शिमला में गोसंरक्षण पर संगोष्ठी संपन्न
   दिनांक 16-दिसंबर-2019
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मंच पर उपस्थित (बाएं से तीसरे) मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर एवं अन्य अतिथिगण
 
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री अशोक वार्ष्णेय का। वे पिछले दिनों शिमला में 'गोमाता का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे। 
 
''समग्र, समावेशी भाव से गाय की सेवा करने पर ही स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विचार करके आरोग्यता प्राप्त की जा सकती है।'' यह कहना है आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री अशोक वार्ष्णेय का। वे पिछले दिनों शिमला में 'गोमाता का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज विश्व में दूध के क्षेत्र में अनेक प्रकार के अनुसंधानात्मक कार्य हो रहे हैं। जर्सी गाय के दूध में गुणवत्ता नहीं होती, भले ही वह कितना भी अधिक दूध दे, जबकि देसी नस्ल की गायों के दूध व स्वास्थ्यवर्धक गुणों की कोई तुलना नहीं है। इस मौके पर कार्यक्रम में उपस्थित राज्य के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आज लोग बड़ी शान से बताते हैं कि हमारा एक बेटा अमेरिका में है, दूसरा ब्रिटेन में है। लेकिन जब उनके खुद के बारे में पूछा जाता है कि वे कहां पर रहते हैं तो वे शर्म से बताते हैं कि वे वृद्धाश्रम में रहते हैं। इसी प्रकार की हालत आज गायों की भी हो गयी है। उनसे लोग दूध-दही जैसे अमृत तुल्य पदार्थों को प्राप्त करते हैं, लेकिन बाद में उनको सड़क पर छोड़ देते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और संस्कारों में गाय के महत्व को बताते हुए कहा कि भारतीय कृषि का आधार गाय ही रही है। इसलिए हमें गाय के महत्व को समझना ही होगा। विसंके, शिमला