साफ़-सफाई के कामों के लिए गैर मुस्लिमों को ही नियुक्त किया जाए. जून 2019 में पाक फ़ौज मुजाहिद फ़ोर्स ने अखबारों में दरजी, मोची आदि की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया जिसमें सफाई कर्मचारी के आगे “केवल गैर मुस्लिम” लिखा हुआ था.

bangladesh _1  
बंग्लादेश में भी गैर मुस्लिमों के लिए हालात दयनीय और खतरनाक हैं. 1971 में जब बंग्लादेश का निर्माण होने के पहले पाक फ़ौज ने यहां नरसंहार और बलात्कारों का जो नग्न नृत्य किया उसका मुख्य निशाना यहां की हिंदू आबादी थी. 40 लाख लाशों पर बंग्लादेश की आज़ादी आई, लेकिन यहां के समाज पर हावी इस्लामी कट्टरपंथियों ने गैर मुस्लिमों, विशेषकर हिंदुओं के साथ फिर खूंरेजी का दौर शुरू कर दिया. जमात ए इस्लामी बंग्लादेश और दूसरे संगठनों ने इन पर लगातार कहर बरपाया. मंदिर तोड़े गए. सामूहिक बलात्कार किए गए, जिनका मार्मिक चित्रण ‘अपने उपन्यास (लज्जा) में करने के कारण लेखिका तस्लीमा नसरीन को बांग्लादेश छोड़ना पडा. जब 1971 के जघन्य युद्ध अपराधों के लिए जमात ए इस्लामी बंग्लादेश के दिलवार हुसैन सैय्यदी जैसे नेताओं को फांसी तो सजा सुनाई गई तो बंग्लादेश (और भारत में कोलकाता में) उग्र प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों के बाद हिंदुओं के घरों को जलाने और उन्हें पीट-पीटकर मार डालने की घटनाएं बंग्लादेश में जगह-जगह हुईं.
हिंदुओं पर अत्याचार अन्याय करने वालों में सिर्फ बंग्लादेश के मुस्लिम संगठन शामिल नहीं हैं, बड़ी-बड़ी व्यावसायिक और वित्त संस्थाएं और सरकार- प्रशासन भी जुल्म- भेदभाव में पीछे नहीं हैं. आज से कुछ वर्ष पहले इस्लामी बैंक बंग्लादेश लिमिटेड ने रिक्तियों के लिए निविदा सूचना जारी की तो उसमें लिखा था कि आवेदक का मुस्लिम होना आवश्यक है.
बंग्लादेश का कुख्यात शत्रु संपत्ति क़ानून हिंदुओं की लाश को नोचने वाला क़ानून है. बाद में इसका नाम बदलकर वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट कर दिया गया. यह क़ानून ऐसा है कि यदि कोई गैर मुस्लिम गायब हो जाए, फिर भले ही उसकी हत्या हो जाए और लाश न मिले, या वो इस्लामी कट्टरपंथियों से जान बचाकर बंग्लादेश से भाग जाए, तो इस एक्ट के तहत उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाती है. सन 2000 में प्रकाशित एक रिपोर्ट ‘इनक्वायरी इनटू काज़ेस एंड कॉनसीक्वेन्सेज़ ऑफ़ डिप्राइवेशन ऑफ़ हिंदू माइनॉरिटीज ऑफ़ बांग्लादेश’ के अनुसार 9 लाख 25 हज़ार हिंदू परिवार इस क़ानून से प्रभावित हुए हैं. जिन की संपत्ति इस प्रकार जब्त की गई है उनमें नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्यसेन भी हैं. पाकिस्तान और बंग्लादेश में हिंदुओं के मंदिरों मठों पर भी सरकार या स्थानीय दबंगों ने कब्जे कर रखे हैं. बड़े-बड़े मंदिरों की मूर्तियां गायब हो जाती हैं. फिर उसे होटल में बदल दिया जाता है. या उसकी जमीन भूमाफिया हथिया लेता है. प्रशासन अंधा-बहरा बना रहता है. पाकिस्तान में हिंदुओं के बहुत से पूजा स्थल कुख्यात इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के नियंत्रण में हैं. हिंदू किसानों की 1 लाख 35 हजार एकड़ जमीन पर भी इस बोर्ड ने कब्जा कर रखा है. बंग्लादेश में 2003 से लेकर 2013 तक दो लाख हिंदू परिवारों ने 40 हजार 667 एकड़ भूमि खोई. जबकि शत्रु संपत्ति क़ानून के नाम पर हिंदू परिवारों ने 21 लाख एकड़ भूमि गंवा दी. बंग्लादेश में तोड़े गए मंदिरों की सूची इन्टरनेट पर उपलब्ध है.
पाकिस्तान और बंग्लादेश दोनों मे रोजगार व नौकरियों में हिंदुओं की स्थिति करुणाजनक है. बंग्लादेश का उदाहरण लें तो वहां के पब्लिक सर्विस कमीशन का रिकॉर्ड बतलाता है कि यदि लिखित परीक्षा में 25 प्रतिशत हिंदू पास होते हैं तो मौखिक परीक्षा (वायवा) में 2 से 3 प्रतिशत. आज तक एक भी हिंदू पब्लिक सर्विस कमीशन बांग्लादेश का चेयरमैन नहीं बना. मुस्लिम एसोशिएट प्रोफ़ेसर को वायवा बोर्ड का सदस्य बना दिया जाता है लेकिन हिंदू प्रोफ़ेसर को नहीं. लगभग दस वर्ष पूर्व ढाका विश्विद्यालय ने परीक्षा कापियों पर रोल नंबर लिखने के साथ नाम लिखने का भी नियम बना दिया, ताकि हिंदू छात्रों की पहचान हो सके. किसी भी बड़े प्रशासनिक पद पर हिंदुओं को नहीं पहुंचने दिया जाता. खालिदा जिया की सरकार के समय हिंदुओं को बैंक ऋण न देने का अतिगोपनीय पत्र मंत्रालय द्वारा बैंकों को भेजा गया था.
हिंदू लड़कियों और महिलाओं का नारकीय शोषण

bangladesh _1  
आज बांग्लादेश में बलात्कार की शिकार महिलाओं में 80 प्रतिशत हिंदू महिलाएं हैं. भारत में एक कार्यक्रम में बोलते हुए तस्लीमा नसरीन ने एक ऐसी ही मां-बेटी की दारुण व्यथा सुनाई थी, जिसमें एक हिंदू मां और उसकी 12 वर्षीय बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. मां बलात्कारियों से मिन्नतें कर रही थी कि वो एक-एक करके उसकी बेटी के पास जाएं. तस्लीमा का ये वीडियो यूट्यूब पर मौजूद है. बंग्लादेश में चुनाव हों, राजनैतिक गतिरोध हो, या सत्ता पक्ष-विपक्ष में तनातनी हो, कस्बों से लेकर दूरदराज के गांवों की हिंदू महिलाओं पर कट्टरपंथी टूट पड़ते हैं.
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने 2010 में रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान में प्रत्येक माह 25 बच्चियों-लड़कियों का अपहरण, जबरन इस्लाम में मतांतरण और बलात निकाह करवाया जा रहा था. बाद के सालों में ये आंकड़ा और बढ़ गया. नए आंकड़ों के अनुसार सिंध में प्रतिदिन एक हिंदू लड़की अगवा हो रही है. दिसंबर 2012 में उमरकोट, सिंध की विजंती मेघवार नामक 6 वर्षीय बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ. बच्ची सड़क के किनारे बेहोश पड़ी मिली. उसे यातनाएं भी दी गईं थीं. आरोपियों के नाम सामने आ गए. पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति ज़रदारी के आश्वासन के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई. विजंती के परिवार को नेताओं और पुलिस ने धमकाकर चुप करा दिया.
ननकाना साहिब के तम्बू साहिब गुरुद्वारे के ग्रंथी भगवान सिंह की 19 वर्षीय बेटी को 28 अगस्त 2019 की रात को बन्दूक की नोक पर उठा लिया गया. लड़की के परिवार ने वीडियो जारी करके इमरान खान से न्याय दिलाने की याचना की, और बताया कि पुलिस सब कुछ जानते हुए उनकी बेटी को वापस लाने के लिए कुछ नहीं कर रही है, इसके उलट उन्हें मुंह बंद रखने को धमकाया जा रहा है. पर कुछ नहीं हुआ. मामला अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में उछल गया तो परिवार को एक वीडियो भेजा गया जिसमें उनकी बेटी को उसके तथाकथित पति के बाजू में बिठालकर उससे पूछा गया कि क्या उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूला है? सहमी लडकी ने “हां” में उत्तर दिया. 13 साल की रवीना और उसकी 15 वर्षीय बहन रीना का अपहरण कर निकाह करवा दिया गया. लड़कियों के पिता और भाई अदालत पहुँचे. 11 अप्रैल 2019 को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि दोनों बहनों ने अपनी मर्जी से निकाह किया है.
10 नवंबर 2010 को लाइनी जिले की पूनम अचानक घर से गायब हो गई. परेशान माँ-बाप को दो दिनों बाद पता चला कि उसे एक स्थानीय मदरसे में ले जाकर रखा गया है और मुस्लिम बना दिया गया है. पूनम के पिता भंवरू ने बताया कि जब वो पत्नी के साथ बेटी से मिलने गया तो भयभीत बालिका ने रोते हुए कहा कि वो घर चलना चाहती है लेकिन इमाम साहब उसे जाने नहीं देंगे. भंवरू पुलिस के पास गया, लेकिन रिपोर्ट भी न लिखी गई.
अगस्त 2012 में 14 वर्षीय मनीषा कुमारी का बलात निकाह 26 वर्षीय गुलाम मुस्तफा से करवा दिया गया. घरवाले न्याय की चौखट पर पहुंचे. अदालत ने माना कि लडकी नाबालिग है, लेकिन यह कहते हुए निकाह को जायज़ ठहराया कि उसकी उम्र शादी के लिए ठीक है, और मनीषा को गुलाम मुस्तफा को सौंप दिया. 12 साल की मोमल मेघवार को 5 हथियारबंद लोगों ने 13 नवंबर 2012 को ईंट भट्टे पर काम करते हुए उसके परिवार की आँखों के सामने से अगवा कर लिया. फिर उसका निकाह करवा दिया गया. पहले तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. धरने प्रदर्शन के बाद मामला न्यायालय में पहुँचा. पिता ने अदालत से कहा कि उनकी बच्ची पर ज़ुल्म हुआ है, और वो अभी नाबालिग है. अदालत का उत्तर था “इस्लाम क़ुबूल करने की कोई उम्र नहीं होती.”
17 साल की आशा कुमारी ब्यूटी पार्लर में प्रशिक्षण लेने जाती थी. उसे पार्लर से अपहृत कर लिया गया, और 40 लाख की फिरौती मांगी गई. परिवार ने किसी तरह जुटाकर 40 लाख अपहरणकर्ताओं को दिए, पर आशा को तब भी नहीं लौटाया गया. ऐसी हजारों कहानियां हैं.
शिक्षा और मीडिया

pakistani school _1 
पाकिस्तान के विद्यालयों का पाठ्यक्रम हिंदू निंदा और नफरत से भरा हुआ है. यहाँ किताबों में लिखा जाता है कि हिंदू मक्कार और दुष्ट होते हैं. वो इस्लाम को मिटा डालना चाहते हैं. विभाजन के समय मुसलमानों ने भारत जाने वाले हिंदुओं की हर तरह से सहायता की लेकिन हिंदुओं और सिखों ने पकिस्तान आने वाले मुसलमानों को मारा-काटा और लूटा. यहाँ लिखा जाता है, कि कृष्ण दुष्ट और बदमाश थे. हिंदू साधु गंदे होते हैं, वो अपना मल खाते हैं. हिंदू काली की मूर्ति के सामने गैर हिंदुओं की बली देते हैं. हिंदुओं ने अंग्रेजों के साथ मिलकर मुसलमानों के खिलाफ षडयंत्र किये आदि.
पाकिस्तान के मीडिया के चंद लोगों को छोड़कर हिंदुओं को गाली देने से किसी को परहेज़ नहीं है. यहाँ रमजान के महीने में हिंदू लड़के के इस्लाम अपनाने का लाइव टेलीकास्ट किया जाता है. साल 2012 में ARY टीवी पर हिंदू लड़के सुनील के मुसलमान बनने का सीधा प्रसारण किया गया, और कार्यक्रम की प्रस्तोता माया खान इस घटना का महिमामयी वर्णन करती रही। दुनिया टीवी के प्रसिद्ध समाचार कार्यक्रम में प्रस्तोता सोहेल अहमद उर्फ अजीजी कहता है, कि पाकिस्तान में जो बुद्धिजीवी लोग द्विराष्ट्र सिद्धांत पर सवाल उठाते हैं, वो बेवकूफ हैं , और उन्होंने हिंदुओं का असली चेहरा नहीं देखा। पाकिस्तान के ही एक अन्य चैनल न्यूज़ वन के टॉक शो में जमात-ए-इस्लामी के उप महासचिव डॉक्टर फरीद पराचा से बात करते हुए प्रस्तोता फैसल रहमान पूछता है कि हिंदू जहनी तौर पर मुसलमान से घबराता क्यों है? इसका मसला क्या है जी हमारे साथ… ? पाकिस्तान को तबाह करने के लिए यहूदी और हिंदुओं की ऐसी गंदी सोच क्यों है?
पराचा जवाब देता है, कि “हमें दुश्मन भी घटिया किस्म का मिला है। उनमें न कोई जर्फ (गहराई) है, ना बर्दाश्त है, ना खुद्दारी है। मक्कारी उनकी फितरत में है। पीठ में छुरा भोंकना उनकी आदत है। मुंह में राम-राम बगल में छुरी उनके लिए ही बने मुहावरे हैं। उन (हिंदुओं) का इतिहास इन सब से भरा हुआ है।” पाकिस्तान की कई फिल्मों में भी हिंदुओं का वीभत्स चित्रण किया गया है.
कहां जाएं ये लोग.....
इस नरक में जी रहे ये लोग भारत के अलावा किससे आस लगा सकते हैं. सात दशकों तक भारत में सेकुलरिज्म के नाम पर फिलिस्तीन को लेकर आंसू बहाए जाते रहे. वैश्विक मंचों पर फिलिस्तीन के विषय को भारतीय राजनयिकों से उठवाया जाता रहा लेकिन पाकिस्तान बंग्लादेश में मिटाए-सताए-तडपाए जा रहे हिंदुओं के आंसुओं पर धूल डाली जाती रही. मदद तो दूर, उनके लिए दो शब्द बोलना भी ज़रूरी नहीं समझा गया. आज जब नागरिकता संशोधन विधेयक लाकर इस अन्याय का सुधार किया जा रहा है तब इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताकर झूठ का बाज़ार सजाया जा रहा है. इस विधेयक का भारत के मुस्लिमों से कोई लेना-देना ही नहीं है तो ये विधेयक मुस्लिम विरोधी कैसे हो गया ? पाकिस्तान-बंग्लादेश के सभी अल्पसंख्यकों को इसमें शामिल किया गया है, जो इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा उत्पीड़ित किये जा रहे हैं. तो ये पूजा पद्धति के आधार पर अन्याय कैसे हो सकता है?
बहुत हुआ अब....
70 वर्ष पहले एक अन्याय हुआ जब लाखों करोड़ों लोगों को उनकी अपनी ही धरती पर बेगाना बना दिया गया. जो सैकड़ों पीढ़ियों से भारत में रहते आए थे, उन्हें अचानक बताया गया कि अब वो पाकिस्तान में हैं. एक रात में ही वो अपने पास-पड़ोस में अवांछित हो गए. जो भागकर भारत आ सके वो भाग्यशाली थे. शेष मारे गए, और जो बच गए उनकी आने वाली पीढियां अगले सात दशकों तक अपमान, आतंक, अन्याय और अभावों का जीवन जीने पर मजबूर हो गईं. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान और बंग्लादेश में गैर मुस्लिम होने की सजा बहुत बड़ी है, जिसे वहां करोड़ों ने भुगता. वो धीरे-धीरे वहाँ से अदृश्य होते गए. वो आज भी मिटाए जा रहे हैं. इनकी रक्षा भारत का दायित्व है. हिंदू पहचान को बचाकर सालों से इस तरह जी रहे पीड़ित मानवता के इस अंश को अब अंक में समेटने का समय है.