चर्च में बढ़ता यौन कुंठित पादरियों का प्रभाव
   दिनांक 24-दिसंबर-2019
दुनिया भर की चर्च यौन कुंठित ईसाई पादरियों से भरी पड़ी है। अब उनकी कहानी चर्च की ही रिपोर्ट में सामने आ रही हैं। चर्च में बच्चों का यौन शोषण किया जा रहा है

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कैथोलिक चर्च की प्रकाशित आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार ईसाई पादरियों ने कम से कम 175 बच्चों का यौन शोषण किया है। यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। आंतरिक रिपोर्ट कहती है, लीगनरीज ऑफ क्राइस्ट के संस्थापक मार्शल मैसिएल मैसिएल ने ही 60 बच्चों का यौन शोषण किया है
''कैथोलिक चर्च में पादरियों और बिशप ने ननों का यौन उत्पीड़न किया है। चर्च ने ऐसे कई पादरियों को सस्पेंड किया है। वेटिकन सिटी लंबे समय से इस मुद्दे पर काम कर रहा है।'' पिछले दिनों ईसाई धर्म के सबसे बड़े गुरु पोप फ्रांसिस ने इस बात को स्वीकार किया कि चर्च के अंदर पादरी यौन दुष्कर्म में संलिप्त हैं।
केरल की नन के साथ कैथोलिक बिशप फ्रैंको मुलक्कल के अप्राकृतिक दुष्कर्म और बलात्कार का मामला लगातार मीडिया की सुर्खियों में रहा। जिसके बाद पीड़िता को जिस प्रकार परेशान किया गया, वह चर्च की एक अलग ही कहानी बयान करता है। इसी प्रकार केरल के 51 वर्षीय कैथोलिक पादरी रोबिन वडक्कुमचेरी को नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के लिए 60 साल की सजा सुनाई गई। एक मामले में नाबालिग बच्ची गर्भवती हो गई थी।
इसी साल के शुरुआती महीनों की बात है जब चेन्नै स्थित मद्रास क्रिश्यिन कॉलेज अपने दो प्रोफेसर सेमुएल टेनिसन और आर रवीन को यौन उत्पीड़न का दोषी पाया। इन्होंने कॉलेज में बच्चों का उत्पीड़न किया। प्रारम्भिक स्तर पर इस मामले को कॉलेज में ही दबा देने का प्रयास किया गया लेकिन जब बात न्यायालय तक पहुंची तो न्यायाधीश एस वैद्यनाथन ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “छात्रों विशेषकर छात्राओं के परिवार वालों में यह बात मानी जाती है कि ईसाई शैक्षणिक संस्थानों में उनके बच्चे —बच्चियों का भविष्य अत्यंत सुरक्षित है।” लेकिन साथ—साथ न्यायाधीश ने इस बात की तरफ भी इशारा किया कि किस तरह आज ईसाई संस्थानों पर कन्वर्जन का आरोप लग रहा है। उन्होंने कहा कि ईसाई मिशनरी हमेशा से किसी न किसी मामले को लेकर सवालों के घेरे में रहते हैं। अच्छी शिक्षा देने के बावजूद उनके बीच नैतिकता की शिक्षा देने का सवाल हमेशा महत्वपूर्ण बना रहता है।
 भारत में जिस तरह मिशनरी स्कूलों से एक के बाद एक यौन उत्पीड़न की खबरे सामने आ रहीं हैं, लोगों का विश्वास ईसाई शैक्षणिक संस्थानों से उठने लगा है। वे विद्या मंदिर, केन्द्रीय विद्यालय, दिल्ली पब्लिक स्कूल, दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल, नवोदय, नेतरहाट जैसे विद्यालयों पर अधिक विश्वास करने लगे हैंं।
यह ईसाई शैक्षणिक संस्थानों को शर्मसार करने वाली बात थी कि उनके कॉलेज के एक सहायक प्रोफेसर पर 34 छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप हो। यौन उत्पीड़न का यह मामला जनवरी 2019 में ही मैसूर, बेंगलुरु और कूर्ग के एक शैक्षणिक दौरे में घटित बताया जाता है। हिन्दू जागृति ने कुछ साल पहले एक ईसाई अनाथालय के संबंध में खुलासा किया था।
जिसमें हिन्दू जागृति की वेबसाइट पर लिखा मिलता है — ''बेथल मिशन अनाथालय में कई संदिग्ध मौतें हुईं। कई बच्चे-बच्चियां गायब हैं। छोटे बच्चों को बेचने का भी आरोप लगा। इतना ही नहीं, खूंटी जिले के कंकसी गांव (पोस्ट बिंदा) की सुसंती सोय की मौत पिछले साल हुई। उसकी मौत कैसे हुई? कब हुई? इसका राज बेथल मिशन के संस्थापक जेम्स पुन्नूस के अलावा कोई नहीं जानता। क्योंकि, लड़की की मौत के बाद जेम्स ने इसकी सूचना उसके परिजन और पुलिस को भी नहीं ही दी। पोस्टमार्टम कराने की बजाए गुपचुप तरीके से एचईसी प्लांट अस्पताल के पीछे कब्रिस्तान में उसे दफना दिया गया। सुसंती की मां आज भी वास्तविक स्थिति जानने के लिए तड़प रही है। अनाथालय में हुईं कई घटनाओं के बारे में बेथल मिशन के एक पूर्व कर्मचारी ने कई राज खोले हैं।''
यह सारी स्थितियां इसलिए उत्पन्न हो रहीं हैं क्योंकि आदिवासियों का कन्वर्जन झारखंड में बड़े पैमाने पर हो रहा है। कन्वर्जन के साथ—साथ अब यौन उत्पीड़न भी उसमें शामिल हो गया है। यह हाल इस वक्त सिर्फ भारतीय ईसाई संस्थाओं का नहीं है। पूरी दुनिया यौन कुंठित ईसाई पादरियों से भरी पड़ी है। अब उनकी कहानी चर्च के ही रिपोर्ट में सामने आ रही है।
अर्जेंटीना के एक न्यायालय ने 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले दो कैथोलिक पादरियों फादर होरासियो कोरबाको और फादर फादर निकोला कोराडी को बधिर बच्चों के यौन उत्पीड़न का दोषी पाए जाने के बाद जेल भेज दिया है। यह मामला ईसाई संस्थान एंटोनियो प्रोवो इंस्टीट्यूट फॉर डेफ एंड हियरिंग इम्पीडेड चिल्ड्रन से जुड़ा है। जहां इन्होंने 2005 से 2016 तक 20 बार दुुष्कर्म किया। इनके अपराध पर फैसला मेंडोजा शहर के न्यायालय में तीन जजों ने मिलकर सुनाया।
चर्च के इतिहास में अर्जेंटीना का मामला कोई अनोखा मामला नहीं था। चर्च के अंदर जिस तेजी के साथ यौन कुंठित पादरियों की भर्ती दुनिया भर में हुई है, उसके चर्च में यौन उत्पीड़न आम सी बात हो गई। बच्चे ऐसे में पादरियों के आसान शिकार बनते रहे हैं। अब तक बच्चों के साथ यौन शोषण के मामले में कई पादरियों के नाम सामने आ चुके हैं। जिसको लेकर दुनिया भर में चिन्ता जाहिर की जाती रही है।

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एक बार फिर रोमन कैथलिक चर्च की मेक्सिकन शाखा से जुड़े पादरियों का मामला दुनिया के सामने है। पादरियों पर कई बच्चों के यौन शोषण का आरोप है। यह खुलासा एक आंतरिक रिपोर्ट में हुआ। जिसे पढ़ने के बाद वे लोग चौंक सकते हैं जो ईसाई संस्थानों को विश्वास की नजर से देखते हैं। बाकि जो चर्च के कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न के षडयंत्र को जानते हैं और चर्च की चार दीवारी के बाहर अंदर की खबर ना जाए इसके लिए होने वाले तमाम तरह के प्रपंच को समझते हैं।
 
कैथोलिक चर्च की प्रकाशित आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार ईसाई पादरियों ने कम से कम 175 बच्चों का यौन शोषण किया है। यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। आंतरिक रिपोर्ट कहती है, लीगनरीज ऑफ क्राइस्ट के संस्थापक मार्शियल मैसिएल ने ही 60 बच्चों का यौन शोषण किया है। साथ ही रिपोर्ट कहती है कि यह संख्या 60 से अधिक भी हो सकती है। गौरतलब है कि जो आंकड़े रिपोर्ट के अनुसार सामने आए हैं, वे 1941 से 16 दिसंबर 2019 के बीच के हैं। इस बीच 33 पादरियों ने कम उम्र के बच्चों का यौन उत्पीड़न किया। इन 33 पर मामला आरोप का नहीं था। यौन उत्पीड़न साबित हो चुका था। उसके बावजूद इनमें से 18 पादरियों को चर्च ने निकाला नहीं। वे अब भी संगठन के काम में लगे हुए हैं। अब वे ऐसे कार्यो में सहयोग कर रहे हैं, जिसमें बच्चों से जुड़े विषय शामिल नहीं हैं। क्या अपराधी प्रवृत्ति की पादरियों के लिए इतनी सजा पर्याप्त है? पादरियों के यौन उत्पीड़न से जुड़ी खबरों ने भारतीय ईसाई मतावलम्बियों का विश्वास जड़ से हिला कर रख दिया है।