संस्कारों के बीजारोपण के लिए शिशु संगम
   दिनांक 11-दिसंबर-2019
 
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शिशु संगम में प्राणायाम का प्रदर्शन करते बच्चे
 
विद्या मंदिरों में बालकों को शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास की शिक्षा दी जाती है।'' उक्त बात विद्या भारती बालिका शिक्षा की राष्ट्रीय सह संयोजिका प्रमिला शर्मा ने कही। 
 
''संस्कार-युक्त व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से सरस्वती शिशु मंदिर का बीजारोपण हुआ था, जो आज वटवृक्ष बन चुका है। इन विद्या मंदिरों में बालकों को शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास की शिक्षा दी जाती है।'' उक्त बात विद्या भारती बालिका शिक्षा की राष्ट्रीय सह संयोजिका प्रमिला शर्मा ने कही। वे पिछले दिनों जयुपर के जवाहर नगर स्थित सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में 70वें संविधान दिवस के अवसर आयोजित शिशु संगम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि विद्या भारती जो लक्ष्य लेकर चली थी, वह लगातार उसी ओर बढ़ रही है। इससे जुड़े विद्यालयों में बालकों को सभ्य और संस्कार-युक्त बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यकीनन कोई भी विद्यालय बालक की तपस्थली होता है, जहां उसे संस्कार मिलते हैं लेकिन घर में जननी की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। वह चाहे तो अपने बालक को महाराणा प्रताप, समर्थ गुरु रामदास, शिवाजी महाराज जैसा बहादुर, निडर और देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाला बनने के लिए प्रेरित कर सकती है। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जयपुर के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि बालकों को जो संस्कार शिशु अवस्था में दिए जाते हैं, वे संस्कार उनके जीवन पर्यन्त बने रहते हैं। बालकों को गुण संपन्न बनाने के लिए माताओं को शिवाजी की माता जीजाबाई जैसी नारी बनकर अपनी संतान को संस्कार देने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत माता की जय का उद्घोष करने वाले बालक कभी राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकते, इसलिए आज उनमें संस्काररूपी बीजारोपण करना अत्यावश्यक है। जिससे देश की भावी पीढ़ी राष्ट्रभक्त, संस्कारयुक्त व देश के प्रति चिंतन करने वाली बन सके। समिति के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद अरोड़ा ने बालकों को गुरु नानकदेव के जीवन की शिक्षाएं देने की बात कहते हुए संविधान स्थापना दिवस पर प्रकाश डाला।