अराजक ताकतों को उजागर करने की जरूरत
   दिनांक 30-दिसंबर-2019
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 संगोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्धजन
 
विरोध की आड़ में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।  
गत दिनों विश्व संवाद समिति, जालंधर द्वारा 'नागरिकता संशोधन अधिनियम-भ्रम और वास्तविकता' विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में रक्षा विशेषज्ञों के अलावा बुद्धिजीवियों ने देश में हुई हिंसा पर चिंता जताई एवं अराजकता को देशविरोधी ताकतों की साजिश बताया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित थे रक्षा विशेषज्ञ व रक्षा मामलों के लेखक कर्नल (से.नि.) जयबंस सिंह। अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश की संसद द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद पारित अधिनियम पर हिंसक आंदोलन बहुत चिंताजनक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को सरकार के किसी भी कदम का समर्थन या विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है, परंतु विरोध की आड़ में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हिंसक प्रदर्शनों की प्रकृति बताती है कि ऐसा न केवल राष्ट्र विरोधी ताकतों के इशारे पर किया गया, बल्कि पेशेवर उत्पातियों की सुनियोजित योजना के तहत इसे अंजाम दिया गया।
 
उन्होंने कहा कि पड़ोस के तीन इस्लामिक देशों में सताए गए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की अवधारणा को देश के विभाजन के समय से ही देश के सभी राजनीतिक दलों, नेताओं और लोगों ने स्वीकार किया था। महात्मा गांधी से लेकर जवाहर लाल नेहरू और निवर्तमान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तक ने इसके पक्ष में स्पष्ट रूप से मांग की थी। वर्तमान सरकार ने इसी ऐतिहासिक अवधारणा को धरातल पर लागू करने का साहस दिखाया है। लेकिन कुछ ताकतें गलत सूचना के माध्यम से भ्रम फैलाकर देश के वातावरण को विषाक्त करने का काम कर रही हैं। इसलिए ऐसे तत्वों को पहचान कर पूरी सचाई को जनता के सामने लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम किसी भी तरह से एनआरसी से जुड़ा नहीं है, जबकि इसी आड़ में देश में भय का वातावरण तैयार किया जा रहा है। -विसंके, जालंधर