भारतीय विचारधारा और सोच पर आधारित हो तंत्र
   दिनांक 02-दिसंबर-2019
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 मानव जीवन में उल्लेखनीय योगदान के लिए मातृशक्ति को सम्मानित किया गया
 
हमें अपने घर-परिवार के बेटों-बेटियों को प्रेरित कर वहां भेजना होगा जहां पर समाज में भारतीय विचाराधारा आधारित कार्यक्रम होते हैं।’’
 
‘‘स्वाधीनता प्राप्त करने में हमें जितना समय लगा, उतना समय शायद मानसिक गुलामी से मुक्ति में न लगे बशर्ते इसकी बागडोर हम नई पीढ़ी को सौंप दें और इसके लिए हमें नई पीढ़ी को तैयार करना होगा। उनके मन-मस्तिष्क में भारतीय विचारों को भरना होगा और प्रबुद्ध वर्ग को यह कार्य ऐसे ही बौद्धिक आयोजनों से करना होगा। हमें अपने घर-परिवार के बेटों-बेटियों को प्रेरित कर वहां भेजना होगा जहां पर समाज में भारतीय विचाराधारा आधारित कार्यक्रम होते हैं।’’
 
उक्त बात कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सदानंद सप्रे ने कही। वे गत दिनों दमोह स्थित स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित एक दिवसीय श्रीगुरुजी स्मृति व्याख्यानमाला में ‘‘वैचारिक गुलामी से भारतीय मानस की मुक्ति’’ विषय पर बोल रहे थे। वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सन् 1947 में हम राजनैतिक गुलामी से शत-प्रतिशत नहीं वरन् 70 प्रतिशत ही मुक्त हुए। दूसरे शब्दों में कहें तो हम स्वतंत्र नहीं स्वाधीन हुए हैं। समाज और देश को आगे बढ़ाने वाले सारे तंत्र आज भी पश्चिमी विचारधारा पर आधारित हैं। जबकि इन्हें भारतीय विचारधारा और सोच पर आधारित होना चाहिए। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ चिकित्सक संजय त्रिवेदी ने कहा कि बाहर के लोगोंने कहा और हमने उसे यथावत मान लिया—यह हमारी मानसिक गुलामी का प्रतीक है। हमारी शिक्षा सत्य को स्वीकारने की होनी चाहिए।