हमें राष्ट्र का निर्माण नहीं बल्कि पुनर्निर्माण करना है
   दिनांक 02-दिसंबर-2019
 
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श्री भैयाजी जोशी को स्मृति चिह्न प्रदान करते डॉ. विजय भाटकर
 
हिन्दुओं के सारे प्रश्न संघ के प्रश्न हैं। हमारा राष्ट्र निमार्णाधीन नहीं है, हमें राष्ट्र का निर्माण नहीं करना, बल्कि पुनर्निर्माण करना है। ठेंगड़ी जी ने कहा था कि हमें क्रांति नहीं करनी है, बल्कि युगानुकूल परिवर्तन करना है।  
‘‘दत्तोपंत ठेंगड़ी जी एक दृष्टा थे, इसलिए उन्हें परिस्थिति का आकलन औरों से पहले हो जाता था। स्वामी समर्थ रामदास लिखित दासबोध और श्रीकृष्ण द्वारा प्रतिपादित श्रीमद्भगवदगीता का एकत्रित दर्शन ठेंगड़ी जी के जीवन में व्याप्त था।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने कही। वे गत दिनों महाराष्ट्र के पुणे में श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत के लोग बड़े भाग्यशाली हैं कि यहां ईश्वरनिष्ठ व्यक्ति हमेशा से अवतरित होते रहे हैं। स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ईश्वर के श्रेष्ठ साधक एवं तपस्वी थे। उनमें अहंकार का कोई अंश भी नहीं था। वे एक श्रेष्ठ योगी थे। राजयोग, कर्मयोग तथा ज्ञानयोग जैसे योगों की सीमाओं के बिना इन योगों के सारे लक्षण उनमें विद्यमान थे। वे कहते थे कि हमारा कार्य ईश्वरीय कार्य है, इसलिए उसका सफल होना तय है। हम इस ईश्वरीय कार्य के केवल श्रेष्ठ साधन बन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ठेंगड़ी जी के अनुसार संघ समाज से अलग नहीं है। हिन्दुओं के सारे प्रश्न संघ के प्रश्न हैं। हमारा राष्ट्र निमार्णाधीन नहीं है, हमें राष्ट्र का निर्माण नहीं करना, बल्कि पुनर्निर्माण करना है। ठेंगड़ी जी ने कहा था कि हमें क्रांति नहीं करनी है, बल्कि युगानुकूल परिवर्तन करना है। अपनी दूरदर्शिता के चलते वे परिस्थिति का बेहतर आकलन कर सकते थे। दृष्टा लोगों द्वारा आत्मविश्वास से कहे गए वचन हमें बल देते हैं। जब हर तरफ साम्यवाद का बोलबाला था, तब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि साम्यवाद नहीं टिकेगा। उन्होंने आपात्काल का भविष्य भी बताया था।
 
1989 में उन्होंने कहा था कि नई शताब्दी के सूर्योदय का रंग भगवा होगा और उसका प्रमाण हम देख रहे हैं। स्व. ठेंगड़ी जी के बताए अनुसार, जीवन के मूल्य और जीवन की शैली यही भारत की विश्व को देन है। अब जागरण शुरू हुआ है और सारा विश्व मार्गदर्शन के लिए भारत की ओर देख रहा है। शक्तिशाली समाज ही विश्व को सही दिशा दिखा सकता है। इस संदर्भ में आज स्व. ठेंगड़ी जी के वचन सही साबित हो रहे हैं।
 
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री श्री विरजेश उपाध्याय ने कहा कि आज के दौर में स्व. ठेंगड़ी जी के विचारों की प्रासंगिकता को देखते हुए जन्मशताब्दी वर्ष मनाने का निर्णय किया गया। राष्ट्र की अवधारणा और विकास की अवधारणा, इस विचार पर आधारित विभिन्न कार्यक्रम संपूर्ण वर्ष आयोजित किए जाएंगे। प्रख्यात उद्यमी एवं भारत फोर्ज के अध्यक्ष बाबासाहेब कल्याणी एवं समारोह के अध्यक्ष प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. विजय भाटकर ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।  विसंकें, पुणे