सोनिया बताएं, पीएफआई और सिमी के जिहादियों से कांग्रेस का क्या गठजोड़
   दिनांक 24-दिसंबर-2019
नागरिकता संशोधन कानून पर जो हिंसा हुई वह पीएफआई और सिमी की देश में आग लगाने वाली साजिश थी. इन गिरफ्तारियों के साथ ही साबित हो गया है कि कांग्रेस पर्दे के पीछे देशद्रोही और विभाजनकारी ताकतों के साथ है

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पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पीएफआई के सदस्य अशफाक और नदीम
जिस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी नागरिकता संशोधन कानून पर राजघाट पर धरना दे रही थीं, पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया के ओहदेदार उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किए जा रहे थे. सीएए पर जिस विरोध प्रदर्शन को सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव खुलेआम समर्थन दे रहे थे, वह पीएफआई और सिमी की देश में आग लगाने वाली साजिश थी. इन गिरफ्तारियों के साथ ही साबित हो गया है कि कांग्रेस पर्दे के पीछे देशद्रोही और विभाजनकारी ताकतों के साथ है. कांग्रेस ऐसे ही आग लगाती है. विभाजन पर लगाई. पंजाब में लगाई. कश्मीर में लगाई.... और अब इनका इरादा पूरे देश में आग लगा देने का है.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक से ज्यादा बार कहा कि बिना सत्ता के कांग्रेस ऐसे तड़पती है, जैसे बिना पानी के मछली. वह तड़प दिखाई दे रही है. वह बौखलाहट इंडिया गेट से राजघाट तक सोनिया गांधी के पूरे कुनबे में नजर आती है. देश को जागीर बनाकर चलाने वाला खानदान आज इस कदर मोहताज है कि किसी मसले पर विरोध के लिए उसके पास अपना कैडर नहीं है. वह जिहादियों के साथ है. वह जुमे के बाद होने वाली हिंसा की तकरीरों के साथ है. वह मसजिदों के लाउडस्पीकर से होने वाले आग लगा देने के ऐलानों के साथ है. कांग्रेस की सोच देश को अस्थिर करने की है. इस सोच में कांग्रेस किस हद तक गिर चुकी है, यह दंगों के आरोपियों की हालिया गिरफ्तारी से साफ है. दक्षिण भारत से जन्मा पीएफ यानी पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया मुस्लिमों का एक उग्र संगठन है. कई आतंकवादी गतिविधियों में इसके शामिल होने का शक है. जब सिमी पर रोक लगी, तो पीएफआई ने अपने पांव उत्तर भारत में पसार लिए. सिमी के साथ सक्रिय देशद्रोही और जिहादी तत्व पीएफआई में आ गए. लखनऊ पुलिस ने सीएए को लेकर उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा पर बड़ा खुलासा किया है. हिंसा के जिम्मेदार तीन मास्टरमाइंड पुलिस ने पकड़े हैं, जो कि पीएफआई के ओहदेदार हैं. इन्होंने ही पूरे प्रदेश में आग लगाने का प्लानिंग की. पुलिस ने जिन तीन दंगाइयों को पकड़ा है, उनके नाम वसीम, नदीम और अशफाक हैं. ये तीनों ही पीएफआई के सदस्य हैं. इन तीनों ने ही हिंसा फैलानी की योजना बनाई थी. इनके पास जो सामान मिला है, बहुत विस्फोटक है. इनके पास बाबरी मसजिद को लेकर भड़ाकाऊ प्रचार सामग्री मिली है. इसके अलावा ऐसी वीडियो क्लिप मिली हैं, जिनमें मुसलमानों के साथ नाइंसाफी और अत्याचार का फर्जी दावा करते हुए हिंसा की अपील की गई है. शामली जिले में भी पीएफआई के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. शामली में तो एक ट्रांसपोर्टर के बिल्डिंग में बाकायदा पीएफआई का दफ्तर चल रहा था. यूपी के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने आन रिकार्ड कहा है कि हिंसा मे पीएफआई और स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया का हाथ है.
पीएफआई के दहशतगर्दों ने व्हाट्सएप के माध्यम से एनआरसी और सीएए को लेकर भ्रामक प्रचार किया. जैसे कि मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी. डिटेंशन कैंप बनेंगे, जिसमें मुसलमानों को रखा जाएगा. कई पीढ़ियों के कागज नागरिकता के लिए दिखाने होंगे. इसी दुष्प्रचार की आड़ में इन्होंने विरोध में लोगों को बड़ी संख्या में एकत्र होकर उग्र प्रदर्शन करने की अपील वायरल की. शक है कि पीएफआई ने आईएसआई और अन्य देश विरोधी ताकतों से इसके लिए फंड जुटाया. इस फंड के बारे में कई डायरियां मिली हैं, जिनकी जांच पुलिस कर रही है. शामली और मुजफ्फरनगर से भी पीएफआई को पैसा मिला है. इस पैसे से पीएफआई ने विरोध प्रदर्शन के लिए बैनर, पोस्टर, झंडे आदि बनवाए. दहशतगर्दी फैलाने की ये साजिश तो खुल गई. आप देख ही चुके हैं कि किस तरीके से देश विरोधी ताकतें मुसलमानों का इस्तेमाल इस देश में अराजकता फैलाने के लिए कर रही हैं. वे करेंगे, क्योंकि उनका उद्देश्य यही है. उनके संगठनों की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है. लेकिन सवाल उन राजनीतिक दलों और खासतौर पर कांग्रेस के लिए खड़ा होता है कि वह इन संगठनों के साथ क्यों है. आखिर क्या मजबूरी है कि कांग्रेस पीएफआई और सिमी जैसे देशद्रोही संगठनों के आंदोलन के समर्थन में खड़ी है.
कांग्रेस अध्यक्ष से ये देश इन सवालों का जवाब मांगता है.


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1. क्या जिस समय कांग्रेस अध्यक्ष सीएए के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन का रामलीला मैदान से आह्वान कर रही थी, उस समय उन्हें पीएफआई और सिमी की साजिश का पता था.
2. क्या सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने पीएफआई और सिमी के साथ देश में अराजकता फैलाने के लिए कोई समझौता किया था.
3. क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी या फिर कांग्रेस का कोई अन्य सदस्य हिंसा फैलाने वाले इन संगठनों के साथ संपर्क में था.
4.क्या सोनिया गांधी को देश को इस बात का जवाब नहीं देना चाहिए कि वह हिंसा का समर्थन कर रही थीं, और हिंसा में अब तक हुई मौतों की जिम्मेदारी उनकी नहीं बनती है.
5. संप्रग सरकार के समय से ही सोनिया गांधी अर्बन नक्सलों के निकट संपर्क में हैं. वे उनके खास सलाहकार रहे हैं. क्या सोनिया गांधी बताएंगी कि इन नक्सली सोच वालों के जरिये ही वह पीएफआई और सिमी जैसे संगठनों के संपर्क में तो नहीं आईं.
6. यह देश जानना चाहता है कि कांग्रेस ने पूरे देश में आग लगाई और फिर सोनिया गांधी पूरे कांग्रेसी कुनबे को लेकर किसी मुंह से राजघाट पर धरना देने के लिए पहुंची. क्या वह स्पष्ट करेंगी कि वह देश में फैलाई गई हिंसा के साथ हैं या फिर महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों के साथ.
7.अब जबकि असम से लेकर उत्तर प्रदेश तक ये साफ हो गया है कि कट्टरपंथी और जिहादी संगठनों ने हिंसा को फैलाया, कांग्रेस ने अब तक इनके साथ अपना कोई गठजोड़ होने या न होने को लेकर कोई सफाई क्यों नहीं दी है. ये देश सोनिया गांधी से ये जानना चाहता है.