भारतीय समाज का मर्म है सेवा भाव
   दिनांक 02-दिसंबर-2019
 
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बैठक को संबोधित करते विशिष्टजन
 
इन तीनों स्तंभों को मजबूत करने के लिए जो भी योगदान दिए जाए, वह सेवा है।
 
‘‘किसी को खाना खिला देना अथवा चंद रुपये दे देना ही सेवा का असली मर्म नहीं है अपितु सेवा उसे कहेंगे जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वाभिमानी एवं स्वावलंबी बन सके और अपना तथा अपने परिवार का निर्वहन कर सके।’’ यह बात भारत विकास परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सुरेश जैन ने कही। वे पिछले दिनों नई दिल्ली में परिषद की पहली मासिक बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. के. के. अग्रवाल ने सेवा की अनूठे तरीके से व्याख्या करते हुए कहा कि प्रजातंत्र के तीन मूल स्तंभ हैं- शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय व्यवस्था। इन तीनों स्तंभों को मजबूत करने के लिए जो भी योगदान दिए जाए, वह सेवा है। कार्यक्रम में उपस्थित भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश चन्द्र गुप्ता ने सेवा के बारे में विस्तार से बताया और समाज से आगे आने का आह्वान किया। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में परिषद के कुछ प्रकल्पों की जानकारी भी दी।  प्रतिनिधि